लखनऊ/7 अगस्त 2026: उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में पढ़ाई के तरीके में इस शैक्षिक सत्र से एक अहम बदलाव देखने को मिलेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 के तहत प्रदेश के उच्च प्राथमिक, कंपोजिट और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में बैगलेस डे आयोजित किए जाएंगे। अगस्त से नवंबर तक प्रत्येक शनिवार को बच्चे किताबों और कॉपियों के बोझ से अलग गतिविधियों के जरिए सीखेंगे।
बैगलेस डे में AI से खेती तक सीखेंगे विद्यार्थी
इस पहल के तहत अगस्त से नवंबर के बीच कुल 10 बैगलेस डे आयोजित किए जाएंगे। वहीं, 14 नवंबर को सभी संबंधित विद्यालयों में बाल मेला लगाया जाएगा। गतिविधियों के संचालन के लिए प्रत्येक विद्यालय को 6,500 रुपये दिए जाएंगे। प्रदेश स्तर पर इसके लिए 28.94 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है।
बैगलेस डे का उद्देश्य बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें अनुभव और गतिविधियों के जरिए सीखने का अवसर देना है। इसमें श्रम के महत्व, स्थानीय हस्तशिल्प, एक जिला-एक उत्पाद (ODOP), आत्मनिर्भर भारत और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसी अवधारणाओं से भी विद्यार्थियों को परिचित कराया जाएगा।
SCERT ने तैयार किया 34 गतिविधियों वाला आनंदम मॉड्यूल
इस कार्यक्रम के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने 34 गतिविधियों वाला ‘आनंदम मॉड्यूल’ तैयार किया है। इसे मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बांटा गया है—
- विज्ञान, पर्यावरण एवं प्रौद्योगिकी
- सार्वजनिक कार्यालय एवं स्थानीय उद्योग
- कला, संस्कृति एवं इतिहास
इस मॉड्यूल के जरिए बच्चों को सिर्फ जानकारी देने के बजाय उसे अपने आसपास की दुनिया से जोड़ने की कोशिश की जाएगी।
मिट्टी के खिलौनों से ड्रोन और रोबोटिक्स तक
बैगलेस डे के दौरान विद्यार्थियों को कई तरह की व्यावहारिक गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। इनमें मिट्टी के खिलौने बनाना, किचन गार्डन तैयार करना, जैविक खेती, जल संरक्षण, स्वास्थ्य एवं चाइल्ड सेफ्टी, जूट क्राफ्ट और विज्ञान मॉडल जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
इसके अलावा बच्चे मिनी बैंक और उद्यमिता से जुड़ी गतिविधियां करेंगे तथा बैंक और डाकघर का भ्रमण भी कर सकते हैं। डूडलिंग, संगीत, नाटक और फोटोग्राफी के साथ ऐतिहासिक स्थलों, स्थानीय उद्योगों और सार्वजनिक अवसंरचना को समझने का मौका भी मिलेगा।
तकनीक से जुड़ी गतिविधियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, स्क्रैच कोडिंग और ड्रोन तकनीक को भी शामिल किया गया है। यानी शनिवार की कक्षा में बच्चे ब्लैकबोर्ड के सामने बैठकर सिर्फ सुनेंगे नहीं, बल्कि देखकर, बनाकर और करके सीखेंगे।
14 नवंबर को होगा बाल मेला
बैगलेस डे की गतिविधियों की श्रृंखला के बाद 14 नवंबर को बाल मेला आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों को अपनी रचनात्मकता और सीखे गए कौशल को सामने रखने के लिए मंच उपलब्ध कराना है।
महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक की ओर से सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इस पूरी पहल का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अब देखना होगा कि विद्यालय स्तर पर इन गतिविधियों को किस तरह जमीन पर उतारा जाता है और बच्चों के सीखने के अनुभव में इसका कितना असर दिखाई देता है।










