नई दिल्ली/7 अगस्त 2026। राजस्थान में बढ़ते जोजरी-बांडी-लूणी नदी प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक एकीकृत समन्वय समूह गठित करने का निर्देश दिया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य तीनों नदियों में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है।
जोजरी-बांडी-लूणी नदी प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
सुप्रीम कोर्ट जोजरी नदी में प्रदूषण से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई कर रहा है। सुनवाई के दौरान बांडी और लूणी नदियों में प्रदूषण का मुद्दा भी व्यापक नदी तंत्र के हिस्से के रूप में सामने आया। अदालत ने पर्यावरणीय नुकसान और प्रशासनिक स्तर पर सामने आई चुनौतियों को गंभीरता से लिया है।
जोजरी नदी जोधपुर से होकर गुजरती है, जबकि बांडी नदी पाली क्षेत्र से बहती है। दोनों नदियां बालोतरा के आसपास लूणी नदी से जुड़ती हैं। ऐसे में किसी एक नदी में प्रदूषण का असर पूरे नदी तंत्र और उससे जुड़े इलाकों पर पड़ता है।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनेगा समूह
शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया है कि प्रस्तावित एकीकृत समन्वय समूह की अध्यक्षता राजस्थान के मुख्य सचिव करें। इसमें पर्यावरण, वन, जल संसाधन और उद्योग समेत संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया जा सकता है।
अदालत की चिंता केवल नदी के पानी तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट में नदी के इकोसिस्टम में गंभीर गिरावट, जल स्रोतों के प्रदूषण, औद्योगिक कचरे के कथित अवैध निस्तारण और भूमि उपयोग से जुड़े नियमों में खामियों जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया है।
प्रदूषण की निगरानी के लिए बनेगा शिकायत तंत्र
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को पर्यावरणीय उल्लंघनों और उनसे जुड़ी अवैध गतिविधियों की समय पर जानकारी सामने लाने के लिए एकीकृत सार्वजनिक रिपोर्टिंग और पर्यावरणीय शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने का भी निर्देश दिया है।
इसका मकसद यह है कि प्रदूषण या पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की शिकायत अलग-अलग विभागों के बीच न उलझे और उस पर समयबद्ध कार्रवाई हो सके।
नदी तंत्र के पुनर्स्थापन पर भी जोर
जोजरी-बांडी-लूणी नदी तंत्र को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले भी राजस्थान सरकार की कार्रवाई और पर्यावरणीय नुकसान पर गंभीर चिंता जता चुका है। अदालत द्वारा गठित उच्चस्तरीय पारिस्थितिकी निगरानी व्यवस्था के तहत नदी तंत्र के पुनर्स्थापन के लिए वैज्ञानिक और समयबद्ध उपायों पर भी जोर दिया गया है।
अब नए समन्वय समूह के गठन से उम्मीद है कि पर्यावरण, जल संसाधन, उद्योग और प्रशासन से जुड़े विभाग एक साझा कार्ययोजना के तहत प्रदूषण पर नियंत्रण और प्रभावित नदी तंत्र के संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ेंगे।











