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मेलबर्न में बोले पीएम मोदी- भारत मदद के लिए पासपोर्ट नहीं देखता, 6G से खेल और अंतरिक्ष तक गिनाईं उपलब्धियां

On: July 9, 2026
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मेलबर्न में बोले पीएम मोदी- भारत मदद के लिए पासपोर्ट नहीं देखता
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नई दिल्ली, 09 जुलाई 2026। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ कार्यक्रम में प्रवासी भारतीयों को संबोधित किया। ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान उन्होंने भारत की विकास यात्रा, डिजिटल क्रांति, शिक्षा, खेल, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और वैश्विक मानवीय सहायता जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से अपनी बात रखी। कार्यक्रम में 30 हजार से अधिक प्रवासी भारतीय शामिल हुए, जिसे ऑस्ट्रेलिया में किसी भी विश्व नेता के लिए आयोजित सबसे बड़े सामुदायिक आयोजनों में से एक माना जा रहा है।

अपने संबोधन की शुरुआत प्रधानमंत्री ने गुजराती में ‘केम छो’, तमिल में ‘वणक्कम’ और अन्य भारतीय अभिवादनों के साथ की। उन्होंने वर्ष 2023 में सिडनी में आयोजित कार्यक्रम को याद करते हुए कहा कि बीते 12 वर्षों में यह उनकी ऑस्ट्रेलिया की तीसरी यात्रा है और भारत आज विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

‘ग्रो मोर, अचीव मोर’ के साथ भारत के नए आत्मविश्वास का जिक्र

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज का भारत केवल बड़े सपने नहीं देख रहा, बल्कि उन्हें साकार भी कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश 6जी तकनीक पर काम कर रहा है और चिप निर्माण से लेकर जहाज निर्माण तक भारत में नई औद्योगिक क्षमता विकसित हो रही है।

उन्होंने मंच से ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री का उल्लेख करते हुए उपस्थित लोगों से मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर उनका सम्मान करने का आग्रह किया। देखते ही देखते पूरा मार्वल स्टेडियम रोशनी से जगमगा उठा।

भारत-ऑस्ट्रेलिया रिश्तों का श्रेय प्रवासी भारतीयों को दिया

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के मजबूत संबंधों के पीछे सबसे बड़ी ताकत यहां रहने वाला भारतीय समुदाय है। उन्होंने कहा कि कई लोग पहली बार ऑस्ट्रेलिया आए, जबकि कई पीढ़ियों से वहीं रह रहे हैं, लेकिन उनकी भारतीय संस्कृति और पहचान आज भी जीवंत है।

उन्होंने भारतीय समुदाय की तुलना “दूध में घुली चीनी” से करते हुए कहा कि भारतीय जहां भी जाते हैं, वहां अपने संस्कारों और प्रेम से समाज को और समृद्ध बनाते हैं।

डिजिटल इंडिया की सफलता का उदाहरण बने DigiLocker और Self-Attestation

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में प्रशासनिक सुधारों का उल्लेख करते हुए बताया कि एक समय दस्तावेजों के सत्यापन के लिए लोगों को अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते थे। आज अधिकांश कार्य सेल्फ-अटेस्टेशन से पूरे हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि इसी सोच ने आगे चलकर डिजिलॉकर जैसी डिजिटल व्यवस्था को जन्म दिया। प्रधानमंत्री के अनुसार, वर्तमान में देश में 70 करोड़ (700 मिलियन) से अधिक DigiLocker उपयोगकर्ता हैं, जिनमें 850 करोड़ से अधिक डिजिटल दस्तावेज सुरक्षित रखे गए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि अब पासपोर्ट पहले की तुलना में कहीं कम समय में जारी किए जा रहे हैं, जिससे आम नागरिकों को बड़ी राहत मिली है।

मानवता के लिए भारत हमेशा सबसे आगे रहा

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की विदेश नीति केवल राष्ट्रीय हित तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता की सेवा उसके मूल संस्कारों का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि हाल ही में वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने राहत और बचाव अभियान चलाया। इससे पहले तुर्किये और सीरिया में आए भूकंप, म्यांमार में ऑपरेशन ब्रह्मा, श्रीलंका में चक्रवात के दौरान ऑपरेशन सागर बंधु और कोरोना महामारी के दौरान भारत ने दुनिया के अनेक देशों तक दवाइयां और वैक्सीन पहुंचाईं।

प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत जब मदद करता है तो पासपोर्ट नहीं देखता और न ही पासपोर्ट का रंग देखता है।” उन्होंने कहा कि यही कारण है कि वैश्विक स्तर पर भारत के प्रति विश्वास लगातार मजबूत हुआ है।

डिजिटल हेल्थ और ई-संजीवनी का भी किया उल्लेख

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में करोड़ों नागरिक अब डिजिटल हेल्थ आईडी का उपयोग कर रहे हैं, जिससे मरीजों का स्वास्थ्य रिकॉर्ड सुरक्षित रूप से उपलब्ध रहता है और इलाज अधिक प्रभावी हो रहा है।

उन्होंने बताया कि ई-संजीवनी प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक 48 करोड़ से अधिक टेली-कंसल्टेशन किए जा चुके हैं तथा इस प्लेटफॉर्म से 2.25 लाख से अधिक हेल्थकेयर प्रोवाइडर जुड़े हुए हैं।

खेल, नवाचार और भविष्य की तैयारी पर दिया जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी में खेल भी एक मजबूत आधार बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया मिशन के माध्यम से देशभर में स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर पर लाखों खिलाड़ियों को अवसर मिल रहे हैं। दूरदराज़ क्षेत्रों में भी खेल अधोसंरचना विकसित की जा रही है, जिससे विशेष रूप से बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर मिला है।

उन्होंने कहा कि भारत वर्ष 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा और 2036 ओलंपिक की मेजबानी का भी दावेदार है। उनके अनुसार, आने वाले वर्षों में खेल के क्षेत्र में भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी और मजबूत होगी।

भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का दोहराया संकल्प

अपने संबोधन के समापन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का भारत आत्मविश्वास, नवाचार और वैश्विक जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की रणनीतिक साझेदारी आने वाले समय में शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, खेल और मानव कल्याण जैसे क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी।

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