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थैंक्यू इंडिया… मुआवजे की गुहार के बाद नेपाल PM के बदले सुर, नेपाल बाढ़ के बाद भारत को कहा शुक्रिया

On: September 2, 2026
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मुआवजे की गुहार के बाद नेपाल PM के बदले सुर, नेपाल बाढ़ के बाद भारत को कहा शुक्रिया
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नई दिल्ली/02 सितंबर 2026: नेपाल में 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान के बीच प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भारत समेत उन देशों का आभार जताया है, जिन्होंने संकट की घड़ी में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई। संसद को संबोधित करते हुए शाह ने भारत, चीन और अमेरिका की मदद को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इन देशों से मिली सहायता ने बचाव एवं राहत कार्यों में अहम भूमिका निभाई।

नेपाल बाढ़ के बाद पीएम बालेन शाह ने कहा- थैंक्यू इंडिया

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने आपदा की स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि अब तक 11,993 लोगों को बचाया जा चुका है, जबकि 3,916 लोगों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के अगले ही दिन मंत्रियों की एक टीम प्रभावित क्षेत्रों में पहुंची और मुश्किल हालात में विभिन्न देशों से मिली सहायता राहत कार्यों के लिए बेहद उपयोगी साबित हुई।

संसद में अपने संबोधन के दौरान शाह ने भारत और चीन की ओर से तत्काल उपलब्ध कराई गई आपातकालीन सहायता, तकनीकी टीमों और राहत सामग्री के लिए विशेष रूप से आभार जताया। उन्होंने अमेरिका समेत अन्य देशों और कई बैंकों से मिली सहायता का भी उल्लेख किया।

यह धन्यवाद ऐसे समय में आया है जब नेपाल की ओर से हाल ही में जलवायु आपदाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुआवजे की मांग भी उठाई गई थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी दिया था हर संभव मदद का भरोसा

नेपाल में बाढ़ की भयावह स्थिति सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बालेन शाह से बातचीत की थी। उन्होंने आपदा से हुए नुकसान पर चिंता जताते हुए नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था।

भारत की ओर से इसके बाद विशेष खोज और बचाव सहायता की पेशकश की गई। भारतीय टीमें पनबिजली सुरंगों के आसपास बचाव अभियान और बड़ी संख्या में हताहत तथा लापता लोगों से जुड़े फोरेंसिक कार्यों में भी शामिल रही हैं।

आपदा के दौरान भारत की भूमिका केवल राहत सामग्री उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रही, बल्कि विशेषज्ञ और तकनीकी सहायता भी प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाई गई।

चीन ने भी तेज किया राहत और रिकवरी अभियान

भोटेकोशी क्षेत्र में आई बाढ़ के बाद चीन ने भी अपनी सीमा की तरफ बचाव और रिकवरी अभियान जारी रखा। बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित संपर्क मार्गों को बहाल करने की दिशा में भी काम किया गया।

चीन ने गियिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग तक जाने वाले क्षतिग्रस्त G216 हाईवे को दोबारा खोल दिया है। इसके बाद भारी मशीनरी, खोज एवं बचाव दल और विशेष उपकरण उन क्षेत्रों तक पहुंचाने में आसानी हुई, जहां पहले दुर्गम पहाड़ी रास्तों के कारण पहुंचना बेहद मुश्किल था।

ऐसे अभियानों में सड़क संपर्क की बहाली अपने आप में बड़ी चुनौती होती है। राहत दलों के लिए प्रभावित क्षेत्र तक पहुंच बनाना ही कई बार शुरुआती बचाव अभियान का सबसे कठिन हिस्सा साबित होता है।

नेपाल ने पहले मांगा था जलवायु मुआवजा

बाढ़ और जलवायु संबंधी आपदाओं के बीच नेपाल ने विकसित और बड़े उत्सर्जक देशों के सामने जलवायु मुआवजे का मुद्दा भी उठाया था। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत, चीन और अमेरिका जैसे देशों से पारंपरिक मानवीय सहायता से आगे बढ़कर जलवायु मुआवजे की मांग की थी।

खनाल का तर्क था कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में नेपाल का योगदान बेहद कम है, लेकिन हिमालयी पर्यावरण में हो रहे बदलावों के गंभीर प्रभावों का सामना उसे करना पड़ रहा है।

अब प्रधानमंत्री बालेन शाह के ताजा बयान में आपदा के दौरान मिली तत्काल सहायता पर जोर दिखाई दे रहा है। उन्होंने भारत, चीन, अमेरिका और अन्य देशों की मदद को स्वीकार करते हुए राहत एवं बचाव अभियानों में उनके योगदान के लिए आभार जताया है।

नेपाल के लिए यह आपदा केवल तत्काल राहत और बचाव की चुनौती नहीं है। हिमालयी क्षेत्र में बदलते पर्यावरण और बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं के बीच काठमांडू के सामने राहत कार्यों के साथ-साथ भविष्य की आपदा तैयारियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की चुनौती भी बनी हुई है।

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