सिलीगुड़ी/21 अगस्त 2026: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में सीमा सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में नई सरकार बनने के महज 45 दिनों के भीतर सीमा सुरक्षा के लिए 1,129 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई है। शाह के मुताबिक, इस जमीन की मांग केंद्र सरकार लंबे समय से कर रही थी और इसका इस्तेमाल भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग सहित सीमा सुरक्षा से जुड़े कामों में किया जाएगा।
सशस्त्र सीमा बल (SSB) के फ्रंटियर मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि सीमा को सुरक्षित करना केवल किसी एक सरकार या राजनीतिक दल की जिम्मेदारी नहीं है। BSF और SSB देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले बल हैं और इनके साथ राज्य सरकारों का बेहतर तालमेल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है।
बंगाल में 45 दिन में 1,129 एकड़ जमीन
अमित शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल की नई सरकार बनने के 45 दिनों के भीतर 1,129 एकड़ जमीन सीमा सुरक्षा के लिए उपलब्ध कराई गई। उन्होंने बताया कि इस जमीन की मांग वर्ष 2014 से की जा रही थी। शाह ने दावा किया कि पहले जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण सीमा पर फेंसिंग का काम प्रभावित रहा।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि अभी करीब 29 एकड़ जमीन और उपलब्ध कराई जानी है। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शेष जमीन के लिए भी प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। इससे सीमा पर लंबित फेंसिंग के काम को गति मिलने की उम्मीद है।
‘तेजी की वजह सिर्फ BJP सरकार होना नहीं’
अमित शाह ने कहा कि जमीन उपलब्ध कराने में दिखाई गई तेजी की वजह केवल यह नहीं है कि राज्य में भाजपा की सरकार है। उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सीमा सुरक्षा के महत्व को समझते हैं और जानते हैं कि घुसपैठ को रोकना राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ा विषय है।
शाह ने इसी संदर्भ में कहा कि जब तक घुसपैठ पर प्रभावी रोक नहीं लगती, तब तक पश्चिम बंगाल और देश की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित नहीं की जा सकती। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग और सीमा प्रबंधन पश्चिम बंगाल की राजनीति में लगातार संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर भी अमित शाह का फोकस
अमित शाह ने अपने संबोधन में सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ की रणनीतिक अहमियत पर भी जोर दिया। यह संकरा भू-भाग पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। पूर्वोत्तर के आठ राज्य इसी प्रमुख स्थल-मार्ग के जरिए मुख्यभूमि भारत से जुड़े हैं।
शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है। इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।
गृह मंत्री ने यह भी बताया कि चोपड़ा, किशनगंज और धुबरी जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ाई गई है। इसका उद्देश्य सीमा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना है।
SSB जवानों के काम को बताया सबसे चुनौतीपूर्ण
अमित शाह ने SSB के जवानों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि खुली और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाली सीमा की निगरानी करना बेहद चुनौतीपूर्ण काम है। उन्होंने जवानों के समर्पण को देश की सुरक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी बताया।
कार्यक्रम के दौरान SSB से जुड़े कई नए बुनियादी ढांचा प्रोजेक्टों की आधारशिला भी रखी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, इन परियोजनाओं की कुल लागत करीब 189 करोड़ रुपये है। इनमें सिलीगुड़ी में SSB के प्रशासनिक मुख्यालय के लिए 80 एकड़ जमीन पर विकसित होने वाला परिसर और अन्य प्रशासनिक एवं आवासीय सुविधाएं शामिल हैं।
सीमा सुरक्षा में केंद्र-राज्य तालमेल पर जोर
अमित शाह ने यह संदेश भी दिया कि सीमा सुरक्षा को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय इसे राष्ट्रीय जिम्मेदारी के रूप में लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि BSF हो या SSB, ये किसी राजनीतिक दल की एजेंसी नहीं बल्कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले बल हैं।
पश्चिम बंगाल के संदर्भ में इसका महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि राज्य की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं और सिलीगुड़ी कॉरिडोर की रणनीतिक स्थिति इसे देश की सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाती है। ऐसे में जमीन उपलब्ध कराने से लेकर फेंसिंग और सुरक्षा बलों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने तक, राज्य और केंद्र के बीच समन्वय आने वाले समय में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।













