नई दिल्ली (12 मई 2026)। देश की सबसे अहम जांच एजेंसी सीबीआई के अगले निदेशक को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर हुई हाई लेवल बैठक ने इस चर्चा को और गर्म कर दिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी इस अहम बैठक में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री आवास पहुंचे।
सीबीआई निदेशक के चयन को लेकर होने वाली यह प्रक्रिया हमेशा से संवेदनशील मानी जाती रही है, क्योंकि एजेंसी देश के कई बड़े भ्रष्टाचार, आर्थिक अपराध और हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच करती है। ऐसे में नए सीबीआई चीफ के नाम पर केंद्र सरकार की रणनीति और विपक्ष की राय दोनों पर नजर बनी हुई है।
CBI Director में किन नामों पर चर्चा?
सूत्रों के अनुसार, नए सीबीआई निदेशक की दौड़ में कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा सीआरपीएफ महानिदेशक जीपी सिंह को लेकर हो रही है। प्रशासनिक हलकों में उन्हें एक मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
जीपी सिंह को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीबी अधिकारियों में गिना जाता है। असम के पूर्व डीजीपी रह चुके सिंह ने पूर्वोत्तर में उग्रवाद विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाई थी। बाद में सीआरपीएफ में रहते हुए उन्होंने माओवादी प्रभावित इलाकों में कई बड़े ऑपरेशन का नेतृत्व किया।
हालिया पश्चिम बंगाल चुनावों के दौरान भी वे लगातार सक्रिय नजर आए थे। चुनावी हिंसा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उनकी कार्यशैली की चर्चा दिल्ली तक पहुंची थी। यही वजह है कि अब उन्हें सीबीआई के शीर्ष पद के लिए गंभीर दावेदार माना जा रहा है।
अगले CBI डायरेक्टर पर कब लगेगी मुहर?
दरअसल, मौजूदा सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद का कार्यकाल पिछले वर्ष एक साल के लिए बढ़ाया गया था। उन्हें 2023 में दो वर्ष के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया था, लेकिन बाद में केंद्र सरकार ने सेवा विस्तार दे दिया।
अब नए निदेशक के चयन के लिए हाई पावर कमेटी की बैठक होने जा रही है। इस समिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत शर्मा शामिल हैं।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस बार प्रवीण सूद को दूसरा सेवा विस्तार मिलने की संभावना काफी कम दिखाई दे रही है। ऐसे में नए चेहरे के चयन की संभावना मजबूत मानी जा रही है।
CBI और ED निदेशकों के कार्यकाल का नियम क्या कहता है?
साल 2021 में केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाकर सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के निदेशकों के कार्यकाल से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया था। पहले इन एजेंसियों के प्रमुखों का कार्यकाल दो साल तय था, लेकिन संशोधन के बाद इसे अधिकतम पांच साल तक बढ़ाने की व्यवस्था की गई।
नियम के अनुसार, तय दो वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद निदेशक को एक-एक साल के तीन अतिरिक्त सेवा विस्तार दिए जा सकते हैं। हालांकि, हर विस्तार के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी आवश्यक होती है।
इसी नियम के तहत प्रवीण सूद को एक वर्ष का विस्तार दिया गया था। लेकिन अब सरकार नए नेतृत्व के विकल्प पर गंभीरता से विचार करती दिखाई दे रही है।
राजनीतिक नजरिए से भी अहम मानी जा रही बैठक
दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन के तौर पर भी देखा जा रहा है। राहुल गांधी की मौजूदगी इस चयन प्रक्रिया को और अधिक चर्चा में ले आई है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में सीबीआई की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होने वाली है। ऐसे में सरकार ऐसे अधिकारी को जिम्मेदारी देना चाहती है, जिसकी प्रशासनिक पकड़ मजबूत हो और जो संवेदनशील मामलों को प्रभावी तरीके से संभाल सके।











