नई दिल्ली/26 अगस्त 2026: महंगाई से परेशान उपभोक्ताओं के लिए चीनी और प्याज के बाजार से राहत की खबर सामने आई है। सरकारी सख्ती और बढ़ती आपूर्ति के दबाव के बीच दोनों जरूरी खाद्य वस्तुओं के थोक भाव में गिरावट दर्ज की गई है। चीनी का एक्स-मिल भाव, जो करीब एक सप्ताह पहले ₹68 प्रति किलो तक पहुंच गया था, अब घटकर करीब ₹53-55 प्रति किलो रह गया है। वहीं प्याज की प्रमुख मंडी नासिक में तीन दिन के भीतर भाव ₹50 से घटकर ₹42 प्रति किलो पर आ गया।
सरकार ने कीमतों पर नियंत्रण के लिए आयात बढ़ाने, पुराने स्टॉक को बाजार में उतारने और जमाखोरी पर निगरानी बढ़ाने जैसे कदम उठाए हैं। इसका असर अब बाजार की धारणा पर भी दिखाई देने लगा है।
चीनी के दाम में ₹15 तक की गिरावट
चीनी बाजार में पिछले कुछ दिनों से तेजी का माहौल था। सप्ताह भर पहले एक्स-मिल कीमत करीब ₹68 प्रति किलो तक पहुंच गई थी। अब यही भाव घटकर ₹53-55 प्रति किलो के आसपास आ गया है। महाराष्ट्र में चीनी का भाव करीब ₹51-52 और कोलकाता में थोक भाव करीब ₹53 प्रति किलो तक बताया जा रहा है।
हालांकि, थोक बाजार में आई इस गिरावट का पूरा फायदा अभी खुदरा उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा है। बाजार में आयातित चीनी की नई खेप पहुंचने, बंदरगाहों पर मौजूद स्टॉक की आपूर्ति बढ़ने और घरेलू कोटे की बिना बिकी चीनी बाजार में आने से आने वाले दिनों में कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।
सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी आयात का लिया फैसला
सरकार के अनुसार, खराब मौसम के चलते चीनी उत्पादन प्रभावित होने की आशंका के बीच बाजार में कृत्रिम कमी पैदा होने की स्थिति बनी थी। इससे कीमतों में अचानक तेजी आई।
बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की तैयारी की है। इसमें करीब 80 हजार टन की चार खेप निर्यातक देशों के बंदरगाहों से रवाना हो चुकी हैं और इनके जल्द भारत पहुंचने की उम्मीद है।
भारत पहुंचने के बाद इस कच्ची चीनी को रिफाइन कर घरेलू बाजार में उतारा जाएगा। इसके अलावा भारतीय बंदरगाहों पर पहले से करीब 3-4 लाख टन चीनी मौजूद बताई जा रही है। इसे भी रिफाइन कर बाजार में लाने की प्रक्रिया तेज की गई है।
पुराने चीनी कोटे को भी बाजार में उतारने का आदेश
सरकार ने अगस्त के लिए आवंटित लेकिन अभी तक बाजार में नहीं उतारे गए चीनी कोटे को जारी करने का निर्देश दिया है। इससे बाजार में उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।
इसके साथ ही चीनी डीलरों के लिए 30 नवंबर तक अधिकतम 400 टन स्टॉक रखने की सीमा तय की गई है। वहीं एक सितंबर से बड़े थोक उपभोक्ता भी अपनी 15 दिन की खपत से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे।
सरकार ने स्टॉक की जांच के लिए केंद्र और राज्य स्तर की संयुक्त टीमें भी बनाई हैं। अब तक ऐसी टीमें 1,000 से अधिक स्थानों पर छापेमारी कर चुकी हैं।
इन कार्रवाइयों का असर केवल जब्त किए गए स्टॉक तक सीमित नहीं रहा। बाजार में यह संदेश गया कि सरकार कीमतों में अनावश्यक तेजी और जमाखोरी पर सख्ती से नजर रख रही है। इससे अधिक कीमत की उम्मीद में स्टॉक रोककर बैठे कारोबारियों पर भी दबाव बढ़ा।
21 से 26 अगस्त के बीच चीनी के भाव में कितनी गिरावट?
स्थानीय मंडियों से मिले आंकड़ों के अनुसार, 21 अगस्त से 26 अगस्त के बीच कई प्रमुख शहरों में चीनी के थोक भाव में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।
| शहर | 21 अगस्त | 26 अगस्त | गिरावट |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | ₹6,600 | ₹6,000 | ₹600 |
| कानपुर | ₹6,650 | ₹6,050 | ₹600 |
| रायपुर | ₹6,600 | ₹5,800 | ₹800 |
| मुंबई | ₹6,700 | ₹5,800 | ₹900 |
| रांची | ₹6,700 | ₹6,100 | ₹600 |
| कोलकाता | ₹6,750 | ₹6,000 | ₹750 |
नोट: आंकड़े रुपये प्रति क्विंटल में हैं। स्रोत: स्थानीय मंडियां।
मुंबई में इस अवधि में सबसे ज्यादा ₹900 प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज हुई। रायपुर में भाव ₹800 और कोलकाता में ₹750 प्रति क्विंटल नीचे आया।
प्याज भी हुआ सस्ता, नासिक में ₹8 की गिरावट
चीनी के बाद प्याज के बाजार में भी नरमी दिखाई दे रही है। सरकार ने प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बाजार में उपलब्धता बढ़ाने और स्टॉक की निगरानी पर जोर दिया है।
देश की प्रमुख प्याज मंडी नासिक में सोमवार को प्याज का भाव करीब ₹50 प्रति किलो था। बुधवार तक यह घटकर ₹42 प्रति किलो रह गया। यानी महज तीन दिनों में करीब ₹8 प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई।
यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब प्याज की कीमतों को लेकर बाजार में तेजी की आशंका बनी हुई थी। सरकार की ओर से स्टॉक जारी किए जाने और पर्याप्त उत्पादन के आंकड़ों ने बाजार की धारणा बदलने में भूमिका निभाई है।
सरकार ने कहा- देश में प्याज की कमी नहीं
उपभोक्ता मामले की सचिव निधि खरे ने कहा है कि देश में प्याज की कमी नहीं है और घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
इस साल प्याज का उत्पादन करीब 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है। पिछले वर्ष उत्पादन 307.67 लाख टन था। यानी अनुमानित उत्पादन पिछले साल के आसपास ही है।
सरकार का कहना है कि बफर स्टॉक से भी प्याज निकालकर बाजार में उतारा जा रहा है। दिल्ली समेत देश के बड़े शहरों में सरकार ₹35 प्रति किलो की दर से प्याज उपलब्ध कराने की तैयारी में है। यह प्याज करीब 1.20 लाख टन के बफर स्टॉक का हिस्सा है।
सरकारी कदमों से बाजार में बदली तस्वीर
चीनी और प्याज दोनों के मामले में सरकार का फोकस एक ही दिशा में दिखाई दे रहा है—आपूर्ति बढ़ाना और जमाखोरी की गुंजाइश कम करना। चीनी के लिए शुल्क-मुक्त आयात, बंदरगाहों पर पड़े स्टॉक की रिफाइनिंग, घरेलू कोटा जारी करने और स्टॉक सीमा जैसे कदम उठाए गए हैं। प्याज के मामले में बफर स्टॉक को बाजार में उतारा जा रहा है।
थोक कीमतों में आई गिरावट फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए राहत की शुरुआत है। असली फायदा तब माना जाएगा जब इन कीमतों का असर खुदरा बाजार में भी साफ दिखाई दे और घर की रसोई तक चीनी और प्याज कम कीमत पर पहुंचें।












