गोरखपुर/05 सितंबर 2026: शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम करने, नई पहल करने और विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रदेश के 81 शिक्षकों को शनिवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर सम्मानित किया गया। गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार-2025 प्रदान किए।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने शिक्षकों के योगदान को समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए कहा कि एक समर्पित शिक्षक केवल विद्यार्थियों को विषय का ज्ञान नहीं देता, बल्कि उनके व्यक्तित्व और भविष्य को दिशा देने का काम भी करता है।
शिक्षक दिवस पर शिक्षक सम्मान: 81 शिक्षकों को मिला पुरस्कार
समारोह में सम्मानित 81 शिक्षकों में बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षक शामिल हैं। इनमें 33 महिला शिक्षक भी हैं।
कुल 81 पुरस्कारों में 76 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार प्रदान किया गया, जबकि स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत पांच शिक्षकों को मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
समारोह में माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी और बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह भी मौजूद रहे। शिक्षकों के सम्मान के दौरान सभागार में उत्साह का माहौल रहा।
पुरस्कार के साथ 25 हजार रुपये की सम्मान राशि
सम्मानित किए गए प्रत्येक शिक्षक को 25 हजार रुपये, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान किया गया। सरकार की ओर से दिए गए ये सम्मान केवल पुरस्कार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राज्य स्तरीय पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों को कुछ अतिरिक्त सुविधाएं भी मिलेंगी।
राज्य अध्यापक पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु सीमा में दो वर्ष की वृद्धि की जाएगी। इसके अलावा उन्हें उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में प्रत्येक वर्ष अधिकतम 4,000 किलोमीटर तक निशुल्क यात्रा की सुविधा आजीवन मिलेगी।
नवाचार और समर्पण को प्रोत्साहन
शिक्षकों का यह सम्मान उन प्रयासों को भी रेखांकित करता है, जिनके जरिए विद्यालयों में पारंपरिक पढ़ाई से आगे बढ़कर नए प्रयोग किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों के सीखने की क्षमता बढ़ाने, उन्हें बेहतर वातावरण देने और शिक्षा को समाज से जोड़ने वाले शिक्षकों के योगदान को राज्य स्तर पर पहचान मिलना अन्य शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बन सकता है।
शिक्षक दिवस के इस समारोह का संदेश स्पष्ट रहा कि शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता केवल नीतियों और संसाधनों से तय नहीं होती। कक्षा में शिक्षक की मेहनत, उसका समर्पण और बच्चों के प्रति जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आखिरकार, किसी भी समाज का भविष्य उन्हीं कक्षाओं में आकार लेता है जहां शिक्षक रोज विद्यार्थियों के साथ खड़ा होता है।











