गांधीनगर /30 जून 2026: भारत के रक्षा निर्यात और स्वदेशी रक्षा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि का दावा करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश अब रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि बीते एक दशक में रक्षा उत्पादन और निर्यात दोनों में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है। उनके मुताबिक, यह बदलाव स्वदेशी तकनीक, निजी उद्योगों की भागीदारी और सरकार की नीतिगत पहलों का परिणाम है।
रक्षा निर्यात में कई गुना बढ़ोतरी, उत्पादन भी नए स्तर पर
मंगलवार को गुजरात में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 में भारत का रक्षा निर्यात लगभग 1,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 39,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी अवधि में घरेलू रक्षा उत्पादन भी करीब 46 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
उन्होंने कहा कि पहले भारत अपनी अधिकांश रक्षा आवश्यकताओं के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहता था, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। देश न केवल अपनी जरूरतों के लिए आधुनिक रक्षा उपकरण बना रहा है, बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है।
स्वदेशीकरण, निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स को बताया सफलता की वजह
रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आए बदलाव के पीछे कई अहम कारण हैं। उनके अनुसार, स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म के विकास, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप्स के प्रवेश ने उत्पादन क्षमता को नई मजबूती दी है।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया में सुधार और तकनीक विकास कोष जैसी पहलों ने देश की रक्षा क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार का लक्ष्य घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहित करने के साथ उन्हें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ना भी है।
नई तकनीकों पर रहेगा भविष्य का फोकस
राजनाथ सिंह ने कहा कि अब तक मिली उपलब्धियां अंतिम मंजिल नहीं हैं, बल्कि आगे की यात्रा की शुरुआत हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), चिप निर्माण, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष तकनीक रक्षा क्षेत्र की दिशा तय करेंगे।
उन्होंने गुजरात की औद्योगिक क्षमता, कुशल कार्यबल और उद्यमिता की सराहना करते हुए कहा कि राज्य भविष्य में रक्षा विनिर्माण और अत्याधुनिक तकनीकी विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
उद्योग जगत से आत्मनिर्भर भारत अभियान में भागीदारी की अपील
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने उद्योग जगत से रक्षा क्षेत्र में निवेश और नवाचार बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत विदेशी कंपनियों के साथ तकनीक हस्तांतरण, संयुक्त उद्यम और सहयोग का स्वागत करता है, लेकिन इसका लाभ भारतीय उद्योगों और देश की उत्पादन क्षमता को मिलना चाहिए।
उन्होंने उद्योगों से ऐसे रक्षा उत्पाद विकसित करने का आग्रह किया जो भारतीय सेनाओं की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ वैश्विक बाजार में भी प्रतिस्पर्धी साबित हों। उनके अनुसार, मजबूत घरेलू उद्योग और आधुनिक तकनीक ही भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की सबसे बड़ी ताकत साबित होंगे।












