नई दिल्ली/01 जुलाई 2026: देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। जहां उत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश ने गर्मी से राहत दिलानी शुरू कर दी है, वहीं दिल्ली-एनसीआर में मानसून की पहली बारिश का इंतजार अब खत्म होने वाला है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों में मानसून राजधानी और आसपास के इलाकों में पहुंच सकता है। दूसरी ओर पूर्वोत्तर भारत में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने हालात गंभीर कर दिए हैं। असम और अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ से करीब दो लाख लोग प्रभावित हुए हैं और कई क्षेत्रों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
दिल्ली-एनसीआर में मानसून की दस्तक के लिए अनुकूल बने हालात
आईएमडी के ताजा बुलेटिन के मुताबिक मंगलवार को मानसून ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के कई हिस्सों में प्रवेश कर लिया। इसके साथ ही मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के शेष क्षेत्रों को भी मानसून ने पूरी तरह कवर कर लिया है।
मौसम विभाग का कहना है कि हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के बाकी हिस्सों में भी मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। यदि मौजूदा स्थिति बनी रही तो दिल्ली-एनसीआर में अगले दो-तीन दिनों के भीतर अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।
2 जुलाई से सक्रिय होगा पश्चिमी विक्षोभ, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार 2 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। इसके प्रभाव से हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर में 6 जुलाई तक तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और भारी बारिश की संभावना है।
इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश में 3 से 5 जुलाई के बीच भारी वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया गया है। उत्तराखंड में भी बुधवार से तेज बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है।
यूपी में बारिश से मिली राहत, लेकिन जून में 54 प्रतिशत कम बरसे बादल
उत्तर प्रदेश में मंगलवार को कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई, जिससे किसानों को राहत मिली। बरेली में 157 मिमी, ललितपुर में 106 मिमी, लखीमपुर खीरी में 99.4 मिमी, अयोध्या में 69 मिमी और अंबेडकरनगर में 66 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।
बारिश के बाद कई जिलों में अधिकतम तापमान 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। हालांकि जून महीने के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में सामान्य से 54 प्रतिशत कम बारिश हुई। पूर्वी उत्तर प्रदेश में वर्षा 58 प्रतिशत और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 47 प्रतिशत कम दर्ज की गई।
दिल्ली में उमस ने बढ़ाई मुश्किल, महसूस हुआ 53.5 डिग्री जैसा तापमान
राजधानी दिल्ली में मंगलवार को अधिकतम तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हालांकि तेज उमस के कारण लोगों को वास्तविक महसूस होने वाला तापमान 53.5 डिग्री सेल्सियस तक लगा। तकनीकी रूप से लू की स्थिति नहीं रही, लेकिन नमी और गर्म हवाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद तापमान और उमस दोनों में राहत मिलेगी।
उत्तराखंड में चार दिन तक भारी बारिश की चेतावनी
मानसून के सक्रिय होते ही उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों में मौसम बदल गया है। मौसम विभाग ने एक जुलाई को देहरादून और बागेश्वर में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
इसके अलावा टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और पिथौरागढ़ में भी भारी बारिश की संभावना है। 2 से 4 जुलाई के दौरान कई पर्वतीय जिलों में लगातार तेज बारिश, गरज-चमक और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है।
असम और अरुणाचल में बाढ़ से बिगड़े हालात, करीब दो लाख लोग प्रभावित
पूर्वोत्तर भारत में लगातार हो रही बारिश अब बड़ी आपदा का रूप ले चुकी है। अरुणाचल प्रदेश के लोअर सियांग जिले में बाढ़ और भूस्खलन से 14 गांव प्रभावित हुए हैं, जहां 3,000 से अधिक लोगों पर संकट आ गया है। नारी-कोयू क्षेत्र में धान की खेती, सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।
राज्य सरकार ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने हालात की समीक्षा की है, जबकि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और किरेन रिजिजू ने भी राज्य सरकार के साथ बैठक कर राहत कार्यों की प्रगति जानी। राज्य में 90 हजार से अधिक लोग बाढ़ और बारिश से प्रभावित बताए गए हैं।
उधर असम में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। 60 हजार से ज्यादा लोग बाढ़ की चपेट में हैं। अकेले धेमाजी जिले में 40 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और करीब 60 गांव जलमग्न हो चुके हैं।
बरगी बांध में 42 साल बाद सूखे जैसे हालात
जहां देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय हो चुका है, वहीं मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी बांध में अब भी कम बारिश का असर साफ दिखाई दे रहा है। नर्मदा नदी पर बने इस बांध का जलस्तर लगातार घट रहा है और वर्तमान में यह समुद्र तल से 407.45 मीटर पर पहुंच गया है।
बांध में केवल 5.5 मीटर पानी शेष बचा है और प्रतिदिन लगभग 5 सेंटीमीटर जलस्तर कम हो रहा है। 42 वर्षों बाद यहां सूखे जैसे हालात बने हैं। पानी घटने से वर्षों से डूबी पुरानी नावें और मंदिर फिर दिखाई देने लगे हैं, जिन्हें देखने के लिए स्थानीय लोगों की भीड़ उमड़ रही है।












