लखनऊ (Mon, 11 May 2026)। उत्तर प्रदेश में जनशिकायतों के निस्तारण और विकास कार्यों की मॉनिटरिंग को लेकर जारी IGRS रिपोर्ट में रामपुर ने एक बार फिर अपनी मजबूत पकड़ साबित की है। अप्रैल 2026 की एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (IGRS) रिपोर्ट में रामपुर ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल करते हुए लगातार चौथे महीने नंबर-1 जिला बनने का रिकॉर्ड कायम रखा है।
रामपुर को कुल 140 में से 138 अंक मिले, जिसके साथ जिले ने 98.57 प्रतिशत स्कोर दर्ज किया। प्रशासनिक कार्यप्रणाली, शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण और विकास योजनाओं की निगरानी के मामले में जिले का प्रदर्शन सबसे बेहतर माना गया।
दूसरे स्थान पर पीलीभीत रहा, जिसने 140 में से 137 अंक हासिल कर 97.86 प्रतिशत स्कोर प्राप्त किया। वहीं श्रावस्ती और अमेठी ने समान रूप से 136-136 अंक प्राप्त कर संयुक्त रूप से तीसरा स्थान हासिल किया।
हर महीने 49 विभागों के 109 कार्यक्रमों की होती है समीक्षा
आईजीआरएस रिपोर्ट प्रदेश सरकार की उस निगरानी प्रणाली का हिस्सा है, जिसके जरिए विभिन्न विभागों के कामकाज की मासिक समीक्षा की जाती है। इस रिपोर्ट के माध्यम से प्रदेश के 49 विभागों से जुड़े 109 कार्यक्रमों की प्रगति का मूल्यांकन किया जाता है।
रिपोर्ट तैयार करते समय जनशिकायतों के समाधान की गुणवत्ता, मामलों के निस्तारण में पारदर्शिता, समयबद्ध कार्रवाई, विकास कार्यों की प्रगति और राजस्व मामलों के निपटारे को प्रमुख आधार बनाया जाता है। यही वजह है कि जिलों के बीच बेहतर प्रशासनिक प्रदर्शन को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।
टॉप-10 जिलों में कई बड़े नाम शामिल
अप्रैल माह की IGRS रिपोर्ट में टॉप-10 जिलों की सूची में कई जिलों ने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। रामपुर, पीलीभीत, श्रावस्ती और अमेठी के अलावा हाथरस, बरेली, हमीरपुर, बदायूं, बाराबंकी और बलिया ने भी शीर्ष दस जिलों में जगह बनाई है।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि आईजीआरएस रैंकिंग अब केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह जिलों की जवाबदेही और प्रशासनिक सक्रियता का बड़ा पैमाना बन चुकी है। यही कारण है कि जिलाधिकारी स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग लगातार बढ़ाई जा रही है।
प्रदेश सरकार भी जनशिकायत निस्तारण को लेकर जीरो पेंडेंसी और समयबद्ध कार्रवाई पर लगातार जोर दे रही है, जिसका असर अब जिलों की रैंकिंग में साफ दिखाई देने लगा है।











