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ताइवान के करीब फिर बढ़ी चीन की सैन्य हलचल, लड़ाकू विमानों ने पार की मिडियन लाइन

On: May 11, 2026
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ताइवान के करीब फिर बढ़ी चीन की सैन्य हलचल, लड़ाकू विमानों ने पार की मिडियन लाइन
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नई दिल्ली (Mon, 11 May 2026)। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। ताइवान के आसपास चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने पूरे क्षेत्र की रणनीतिक चिंताओं को गहरा कर दिया है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को दावा किया कि पिछले 24 घंटों में चीनी लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों की असामान्य गतिविधियां दर्ज की गई हैं, जिनमें कई विमानों ने दोनों देशों के बीच की अनौपचारिक सीमा मानी जाने वाली ‘मिडियन लाइन’ को भी पार किया।

ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि सोमवार सुबह 6 बजे तक ताइवान के आसपास चीन के 7 सैन्य विमान, 5 नौसैनिक जहाज और 1 सरकारी जहाज सक्रिय रूप से देखे गए। इनमें से 5 लड़ाकू विमानों ने मिडियन लाइन पार कर ताइवान के उत्तरी और दक्षिण-पश्चिमी एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) में प्रवेश किया।

ताइवान की सेना ने कहा है कि पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है और सुरक्षा मानकों के तहत आवश्यक प्रतिक्रिया दी गई है। हालांकि, इस तरह की गतिविधियों ने क्षेत्र में सैन्य तनाव को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

लगातार तीसरे दिन चीन की सैन्य मौजूदगी से बढ़ी चिंता

ताइवान के मुताबिक यह केवल एक दिन की गतिविधि नहीं है। पूरे सप्ताहांत में चीन की सैन्य उपस्थिति लगातार बढ़ी हुई देखी गई। रविवार को भी ताइवान के आसपास 12 चीनी सैन्य विमान, 5 नौसैनिक जहाज और एक सरकारी जहाज देखे गए थे। इनमें से 9 विमानों ने मिडियन लाइन पार की थी।

शनिवार को स्थिति और ज्यादा संवेदनशील रही थी। ताइवान ने उस दिन 8 चीनी सैन्य विमान, 6 युद्धपोत और 2 सरकारी जहाजों की मौजूदगी दर्ज की थी। खास बात यह रही कि सभी 8 विमानों ने सीमा पार कर ताइवान के मध्य, दक्षिण-पश्चिमी और पूर्वी वायु रक्षा क्षेत्रों में प्रवेश किया था।

क्षेत्रीय विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन लगातार ऐसी गतिविधियों के जरिए ताइवान पर रणनीतिक दबाव बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। बीजिंग लंबे समय से ताइवान को अपना हिस्सा बताता रहा है, जबकि ताइवान खुद को एक अलग प्रशासनिक और राजनीतिक इकाई के रूप में संचालित करता है।

क्यों अहम है ‘मिडियन लाइन’ और ADIZ?

ताइवान स्ट्रेट में मौजूद मिडियन लाइन कोई आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है, लेकिन दशकों से यह दोनों पक्षों के बीच तनाव कम रखने वाली एक अनौपचारिक सैन्य सीमा मानी जाती रही है। जब चीनी विमान इसे पार करते हैं तो इसे ताइवान के लिए गंभीर सुरक्षा संकेत माना जाता है।

इसी तरह एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन यानी ADIZ वह क्षेत्र होता है जहां किसी भी विदेशी विमान की गतिविधि पर विशेष निगरानी रखी जाती है। हालांकि यह किसी देश की संप्रभु हवाई सीमा नहीं होती, लेकिन सुरक्षा दृष्टि से इसका बड़ा महत्व होता है।

क्या है चीन-ताइवान विवाद की असली जड़?

चीन और ताइवान के बीच विवाद केवल वर्तमान राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका इतिहास कई सदियों पुराना है। 1949 में चीनी गृहयुद्ध के बाद मुख्य भूमि पर पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना हुई, जबकि राष्ट्रवादी सरकार ताइवान चली गई। तभी से दोनों पक्ष खुद को चीन का वैध प्रतिनिधि मानते रहे हैं।

बीजिंग का दावा है कि ताइवान उसका अभिन्न हिस्सा है और जरूरत पड़ने पर वह बल प्रयोग से भी उसे अपने नियंत्रण में ला सकता है। दूसरी ओर ताइवान की अपनी लोकतांत्रिक सरकार, सेना और आर्थिक व्यवस्था है, जिसके कारण वह व्यवहारिक रूप से एक स्वतंत्र राष्ट्र की तरह काम करता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिकांश देश ‘वन चाइना पॉलिसी’ को मान्यता देते हैं, लेकिन साथ ही ताइवान के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंध भी बनाए रखते हैं। यही वजह है कि ताइवान का मुद्दा केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक भू-राजनीति का संवेदनशील केंद्र बन चुका है।

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