नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026। लंबी ट्रेन यात्रा में खानपान की सुविधा यात्रियों के लिए किसी जरूरत से कम नहीं होती। कई लोग घर से खाना लेकर चलते हैं, लेकिन लंबी दूरी की यात्रा में हर किसी के लिए ऐसा कर पाना संभव नहीं होता। ऐसे में ट्रेन की पैंट्री या रेलवे से जुड़ी कैटरिंग सर्विस से मिलने वाला भोजन ही यात्रियों का सहारा बनता है।
लेकिन खाने की गुणवत्ता और साफ-सफाई को लेकर यात्रियों के मन में सवाल भी उठते रहे हैं। खाना किस परिस्थितियों में तैयार हुआ, रसोई में स्वच्छता का कितना ध्यान रखा गया और पैकिंग से लेकर यात्रियों तक पहुंचने के बीच किन मानकों का पालन हुआ—इन तमाम पहलुओं पर अब रेलवे निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी में है।
भारतीय रेलवे, IRCTC की कैटरिंग सर्विस में निगरानी बढ़ाने के लिए पैंट्री कार और बेस किचन में AI-सक्षम CCTV कैमरों का नेटवर्क लगाने की दिशा में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य केवल कैमरों से रिकॉर्डिंग करना नहीं, बल्कि स्मार्ट तकनीक के जरिए कैटरिंग व्यवस्था में संभावित गड़बड़ियों पर नजर रखना है।
IRCTC कैटरिंग सर्विस पर बढ़ेगी निगरानी
रेलवे की पैंट्री कार और बेस किचन में CCTV कैमरे लगाए जाने की योजना का फोकस भोजन तैयार करने की पूरी प्रक्रिया पर निगरानी बढ़ाना है। फिलहाल ऐसी व्यवस्था ईस्ट सेंट्रल रेलवे रूट पर संचालित कुछ प्रीमियम ट्रेनों में मौजूद बताई गई है।
हाल ही में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष सतीश कुमार ने नई दिल्ली स्थित IRCTC के वॉर रूम का दौरा कर कैटरिंग सर्विस की निगरानी व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान यात्रियों को स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के लिए तकनीक आधारित सर्विलांस को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
रेलवे की कोशिश है कि कैटरिंग प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों को निगरानी के दायरे में लाया जाए। इससे व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ने के साथ शिकायतों पर कार्रवाई के लिए भी बेहतर आधार मिल सकता है।
24 घंटे पैंट्री और बेस किचन पर रहेगी नजर
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ईस्ट सेंट्रल रेलवे में मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए 73 पैंट्री कार और ट्रेन साइड वेंडिंग सर्विस संचालित हैं। वहीं बेस किचन की संख्या बढ़ाकर 62 किए जाने की जानकारी है।
इन पैंट्री कार और बेस किचन में CCTV नेटवर्क के जरिए भोजन तैयार करने से लेकर उसकी पैकेजिंग और सप्लाई तक की गतिविधियों पर निगरानी रखने की योजना है। यानी निगरानी का दायरा सिर्फ यह देखने तक सीमित नहीं रहेगा कि खाना तैयार हो रहा है या नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित तरीके से देखा जा सकेगा।
अगर निगरानी के दौरान किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित स्तर पर तत्काल कार्रवाई की संभावना बढ़ जाएगी। यात्रियों के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा यही होगा कि कैटरिंग व्यवस्था में जवाबदेही तय करना आसान हो सकेगा।
AI-सक्षम CCTV कैमरे सामान्य कैमरों से कैसे अलग?
यहां AI-सक्षम CCTV कैमरे इस व्यवस्था को खास बनाते हैं। सामान्य CCTV कैमरे मुख्य रूप से घटनाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग करते हैं, जिसे बाद में देखा या जांचा जा सकता है। इसके विपरीत AI आधारित निगरानी प्रणाली तय मानकों और परिस्थितियों के आधार पर फुटेज का विश्लेषण कर संभावित गड़बड़ी की पहचान करने में मदद कर सकती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्मार्ट डिटेक्शन तकनीक की मदद से कैमरों से मिलने वाली फुटेज को सिस्टम लगातार स्कैन कर सकता है। किसी निर्धारित स्थिति या असामान्य गतिविधि का पता चलने पर संबंधित अधिकारियों को अलर्ट देने की क्षमता भी ऐसी प्रणालियों में हो सकती है।
हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि रेलवे किन गतिविधियों और स्वच्छता मानकों को AI सिस्टम के जरिए मॉनिटर करता है तथा अलर्ट मिलने के बाद कितनी तेजी से कार्रवाई की जाती है।
यात्रियों को बेहतर कैटरिंग की उम्मीद
ट्रेन में भोजन को लेकर यात्रियों की सबसे बड़ी अपेक्षा स्वाद से पहले स्वच्छता, गुणवत्ता और उचित कीमत की होती है। ऐसे में पैंट्री कार और बेस किचन की तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था लागू होने पर रेलवे के लिए भी यह देखना आसान हो सकता है कि निर्धारित मानकों का पालन जमीन पर कितना हो रहा है।
खास बात यह है कि CCTV निगरानी को केवल कैमरे लगाने की कवायद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसका असली फायदा तभी होगा जब रिकॉर्डिंग, AI आधारित अलर्ट, निरीक्षण और शिकायत निवारण—इन सभी को एक प्रभावी व्यवस्था से जोड़ा जाए। तभी यात्रियों को मिलने वाले खाने की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार दिखाई देगा।













