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राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस: ‘सपनों को हकीकत में बदलते हैं’, पीएम मोदी ने भारत रत्न एम. विश्वेश्वरैया को किया नमन

On: September 15, 2026
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राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस, पीएम मोदी ने भारत रत्न एम. विश्वेश्वरैया को किया नमन
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नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026। देशभर में मंगलवार को राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के इंजीनियरों को बधाई दी और महान इंजीनियर एवं राष्ट्रनिर्माता सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने इंजीनियरों के योगदान को रेखांकित करते हुए उन्हें ऐसे ‘कर्मयोगी’ बताया, जो विचारों और सपनों को जमीन पर उतारकर उन्हें वास्तविक उपलब्धियों में बदलते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इंजीनियर्स डे की शुभकामनाएं देते हुए विश्वेश्वरैया को याद किया। उन्होंने कहा कि बेहतर भविष्य के लिए निर्माण करने, नई चीजें विकसित करने और समस्याओं के समाधान खोजने में इंजीनियरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने विश्वेश्वरैया की इंजीनियरिंग प्रतिभा और राष्ट्र निर्माण की सोच को आज भी प्रेरणा देने वाली विरासत बताया।

इंजीनियर केवल मशीनें नहीं बनाते: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस के अवसर पर जारी एक वीडियो में इंजीनियरों की भूमिका को व्यापक संदर्भ में समझाया। उन्होंने कहा कि इंजीनियरों का काम केवल मशीनें या ढांचे तैयार करना नहीं है। वे अपने ज्ञान और कौशल के जरिए ऐसे समाधान विकसित करते हैं, जो समाज और देश की प्रगति में योगदान देते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि इंजीनियर कर्मयोगी हैं, जो सपनों को हकीकत में बदलते हैं। उन्होंने भारत के इंजीनियरों की सराहना करते हुए कहा कि देश में ऐसे अनेक इंजीनियर हुए हैं, जिन्होंने कभी असंभव लगने वाली चीजों को संभव बनाया और ऐसे कार्य किए, जिन्हें इंजीनियरिंग की दुनिया में मिसाल माना जाता है।

प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब भारत बुनियादी ढांचे, डिजिटल तकनीक, विनिर्माण, अंतरिक्ष और आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में अपनी क्षमता का विस्तार कर रहा है। ऐसे में इंजीनियरिंग को केवल पेशे के बजाय राष्ट्र निर्माण की एक अहम ताकत के रूप में देखा जा रहा है।

पीएम मोदी ने याद की विश्वेश्वरैया की विरासत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश में भारत की इंजीनियरिंग परंपरा और सर एम. विश्वेश्वरैया के योगदान का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महान भारतीय इंजीनियरों की गौरवशाली विरासत में विश्वेश्वरैया एक अनमोल रत्न हैं और उनके कार्य आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं।

विश्वेश्वरैया के दिखाए रास्ते पर आगे बढ़ते हुए भारतीय इंजीनियरों ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अपनी पहचान बनाई है। तकनीकी दक्षता और समस्या के व्यावहारिक समाधान की भारतीय क्षमता ने वैश्विक स्तर पर भी देश के इंजीनियरों के लिए नई जगह बनाई है।

क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस?

भारत में हर साल 15 सितंबर को राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस मनाया जाता है। यह दिन महान इंजीनियर, प्रशासक और राजनेता सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है।

विश्वेश्वरैया का जीवन इंजीनियरिंग, प्रशासन और राष्ट्र निर्माण के बीच मजबूत संबंध का उदाहरण माना जाता है। उनके योगदान को याद करते हुए इस दिन देश के इंजीनियरों की उपलब्धियों और समाज के विकास में उनकी भूमिका को सम्मान दिया जाता है।

कौन थे भारत रत्न एम. विश्वेश्वरैया?

मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1861 को हुआ था। उन्हें एम.वी. के नाम से भी जाना जाता है। इंजीनियरिंग और सार्वजनिक प्रशासन के क्षेत्र में उनके योगदान ने उन्हें भारत के सबसे सम्मानित तकनीकी विशेषज्ञों में शामिल किया।

विश्वेश्वरैया ने सार्वजनिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में योगदान दिया। मैसूर में कृष्ण राजा सागर बांध (KRS Dam) के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके अलावा उन्होंने बाढ़ नियंत्रण और जल प्रबंधन से जुड़ी तकनीकी व्यवस्थाओं के विकास में भी योगदान दिया।

उनके योगदान के सम्मान में भारत सरकार ने वर्ष 1955 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया। उनका जीवन इस बात की मिसाल बन गया कि तकनीकी ज्ञान का इस्तेमाल केवल निर्माण के लिए नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए भी किया जा सकता है।

इंजीनियरिंग से राष्ट्र निर्माण तक का संदेश

राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस महज एक पेशेवर दिवस नहीं है। यह उस सोच को सम्मान देने का अवसर भी है, जिसमें विज्ञान, तकनीक और नवाचार को देश की प्रगति से जोड़ा जाता है। विश्वेश्वरैया की विरासत से लेकर आज के आधुनिक इंजीनियरों तक, भारत की विकास यात्रा में तकनीकी विशेषज्ञों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण रही है।

प्रधानमंत्री मोदी का संदेश भी इसी व्यापक भूमिका की ओर इशारा करता है—इंजीनियर केवल समस्याओं का तकनीकी समाधान नहीं खोजते, बल्कि कई बार वही समाधान आने वाले वर्षों के भारत की दिशा तय करते हैं।

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