लखनऊ, 21 अप्रैल 2026 (मंगलवार)। राजधानी लखनऊ की सियासी फिज़ा मंगलवार को कुछ अलग ही थी। BJP की जन आक्रोश रैली के नाम पर निकली इस पदयात्रा ने न सिर्फ राजनीतिक संदेश दिया, बल्कि सड़क से संसद तक की बहस को भी एक नया मोड़ दे दिया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद इस रैली की अगुवाई करते नजर आए। कड़ी धूप, तपती सड़कें और भीड़ का उत्साह—इन सबके बीच सीएम योगी का भगवा गमछा पहने पैदल चलना, एक मजबूत प्रतीक की तरह उभरा।
BJP की जन आक्रोश रैली में महिलाओं की बड़ी भागीदारी
इस रैली की सबसे बड़ी खासियत रही महिलाओं की भारी मौजूदगी। अनुमानित तौर पर 5 हजार से ज्यादा महिला कार्यकर्ता सिर्फ सीतापुर से ही पहुंचीं, जबकि पूरे प्रदेश से आई महिलाओं ने इसे एक व्यापक स्वरूप दे दिया।
सुबह चार बजे से ही भाजपा कार्यालयों पर हलचल शुरू हो गई थी। बसों और निजी वाहनों के जरिए कार्यकर्ताओं को लखनऊ के लिए रवाना किया गया। यह सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इसे “नारी शक्ति वंदन” के रूप में पेश किया गया—जहां महिलाओं की भागीदारी खुद एक संदेश बन गई।
सियासी नेतृत्व की मौजूदगी ने बढ़ाई रैली की अहमियत
रैली में कई बड़े चेहरे भी साथ दिखे। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य के साथ-साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और ओम प्रकाश राजभर भी मौजूद रहे।
इन नेताओं की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि यह रैली सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा थी।
BJP जन आक्रोश रैली: क्यों बना यह मुद्दा?
दरअसल, लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक पारित न हो पाने को लेकर भाजपा ने विपक्ष पर निशाना साधा है। इसी मुद्दे को लेकर यह BJP जन आक्रोश रैली आयोजित की गई।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह रैली आगामी चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए महिलाओं को केंद्र में रखने की एक कोशिश भी है।
ट्रैफिक पर असर, सड़कों पर जाम की स्थिति
रैली का असर शहर की रफ्तार पर भी साफ दिखा। हजरतगंज, लोहिया पथ, कैंट रोड, लालबत्ती चौराहा और परिवर्तन चौक जैसे प्रमुख इलाकों में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
धूप में फंसे आम लोगों के लिए यह मुश्किल भरा अनुभव रहा। कई जगहों पर लोग छांव तलाशते नजर आए, तो वहीं ट्रैफिक पुलिस के जवान भी घंटों तक व्यवस्था संभालते रहे।
डीसीपी ट्रैफिक रवीना त्यागी के अनुसार, सुबह 6 बजे से डायवर्जन लागू कर दिया गया था। ट्रैफिक कंट्रोल के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
सड़क से विधानभवन तक—रैली का सफर
पदयात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए अंततः विधानभवन के सामने पहुंची। यह वही जगह है जहां से सियासत की दिशा तय होती है, और इस बार सड़कों की आवाज सीधे वहीं तक पहुंचाने की कोशिश की गई।
मानवीय पहलू: धूप, भीड़ और विश्वास
इस रैली का एक मानवीय पहलू भी सामने आया। तेज धूप में घंटों पैदल चलती महिलाएं, सिर पर दुपट्टा डाले, हाथों में झंडे लिए—यह दृश्य सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव भी दिखाता है।
कई महिलाओं ने कहा कि वे “अपनी आवाज बुलंद करने” आई हैं। वहीं कुछ के लिए यह पार्टी के प्रति निष्ठा का प्रदर्शन था।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, BJP जन आक्रोश रैली ने लखनऊ की सड़कों को राजनीतिक रंग में रंग दिया। यह सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि महिलाओं को केंद्र में रखकर दिया गया एक बड़ा सियासी संदेश था।
अब देखने वाली बात यह होगी कि इस रैली की गूंज संसद और आने वाले चुनावों में किस तरह सुनाई देती है।








