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नेपाल बाढ़: 290 भारतीय अब भी लापता, कैलाश मानसरोवर यात्रियों की बड़ी संख्या; 54 लोगों का हुआ रेस्क्यू

On: August 27, 2026
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नेपाल बाढ़, 290 भारतीय अब भी लापता, कैलाश मानसरोवर यात्रियों की बड़ी संख्या
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नई दिल्ली, 27 अगस्त 2026। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और अचानक आई बाढ़ से हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के ताजा अपडेट के मुताबिक नेपाल में 290 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले भारतीयों के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री और अलग-अलग राज्यों के अन्य यात्री शामिल हैं। इससे पहले लापता भारतीयों का आंकड़ा 288 बताया गया था, लेकिन गुरुवार शाम के अपडेट में संख्या संशोधित होकर 290 हो गई।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि स्थिति तेजी से बदल रही है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में संचार व्यवस्था बाधित होने और कई जगहों तक पहुंच मुश्किल होने के कारण लोगों से संपर्क स्थापित करने में दिक्कत आ रही है। ऐसे में लापता या संपर्क से बाहर लोगों की संख्या में बदलाव संभव है।

नेपाल बाढ़ में कैलाश मानसरोवर यात्रियों की चिंता बढ़ी

नेपाल बाढ़ से प्रभावित भारतीयों में बड़ी संख्या उन लोगों की है जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल के रास्ते आगे बढ़ रहे थे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक तमिलनाडु के दो समूहों के 37 और 49 लोग अब भी संपर्क से बाहर हैं। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के 32 भारतीयों का एक समूह भी रासुवा जिले के तिमुरे इलाके में है। अलग-अलग राज्यों के 61 भारतीयों और केरल के 33 लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा का रास्ता हिमालय के दुर्गम इलाकों से गुजरता है। ऐसे में बाढ़ के बाद सड़क, पुल और संचार व्यवस्था प्रभावित होने से यात्रियों तक पहुंचना राहत और बचाव एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

त्रिशूली-1 परियोजना के 73 भारतीय भी संपर्क से बाहर

लापता भारतीयों में सबसे बड़ा समूह त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट से जुड़ा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार परियोजना में काम करने वाले 73 भारतीयों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पाया है। भारतीय दूतावास, काठमांडू परियोजना प्रमुख के संपर्क में है और इन कर्मचारियों की स्थिति के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

हालांकि राहत की बात यह है कि इसी परियोजना से जुड़े 33 कर्मचारियों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इसके अलावा तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को भी गुरुवार दोपहर करीब एक बजे बचा लिया गया। इन यात्रियों को पहले काठमांडू लाया जा रहा है, जिसके बाद उन्हें भारत वापस भेजा जाएगा। इस तरह विदेश मंत्रालय के ताजा आंकड़े के मुताबिक कुल 54 भारतीयों को बचाया जा चुका है

तमिलनाडु, केरल और अन्य राज्यों के लोगों पर नजर

नेपाल बाढ़ के बाद दक्षिण भारतीय राज्यों में भी चिंता का माहौल है। तमिलनाडु से बड़ी संख्या में लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। अधिकारियों की ओर से लगातार यात्रियों की सूची और उनके अंतिम ज्ञात स्थान की जानकारी जुटाई जा रही है।

केरल की एजेंसी नोरका रूट्स के मुताबिक राज्य के करीब 53 लोग नेपाल में फंसे होने की जानकारी सामने आई थी। इनमें परिवार और बच्चे भी शामिल हैं। दूसरी ओर कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से भी नेपाल में फंसे या संपर्क से बाहर लोगों की जानकारी सामने आई है। राज्य सरकारें विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास के साथ समन्वय कर रही हैं।

चीन की तरफ भी करीब 200 भारतीय फंसे

विदेश मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण जानकारी यह भी दी है कि करीब 200 भारतीय नागरिक चीन की ओर फंसे हुए हैं। मंत्रालय ने यह संभावना जताई है कि नेपाल में जिन कुछ भारतीयों को लापता बताया जा रहा है, उनमें से कुछ वास्तव में चीन की तरफ पहुंच चुके हों। इसलिए दोनों आंकड़ों में कुछ ओवरलैप होने की आशंका से इनकार नहीं किया गया है।

यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कैलाश मानसरोवर यात्रा का मार्ग नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाकों से जुड़ा है। आपदा के बाद यात्रियों के अलग-अलग स्थानों पर फंस जाने से उनकी सही स्थिति का पता लगाना आसान नहीं है।

भारत ने नेपाल भेजी 47.5 टन राहत सामग्री

भारत ने नेपाल की मदद के लिए राहत अभियान भी तेज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक अब तक 47.5 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री नेपाल भेजी जा चुकी है। इसमें दवाइयां, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी राहत सामग्री शामिल है। राहत सामग्री दो विमानों के जरिए भेजी गई है, जिनमें सी-130जे और सी-17 विमान शामिल हैं।

विदेश मंत्रालय के अनुसार राहत सामग्री नेपाल की जरूरतों को ध्यान में रखकर भेजी जा रही है। सरकार आगे भी अतिरिक्त सहायता भेजने पर विचार कर रही है, जिसमें अस्थायी पुल जैसी जरूरी सामग्री भी शामिल हो सकती है।

24 घंटे काम कर रहा विदेश मंत्रालय का कंट्रोल रूम

नेपाल बाढ़ में फंसे भारतीयों और उनके परिजनों की मदद के लिए विदेश मंत्रालय ने 24 घंटे काम करने वाला कंट्रोल रूम स्थापित किया है। मंत्रालय ने भारतीय दूतावास, काठमांडू को भी लगातार संपर्क और समन्वय में रखा है। संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण अधिकारियों को लोगों की स्थिति का पता लगाने में कई स्तरों पर प्रयास करना पड़ रहा है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी नेपाल की स्थिति को लेकर विदेश सचिव, मंत्रालय की टीम और काठमांडू तथा बीजिंग में भारतीय राजदूतों के साथ समीक्षा बैठक की। इसमें प्रभावित भारतीयों की सुरक्षा, राहत एवं बचाव अभियान और नेपाल तथा संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय पर चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बुधवार को नेपाल के प्रधानमंत्री से बातचीत कर आपदा पर संवेदना जताई और भारत की ओर से हर संभव सहायता का भरोसा दिया।

नेपाल में हालात अभी स्थिर नहीं हुए हैं। राहत और बचाव दल मुश्किल परिस्थितियों के बीच लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने भी साफ किया है कि जैसे-जैसे नए लोगों से संपर्क स्थापित होगा, लापता और सुरक्षित भारतीयों के आंकड़े में बदलाव हो सकता है।

मुख्य कीवर्ड: नेपाल बाढ़

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