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सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा का शुभारंभ: CM योगी बोले—हमलावर भारत की आस्था को कभी झुका नहीं पाए

On: April 19, 2026
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सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा का शुभारंभ, CM योगी बोले
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लखनऊ, 19 अप्रैल 2026 (रविवार)। सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा के शुभारंभ के साथ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ रविवार को एक अलग ही भावभूमि में दिखाई दी। मंच पर औपचारिकता थी, लेकिन शब्दों में इतिहास, आस्था और राजनीति—तीनों का मिश्रण साफ झलक रहा था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यात्रा को हरी झंडी दिखाते हुए कहा कि “सदियों के आक्रमणों के बावजूद भारत की आस्था न तो टूटी और न ही कभी झुकी।”

उन्होंने इस अवसर को केवल एक धार्मिक आयोजन न बताते हुए इसे “राष्ट्रीय स्वाभिमान का पुनर्जागरण” करार दिया। उनके शब्दों में एक तरह की ऐतिहासिक स्मृति भी थी और वर्तमान राजनीतिक संदेश भी।

सनातन विरासत और आधुनिक भारत—दोनों साथ चल रहे: योगी

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में Narendra Modi के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि आज का भारत अपनी प्राचीन सनातन विरासत और आधुनिक विकास—दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, “यह वही भारत है, जो अपने शास्त्रों की आत्मा को समझते हुए नए युग की ओर बढ़ रहा है।”

योगी ने “यतो धर्मस्ततो जयः” के सिद्धांत को रेखांकित करते हुए कहा कि सनातन आस्था केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक जीवंत और अजर-अमर विचारधारा है, जो समय के हर दौर में खुद को साबित करती रही है।

इतिहास का संदर्भ: सोमनाथ मंदिर और आक्रमणों की स्मृति

Somnath Temple का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने लगभग एक हजार वर्ष पहले हुए हमलों को याद किया। उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रमणकारी Mahmud of Ghazni ने मंदिर को निशाना बनाया, लेकिन वह भारत की आस्था को समाप्त नहीं कर पाया।

उनका कहना था कि “धन-संपदा लूटी जा सकती है, लेकिन विश्वास नहीं।” यही कारण है कि सदियों बाद भी सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि “अटूट विश्वास का प्रतीक” बनकर खड़ा है।

सरदार पटेल और पुनर्निर्माण की कहानी

मुख्यमंत्री ने स्वतंत्र भारत के शुरुआती दौर को याद करते हुए Vallabhbhai Patel के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनरुत्थान का संकल्प लिया और उसे पूरा कर दिखाया।

साथ ही, Rajendra Prasad के उस ऐतिहासिक निर्णय का भी उल्लेख किया, जब उन्होंने विरोध के बावजूद प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में भाग लिया।
योगी के अनुसार, यह केवल मंदिर निर्माण नहीं था, बल्कि “सांस्कृतिक स्वाधीनता” की दिशा में एक निर्णायक कदम था।

अयोध्या से काशी तक—सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दौर

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में Ram Mandir Ayodhya, Kashi Vishwanath Corridor और अन्य धार्मिक स्थलों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले दशक में भारत ने सांस्कृतिक पुनर्जागरण का नया अध्याय लिखा है।

उन्होंने कहा, “आज अयोध्या का नाम आते ही ‘जय श्री राम’ का उद्घोष सुनाई देता है। यह केवल आस्था नहीं, बल्कि एक साझा सांस्कृतिक चेतना है।”
योगी ने प्रयागराज के कुंभ, विंध्याचल धाम और अन्य तीर्थ स्थलों के विकास को भी इसी श्रृंखला का हिस्सा बताया।

1000 से अधिक श्रद्धालु यात्रा में शामिल, विशेष व्यवस्था

सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा के तहत उत्तर प्रदेश से 1000 से अधिक श्रद्धालु गुजरात के लिए रवाना हुए। इस यात्रा में युवाओं, महिलाओं, छात्रों और उद्यमियों को विशेष रूप से शामिल किया गया है।

सरकार की ओर से इन श्रद्धालुओं के लिए रेलवे के माध्यम से निःशुल्क यात्रा की व्यवस्था की गई है, जबकि अन्य खर्च पर्यटन एवं संस्कृति विभाग द्वारा वहन किया जा रहा है।
यात्री अपने-अपने क्षेत्रों के तीर्थों का जल लेकर सोमनाथ में अभिषेक करेंगे—एक प्रतीकात्मक लेकिन गहरा सांस्कृतिक संदेश देने वाला आयोजन।

आस्था, राजनीति और प्रतीकवाद—तीनों का संगम

इस पूरे आयोजन में केवल धार्मिक भावना ही नहीं, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी निहित है।
सीएम योगी का भाषण जहां इतिहास की पुनरावृत्ति करता है, वहीं वर्तमान में सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की रणनीति भी दर्शाता है।

निष्कर्ष

सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक स्मृति, आस्था और स्वाभिमान का प्रतीक बनकर उभरी है।
लखनऊ से शुरू हुई यह यात्रा अब गुजरात की ओर बढ़ चुकी है, लेकिन इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव आने वाले दिनों में देशभर में चर्चा का विषय बने रहेंगे।

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