नई दिल्ली (28 जनवरी 2026) — बजट सत्र से ठीक पहले आज संसद के संयुक्त सत्र को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का गहन, भावनात्मक और राष्ट्र-केन्दित भाषण — जिसने न सिर्फ संसदीय बल्कि सामाजिक विमर्श को भी तीव्र कर दिया है। राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय मुद्दों को राजनीतिक दलों की सीमाओं से ऊपर उठाने का दृढ़ आग्रह किया और कहा कि विकसित भारत (Developed India) का स्वप्न तभी साकार होगा जब सभी दल एक साझा राष्ट्रीय धुरी पर खड़े होंगे।
मुख्य वक़्तव्य में उन्होंने महात्मा गांधी से लेकर पंडित नेहरू, सरदार पटेल, अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा, “भारत की प्रगति राजनीतिक मतभेदों से बड़ी है। लोकतंत्र में विचारों की विविधता स्वागतयोग्य है, पर राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और विकास जैसे मुद्दों पर एकमत आवश्यक है।”
राष्ट्रपति का संबोधन: आत्मनिर्भरता, सुरक्षा और आर्थिक प्रगति पर ज़ोर
राष्ट्रपति ने अपने करीब एक घंटे-लंबे भाषण में विकसित भारत के संकल्प को दोहराया और कहा कि आज की वैश्विक चुनौतियों में भारत की अर्थव्यवस्था ने अद्भुत मजबूती दिखाई है। उन्होंने सरकार के जीएसटी सुधार, चार नए श्रम संहिताओं, तथा मुक्त व्यापार समझौतों को उल्लेखनीय बताया और कहा कि ये कदम नागरिकों की आर्थिक सशक्तिकरण (Empowerment) के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेंगे।
“आयकर में बदलाव ने 12 लाख रुपए तक की आय को कर-मुक्त बनाया है, जिससे मध्यम और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों को वास्तविक लाभ मिला है।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की समाजिक सुरक्षा परियोजनाएं 95 करोड़ लोगों तक पहुंच चुकी हैं और पिछले दशक में 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर आए हैं।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ से लेकर ‘वीबी जीरामजी’ तक — सरकार की प्राथमिकताएँ
राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर की सैन्य कार्रवाई की सराहना की और कहा कि आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई भारत की सुरक्षा नीति का मुख्य आधार है।
साथ ही, उन्होंने वीबी जीरामजी योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह ग्रामीण विकास और पारदर्शिता की दिशा में एक अहम पहल है, जिसका लक्ष्य 125 दिनों के काम की गारंटी देना और भ्रष्टाचार को रोकना है।
लेकिन जैसे ही उन्होंने इसका विस्तार किया, विपक्षी सांसदों ने मनरेगा की वापसी की मांग करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया और नया कानून वापस लेने की आवाज बुलंद की। कुछ समय के लिए सदन में विरोध-प्रदर्शन से भाषण का प्रवाह रुक गया।
विपक्ष की प्रतिक्रिया: मनरेगा की वापसी की मांग
विपक्षी नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मनरेगा ग्रामीण भारत के लिए एक सुरक्षा जाल की तरह है और उसकी पुनः बहाली आवश्यक है। उनका कहना है कि वीबी जीरामजी योजना पारंपरिक रोजगार सुरक्षा नेटवर्क को कमजोर कर सकती है।
इसके जवाब में सरकार के समर्थक सांसदों ने तालियों से समर्थन जताया, जिससे सदन में राजनीतिक तापमान बढ़ गया।
डीप फेक और लोकतंत्र: राष्ट्रपति की चेतावनी
भाषण के अंत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने डीप फेक, फेक न्यूज़ और गलत सूचनाओं के बढ़ते खतरों पर भी चिंता व्यक्त की। उनके शब्दों में:
“फेक कंटेंट, दुष्प्रचार और डीप फेक लोकतंत्र, सामाजिक सौहार्द और जनता के विश्वास के लिए गंभीर खतरा हैं। इनके प्रभाव से हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।”
यह हिस्सा विशिष्ट इसलिए है क्योंकि डिजिटल युग में सूचना की प्रामाणिकता लोकतंत्र की बुनियाद बन चुकी है।
निष्कर्ष
राष्ट्रपति का संबोधन सिर्फ़ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समावेशन और लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक विस्तृत विमर्श था।
देश की वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की दिशा को दृष्टिगत रखते हुए यह भाषण राजनीतिक दलों के बीच आम जमीन ढूँढने का प्रयास भी था।
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