नई दिल्ली/06 जुलाई 2026: केंद्र सरकार ने सहकारिता आंदोलन को नई दिशा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब सहकारी क्षेत्र की पहुंच केवल डेयरी, बैंकिंग और कृषि तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जल्द ही इंश्योरेंस सेक्टर में भी इसका विस्तार होगा। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस समारोह में सहकारी जीवन बीमा कंपनी स्थापित करने की घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण भारत, किसानों और सहकारी संस्थाओं तक जीवन बीमा सेवाओं की आसान पहुंच सुनिश्चित करना है।
सहकारी जीवन बीमा कंपनी से गांवों और किसानों तक पहुंचेगी बीमा सेवाएं
अमित शाह ने कहा कि देश में फिलहाल 26 जीवन बीमा कंपनियां कार्यरत हैं, लेकिन सहकारी क्षेत्र की अपनी जीवन बीमा कंपनी बनने से बीमा सेवाओं का दायरा और व्यापक होगा। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं के जरिए गांवों तक वित्तीय सुरक्षा पहुंचाने में यह कंपनी अहम भूमिका निभाएगी।
उन्होंने इफको-टोकियो का उदाहरण देते हुए कहा कि सहकारी मॉडल बीमा क्षेत्र में पहले भी अपनी सफलता साबित कर चुका है। नई कंपनी बनने से सहकारी संस्थाओं की वित्तीय भागीदारी और मजबूत होगी।
सहकारिता आंदोलन अब बीमा, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल सेवाओं तक पहुंचेगा
गृह मंत्री ने कहा कि सहकारिता आंदोलन अब पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़ रहा है। पहले यह मुख्य रूप से डेयरी, चीनी, उर्वरक और सहकारी बैंकिंग तक सीमित था, लेकिन अब इसे बीमा, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल सेवाएं और आधुनिक वित्तीय क्षेत्र तक विस्तारित किया जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य सहकारी संस्थाओं को आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देना है।
‘भारत टैक्सी’ सेवा का होगा बड़े स्तर पर विस्तार
अमित शाह ने बताया कि सरकार की भारत टैक्सी सेवा को अगले दो वर्षों में 500 शहरों तक पहुंचाने की योजना है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में इस प्लेटफॉर्म से 6.37 लाख चालक और 35.77 लाख ग्राहक जुड़े हुए हैं। यह सेवा अभी दिल्ली-एनसीआर, गुजरात, मुंबई, जयपुर, लखनऊ, चंडीगढ़ और कानपुर सहित कई शहरों में संचालित हो रही है। जल्द ही इसे पटना, रांची, गुवाहाटी, भोपाल, कोलकाता, इंदौर और नागपुर तक भी विस्तार दिया जाएगा।
नौ राष्ट्रीय सहकारी समितियों का तैयार हुआ नेटवर्क
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर नौ नई सहकारी समितियों का नेटवर्क तैयार किया है। इन समितियों के माध्यम से कृषि, डेयरी, बैंकिंग, बीज उत्पादन, लॉजिस्टिक्स और अन्य सेवाओं को गांवों तक पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि अगले दस वर्षों में ये संस्थाएं दुनिया की सबसे बड़ी सहकारी संस्थाओं में शामिल हो सकती हैं।
भारत बीज सहकारी समिति को मिलेगा बड़ा विस्तार
अमित शाह ने कहा कि भारत बीज सहकारी समिति अगले तीन वर्षों में देश की सबसे बड़ी गैर-सरकारी बीज उत्पादन संस्था बनने की क्षमता रखती है।
इसके लिए उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और महाराष्ट्र के जलगांव में नई टिश्यू कल्चर सुविधाओं की आधारशिला रखी गई है, जिससे गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
50 हजार पैक्स होंगे डिजिटल, 3,000 करोड़ रुपये से चल रहा कंप्यूटरीकरण
सहकारिता क्षेत्र के डिजिटलीकरण पर जोर देते हुए शाह ने बताया कि 50,000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को ई-पैक्स में बदला जा रहा है। इसके लिए 3,000 करोड़ रुपये की लागत से कंप्यूटरीकरण का कार्य चल रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में 55,000 से अधिक पैक्स कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के रूप में कार्य कर रहे हैं। वहीं हजारों पैक्स खुदरा व्यापार, गोदाम, स्वास्थ्य सेवाएं, ईंधन वितरण और डिजिटल सेवाओं जैसे नए क्षेत्रों में भी सक्रिय हो चुके हैं।
सहकारी बैंकों का कारोबार 25 लाख करोड़ रुपये के पार
गृह मंत्री के अनुसार, डिजिटल बैंकिंग, ई-केवाईसी और साइबर सुरक्षा जैसी आधुनिक सुविधाएं लागू होने के बाद जिला सहकारी बैंकों का कारोबार 19.6 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 25 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है।
इसके अलावा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) ने सहकारी क्षेत्र में 70,000 करोड़ रुपये का नया निवेश किया है, जिससे सहकारी संस्थाओं के आधुनिकीकरण और विस्तार को गति मिली है।
आनंद में स्थापित हुआ त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय
मानव संसाधन विकास को मजबूत बनाने के लिए गुजरात के आनंद में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। यहां बैंकिंग, डेयरी, कृषि, उर्वरक, विपणन और सहकारिता प्रबंधन से जुड़े प्रशिक्षित पेशेवर तैयार किए जा रहे हैं।
नई सहकारी जीवन बीमा कंपनी की घोषणा को सहकारिता आंदोलन के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी, किसानों और सहकारी संस्थाओं को नई मजबूती मिलेगी और देश के सहकारी ढांचे को आधुनिक आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने में मदद मिलेगी।












