कोलकाता/06 जुलाई 2026: पूर्वी कोलकाता में सोमवार को श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर प्रस्तावित 125 फुट ऊंची प्रतिमा का शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने डॉ. मुखर्जी के योगदान को याद करते हुए कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला और पश्चिम बंगाल में भाजपा के भविष्य को लेकर अपना भरोसा जताया।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा के शिलान्यास पर अमित शाह ने क्या कहा?
शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मृत्यु की कभी निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों तक उनके योगदान को देश के सामने उचित स्थान नहीं दिया गया।
अमित शाह ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा का “सोनार बांग्ला” का संकल्प पूरा होगा। उन्होंने सीमा सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार घुसपैठ के खिलाफ सख्त नीति पर काम कर रही है और हर अवैध घुसपैठिये की पहचान कर देश की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
कोलकाता के न्यू टाउन में बनेगी 125 फुट ऊंची प्रतिमा
भाजपा की ओर से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसी क्रम में कोलकाता के न्यू टाउन क्षेत्र में प्रस्तावित श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा के निर्माण के लिए भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया।
यह प्रतिमा 125 फुट ऊंची होगी, जिसे डॉ. मुखर्जी की 125वीं जयंती के प्रतीक के रूप में विकसित किया जा रहा है। कार्यक्रम में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
भाजपा के संगठनात्मक एजेंडे पर भी होगी चर्चा
अपने एक दिवसीय पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान अमित शाह के बिस्वा बांग्ला मेला ग्राउंड में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में शामिल होने का भी कार्यक्रम है। यहां राज्यभर से भाजपा पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता जुटेंगे।
दौरे के दौरान शाह राज्य भाजपा नेतृत्व के साथ संगठन की रणनीति, आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों और पश्चिम बंगाल में पार्टी के विस्तार को लेकर भी चर्चा करेंगे।
कौन थे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी?
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को हुआ था। वह भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे, जो आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के रूप में विकसित हुई। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के भारत के साथ पूर्ण एकीकरण का समर्थन किया और अनुच्छेद 370 को समाप्त करने की मांग प्रमुखता से उठाई थी।
23 जून 1953 को श्रीनगर में हिरासत के दौरान उनका निधन हो गया था। उनकी मृत्यु को लेकर वर्षों से राजनीतिक और ऐतिहासिक बहस होती रही है। बाद में केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को निरस्त करने का निर्णय लिया था।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर प्रतिमा निर्माण का यह कदम भाजपा के लिए केवल एक स्मारक परियोजना नहीं, बल्कि उनके विचारों और राजनीतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।












