गोरखपुर/23 सितंबर 2026: गोरखपुर में बुधवार को श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विज्ञान ने भले ही कितनी भी प्रगति कर ली हो, लेकिन जीवन में स्थायी शांति की तलाश में विश्व की मानवता भारत की ओर देखती है। उन्होंने कहा कि भारत में सदियों से चली आ रही पावन कथाओं की परंपरा कठिन परिस्थितियों में जीवन को दिशा देने का काम करती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर के दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के शुभारंभ अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।
श्रीमद्भागवत कथा जीवन के भ्रम को दूर करती है
मुख्यमंत्री ने कहा कि सामान्य जीवन में व्यक्ति के सामने अक्सर यह चुनौती रहती है कि सत्य और असत्य में अंतर कैसे किया जाए। उनके मुताबिक, सोशल मीडिया ने इस चुनौती को और जटिल बनाया है। सत्य और असत्य के बीच ‘अर्धसत्य’ की एक ऐसी स्थिति सामने आई है, जो भ्रम पैदा करती है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में पूरी दुनिया की मानवता तनाव और अवसाद जैसी चुनौतियों से जूझ रही है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब व्यक्ति के मन, वचन और कर्म में एकरूपता रहती है तो उसके जीवन में स्पष्टता आती है। इसके विपरीत विचार और आचरण में अंतर होने पर भ्रम की स्थिति पैदा होती है। क्या करना है और क्या नहीं करना है, इस असमंजस में व्यक्ति ऐसी स्थिति में पहुंच जाता है जहां उसे सही दिशा तय करना कठिन हो जाता है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, श्रीमद्भागवत कथा इसी भ्रम को दूर करने और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने का मार्ग दिखाती है।
भारत की आध्यात्मिक परंपरा से स्थायी शांति का संदेश
सीएम योगी ने कहा कि विज्ञान और तकनीक लगातार आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन मनुष्य के जीवन में स्थायी शांति केवल भौतिक प्रगति से हासिल नहीं होती। उनके अनुसार, भारत की पावन कथाओं और आध्यात्मिक परंपराओं में जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कहा कि कथाओं का वाचन और श्रवण केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हजारों वर्षों पुरानी भारतीय परंपरा और विरासत को समझने का अवसर भी देता है।
मुख्यमंत्री ने कथा व्यास मलूकपीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्रदास जी महाराज का गोरक्षपीठ में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा की परंपरा लगभग पांच हजार वर्ष पुरानी मानी जाती है और इसके माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान तथा निष्काम कर्म की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने राजा परीक्षित और शुकदेव जी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे कालखंड और अनेक उतार-चढ़ाव के बावजूद श्रीमद्भागवत की परंपरा भारतीय समाज की स्मृतियों में बनी रही है। उनके अनुसार, यह कथा अज्ञानता से मुक्ति और जीवन की वास्तविकता को समझने का मार्ग प्रशस्त करती है।
29 सितंबर तक चलेगी श्रीमद्भागवत कथा
श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के शुभारंभ से पहले गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में गोरखनाथ मंदिर के मुख्य मंदिर से दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार स्थित कथा स्थल तक शोभायात्रा निकाली गई। शंख ध्वनि के बीच वेदपाठी विद्यार्थियों ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया। कथा स्थल पहुंचने पर अखंड ज्योति स्थापित की गई और पोथी प्रतिष्ठा के बाद व्यासपीठ की पूजा हुई।
वृंदावन से आए मलूकपीठाधीश्वर श्रीमद्जगद्गुरु द्वाराचार्य अग्रपीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्रदास जी महाराज कथा व्यास के रूप में श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा सुनाएंगे। कथा 23 से 29 सितंबर 2026 तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित होगी।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत, धर्माचार्य, यजमान और श्रद्धालु मौजूद रहे। इनमें अयोध्या के विश्वेश प्रपन्नाचार्य, जगद्गुरु राघवाचार्य, स्वामी श्रीधराचार्य, महंत नारायण गिरी, अवधेश दास, रामलखन दास, राजू दास, रामानंद दास, बालक दास और जयबख्श दास समेत कई संत शामिल रहे।
श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन क्यों खास है?
यह आयोजन महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि समारोह की परंपरा से जुड़ा है। गोरखनाथ मंदिर में 24 से 30 सितंबर तक साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह भी आयोजित किया जाना है, जबकि श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ 23 सितंबर से शुरू हुआ है।








