नई दिल्ली/23 अगस्त 2026: नई दिल्ली में अगले महीने होने वाले BRICS सम्मेलन को भारत ने केवल वैश्विक मंच तक सीमित रखने के बजाय दक्षिण एशिया में कूटनीतिक संवाद का अवसर भी बनाने की कोशिश शुरू कर दी है। भारत ने BRICS के आउटरीच सत्र के लिए नेपाल और बांग्लादेश को आमंत्रित किया है। 18वां BRICS शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होगा।
नेपाल और बांग्लादेश की संभावित भागीदारी को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है। विदेश मंत्रालय भी इसे भारत की ‘Neighbourhood First’ नीति के व्यापक संदर्भ में देखता है।
BRICS सम्मेलन में बांग्लादेश को क्यों मिला निमंत्रण?
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को BRICS आउटरीच सत्र में आमंत्रित करने के पीछे एक महत्वपूर्ण वजह उनकी देश की BIMSTEC अध्यक्षता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि बांग्लादेशी प्रधानमंत्री को BRICS आउटरीच सत्र के लिए वर्तमान BIMSTEC अध्यक्ष के रूप में बुलाया गया है। यह निमंत्रण BRICS में क्षेत्रीय संगठनों के प्रमुखों को आउटरीच सत्र में आमंत्रित करने की स्थापित परंपरा के अनुरूप है।
दिलचस्प बात यह है कि भारत ने तारिक रहमान को द्विपक्षीय यात्रा के लिए अलग से भी आमंत्रित किया है। यानी BRICS का निमंत्रण और भारत यात्रा का द्विपक्षीय निमंत्रण दो अलग पहल हैं।
हालांकि, बांग्लादेश ने अभी तक यह अंतिम रूप से तय नहीं किया है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान BRICS सम्मेलन में शामिल होंगे या नहीं। ढाका की ओर से कहा गया है कि इस संबंध में निर्णय की समीक्षा की जा रही है।
नेपाल को बुलाने के पीछे क्या है रणनीति?
नेपाल भी BIMSTEC का सदस्य है और दक्षिण एशिया में भारत का महत्वपूर्ण पड़ोसी है। BRICS आउटरीच में नेपाल की भागीदारी से भारत को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, आर्थिक सहयोग और विकास से जुड़े मुद्दों पर सीधे संवाद का अवसर मिल सकता है।
हाल के दिनों में भारत ने नेपाल और बांग्लादेश के साथ उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ाया है। विदेश मंत्रालय ने 11 अगस्त को कहा था कि पड़ोसी देशों के साथ संबंध मजबूत करना भारत की Neighbourhood First नीति का हिस्सा है। इसी दौरान भारत के प्रतिनिधियों ने नेपाल और बांग्लादेश के नेतृत्व के साथ बातचीत भी की थी।
बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच अहम होगा BRICS आउटरीच
इस बार भारत की BRICS अध्यक्षता की थीम ‘Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability’ रखी गई है। इसका फोकस लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास पर है। भारत की अध्यक्षता में BRICS से जुड़े कई मंत्रीस्तरीय और क्षेत्रीय कार्यक्रम पहले ही आयोजित किए जा चुके हैं।
ऐसे में आउटरीच सत्र केवल औपचारिक मुलाकात का मंच नहीं होगा। इसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था, विकास, कनेक्टिविटी, जलवायु, तकनीक और ग्लोबल साउथ से जुड़े विषयों पर व्यापक बातचीत की गुंजाइश है।
भारत-बांग्लादेश रिश्तों में नई शुरुआत की उम्मीद
भारत और बांग्लादेश के संबंध पिछले कुछ समय से कई राजनीतिक और कूटनीतिक चुनौतियों से गुजरे हैं। बांग्लादेश में राजनीतिक बदलाव के बाद नई सरकार के साथ नई दिल्ली के रिश्तों को लेकर भी कई सवाल उठे हैं। ऐसे में BRICS सम्मेलन दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व को एक ही मंच पर बातचीत का अवसर दे सकता है।
भारत के लिए यह पहल इसलिए भी अहम है क्योंकि बांग्लादेश दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच संपर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वहीं नेपाल भारत के साथ ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध साझा करता है। दोनों देशों को एक बहुपक्षीय मंच पर जोड़ना क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में उपयोगी कदम हो सकता है।
आर्थिक विकास और कनेक्टिविटी पर बढ़ सकता है सहयोग
नेपाल, बांग्लादेश और भारत के बीच व्यापार, ऊर्जा, सड़क-रेल संपर्क और सीमा पार कनेक्टिविटी पहले से ही सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं। BRICS का मंच इन मुद्दों को व्यापक ग्लोबल साउथ के संदर्भ में रखने का अवसर दे सकता है।
भारत की कोशिश अब केवल पड़ोसी देशों के साथ राजनीतिक संवाद तक सीमित रखने की नहीं दिखती। विकास साझेदारी, बुनियादी ढांचा, ऊर्जा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाना भी उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। यही वजह है कि BRICS सम्मेलन की मेज पर दक्षिण एशियाई पड़ोसियों की मौजूदगी का असर सम्मेलन कक्ष से बाहर भी दिखाई दे सकता है।
भारत की ‘Neighbourhood First’ नीति को मिलेगा नया आधार
नेपाल और बांग्लादेश को BRICS आउटरीच में आमंत्रित करने की पहल को भारत की पड़ोसी देशों तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि भारत अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों को मजबूत करना चाहता है और विकास साझेदारी इस सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कुल मिलाकर, नई दिल्ली में होने वाला BRICS सम्मेलन भारत के लिए दो स्तरों पर महत्वपूर्ण हो सकता है। एक तरफ भारत वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने की कोशिश करेगा, तो दूसरी ओर नेपाल और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों के साथ संवाद के लिए नया राजनीतिक और कूटनीतिक स्पेस तैयार हो सकता है। अगर यह पहल आगे ठोस सहयोग में बदलती है, तो इसका असर पूरे दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक साझेदारी पर पड़ सकता है।













