नई दिल्ली, 28 अगस्त 2026। ऋषभ पंत का आक्रामक अंदाज टेस्ट क्रिकेट में कई बार भारत के लिए मैच का रुख बदल चुका है। लेकिन यही अंदाज जब परिस्थितियों के खिलाफ चला जाए तो सवाल भी खड़े होते हैं। श्रीलंका के खिलाफ हालिया टेस्ट सीरीज में पंत के प्रदर्शन और उनके शॉट सेलेक्शन को लेकर पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है।
अश्विन का कहना है कि पंत अभी तक उन उम्मीदों पर पूरी तरह खरे नहीं उतरे हैं, जो उनसे एक अनुभवी टेस्ट बल्लेबाज के तौर पर की जाती हैं। उनके मुताबिक, आक्रामक क्रिकेट खेलना पंत की पहचान है, लेकिन टीम की जरूरत और मैच की स्थिति को नजरअंदाज करके जोखिम लेना सही रणनीति नहीं हो सकती।
दो टेस्ट मैचों की सीरीज में पंत ने कुल 168 रन बनाए और उनके बल्ले से दो अर्धशतक भी निकले। आंकड़े पूरी तरह निराशाजनक नहीं हैं, लेकिन उनके खेलने के तरीके ने चर्चा जरूर पैदा की। अश्विन के मुताबिक, असली मुद्दा रन बनाने से ज्यादा उस तरीके का है, जिससे बल्लेबाज परिस्थितियों को पढ़कर फैसला करता है।
ऋषभ पंत से मेरी उम्मीदें अभी पूरी नहीं हुईं: अश्विन
अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर पंत के प्रदर्शन का विश्लेषण करते हुए कहा कि विकेटकीपर-बल्लेबाज से उनकी उम्मीदें अभी पूरी नहीं हुई हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सवाल पंत की प्रतिभा या उनके आक्रामक खेल पर नहीं, बल्कि जोखिम चुनने के समय पर है।
अश्विन ने कहा कि जब मैच आपके नियंत्रण में हो, तब भी यह देखना जरूरी है कि टीम को उस समय क्या चाहिए। बल्लेबाज का यह कहना कि ‘ऋषभ ऐसे ही खेलते हैं’, टीम की जरूरत से बड़ा तर्क नहीं हो सकता।
यही टेस्ट क्रिकेट की खूबी भी है। यहां एक अच्छा शॉट मैच जिता सकता है, लेकिन गलत समय पर खेला गया वही शॉट पूरी मेहनत पर पानी फेर सकता है।
‘टेस्ट हारने के लिए एक पल की बेवकूफी काफी’
अश्विन ने टेस्ट क्रिकेट की इसी बारीकी को समझाते हुए कहा कि किसी मुकाबले को जीतने के लिए पूरी टीम का योगदान चाहिए, लेकिन हार के लिए कभी-कभी एक गलत फैसला ही पर्याप्त होता है।
उन्होंने पिछले साल के ऑस्ट्रेलिया दौरे के सिडनी और ब्रिस्बेन टेस्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि पंत ने वहां शानदार पारियां खेलीं, लेकिन टीम की जीत में वॉशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर जैसे खिलाड़ियों का योगदान भी महत्वपूर्ण था।
अश्विन का तर्क सीधा है—टेस्ट मैच सिर्फ एक खिलाड़ी के दम पर नहीं जीता जाता। पांच दिन के खेल में 11 खिलाड़ियों की जरूरत होती है। लेकिन एक गलत क्षण, एक खराब फैसला और एक गैरजरूरी जोखिम मुकाबले को दूसरी दिशा में ले जा सकता है।
सहवाग और गिलक्रिस्ट से पंत की तुलना पर भी अश्विन नाराज
ऋषभ पंत के आक्रामक खेल की तुलना अक्सर वीरेंद्र सहवाग और एडम गिलक्रिस्ट से की जाती है। दोनों बल्लेबाज टेस्ट क्रिकेट में अपने बेखौफ अंदाज के लिए जाने जाते थे। लेकिन अश्विन इस तुलना को पूरी तरह सही नहीं मानते।
उनका कहना है कि सहवाग और गिलक्रिस्ट आक्रामक बल्लेबाजी करते थे, लेकिन आक्रामकता का मतलब हर गेंद पर जोखिम लेना नहीं था। अश्विन ने सवाल उठाया कि अगर टीम 500 रन पीछे हो तो मार्को जानसेन जैसे गेंदबाज के खिलाफ आगे बढ़कर जोखिम भरा शॉट खेलने का क्या औचित्य है।
उनके मुताबिक, पंत के आक्रामक खेल को एक खास ब्रांड या मार्केटिंग नैरेटिव के तौर पर पेश करने के बजाय यह देखना चाहिए कि उस समय टीम की वास्तविक जरूरत क्या थी।
‘ऋषभ अनुभवी हैं, अब जिम्मेदारी भी लेनी होगी’
अश्विन ने पंत को युवा खिलाड़ी मानकर हर गलती को नजरअंदाज करने की दलील से भी असहमति जताई। उन्होंने कहा कि पंत अब 50 से ज्यादा टेस्ट मैच खेल चुके हैं। इसलिए उनसे सिर्फ प्रतिभा दिखाने की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी लेने की भी अपेक्षा की जाती है।
उन्होंने यशस्वी जायसवाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वह भी युवा भारतीय बल्लेबाज हैं और उनके साथ भी भरोसे का वही स्तर होना चाहिए। किसी खिलाड़ी को ‘एक पीढ़ी में एक बार आने वाला’ बताकर उसकी गलतियों को लगातार सही ठहराना उचित नहीं है।
अश्विन ने हालांकि यह भी साफ किया कि उन्हें पंत बतौर क्रिकेटर बेहद पसंद हैं। उनकी आलोचना किसी व्यक्तिगत नापसंदगी से नहीं, बल्कि एक अनुभवी खिलाड़ी से की जा रही अपेक्षाओं से जुड़ी है।
पंत को सीखना होगा—कब हमला करना है और कब रुकना है
पंत की सबसे बड़ी ताकत उनका निडर क्रिकेट है। वह गेंदबाज पर दबाव बनाने और असंभव दिखने वाले शॉट खेलने की क्षमता रखते हैं। यही वजह है कि वह टेस्ट क्रिकेट में मैच का रुख तेजी से बदलने वाले बल्लेबाजों में गिने जाते हैं।
लेकिन अश्विन की आलोचना का मूल बिंदु भी यही है—आक्रामकता और लापरवाही के बीच एक बेहद महीन अंतर होता है।
पंत के लिए अगली चुनौती शायद यही होगी कि वह अपनी स्वाभाविक शैली को छोड़े बिना मैच की परिस्थिति को पढ़ना सीखें। कब गेंदबाज पर टूट पड़ना है और कब कुछ गेंदों को छोड़कर पारी को आगे बढ़ाना है, टेस्ट क्रिकेट में यही फैसला अक्सर महान बल्लेबाज और सिर्फ प्रतिभाशाली बल्लेबाज के बीच अंतर पैदा करता है।
अश्विन का संदेश इसलिए सिर्फ पंत के लिए नहीं, बल्कि टेस्ट क्रिकेट की उस मूल भावना के लिए भी है जिसमें प्रतिभा के साथ धैर्य, जिम्मेदारी और परिस्थिति की समझ उतनी ही अहम होती है।













