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PM मोदी ने विपक्ष पर साधा निशाना, कहा- ‘नाराज फूफा’ की तरह हर विकास पर आपत्ति; ‘दिमागी नक्सल’ पर भी तंज

On: September 5, 2026
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PM मोदी ने विपक्ष पर साधा निशाना
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नई दिल्ली/05 सितंबर 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में युवाओं के सामने विकसित भारत का विजन रखा। उन्होंने कहा कि भारत आज जिस तेजी से आगे बढ़ रहा है, उसमें देश के युवाओं की भूमिका सबसे अहम है। इसी दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर तीखे राजनीतिक तंज भी कसे और विकास कार्यों पर सवाल उठाने वालों को ‘नाराज फूफा’ की संज्ञा दी।

PM मोदी SRCC कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट से लेकर तकनीक, सेमीकंडक्टर और छोटे से छोटे चिप निर्माण तक किया है। उनके मुताबिक, देश अब किसी भी क्षेत्र में पीछे रहने के लिए तैयार नहीं है।

‘नाराज फूफा’ की तरह हर विकास पर आपत्ति

प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में जब भी कोई बड़ा काम होता है, कुछ लोगों को उसमें भी कमी नजर आने लगती है। उन्होंने ऐसे लोगों की तुलना ‘नाराज फूफा’ से की, जिन्हें हर बात में आपत्ति होती है।

मोदी ने कहा कि भारत ने आलोचनाओं का जवाब बहस से ज्यादा अपने काम और उपलब्धियों से दिया है। उन्होंने देश की बड़ी परियोजनाओं, तकनीकी क्षमता और सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में हो रही प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अब अपनी क्षमताओं को लगातार विस्तार दे रहा है।

उनके भाषण में यह संदेश भी स्पष्ट था कि देश के विकास की रफ्तार को लेकर निराशा फैलाने के बजाय उपलब्धियों और संभावनाओं पर ध्यान देने की जरूरत है।

‘दिमागी नक्सल’ पर PM मोदी का तंज, बोले- 15 अगस्त को दी थी ‘होम्योपैथिक गोली’

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए राजनीतिक विरोधियों पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त को लाल किले से उन्होंने इसकी ‘होम्योपैथिक गोली’ दी थी।

उन्होंने होम्योपैथी का उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार इलाज की शुरुआत में बीमारी बढ़ती हुई दिखाई देती है, लेकिन बाद में उसका असर सामने आता है। प्रधानमंत्री ने इसी संदर्भ में कहा कि 15 अगस्त के बाद ‘दिमागी नक्सल’ वाली बात सामने आते ही कई लोग प्रतिक्रिया देने के लिए सामने आ गए।

इस टिप्पणी पर कार्यक्रम में मौजूद युवाओं की ओर से उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया देखने को मिली।

भारतीय युवाओं में दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता: PM मोदी

प्रधानमंत्री ने युवाओं की प्रतिभा और वैश्विक स्तर पर भारतीयों की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि आज कई भारतीय दुनिया की बड़ी कंपनियों का नेतृत्व कर रहे हैं।

उन्होंने युवाओं के सामने सवाल रखा कि यदि भारतीय दुनिया की बड़ी कंपनियों को नेतृत्व दे सकते हैं, तो भारतीयों द्वारा बनाई गई कंपनियां वैश्विक स्तर पर नेतृत्व क्यों नहीं कर सकतीं?

मोदी ने कहा कि देश के युवाओं के पास नेटवर्क भी है और ज्ञान भी। जरूरत केवल अपनी क्षमता पर भरोसा करने और बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करने की है।

उनका जोर इस बात पर रहा कि भारत को केवल वैश्विक कंपनियों में काम करने वाले प्रतिभाशाली युवाओं की जरूरत नहीं है, बल्कि ऐसे उद्यमियों और संस्थापकों की भी जरूरत है जो भारत से निकलकर दुनिया के बाजारों का नेतृत्व करें।

SRCC के लोगो से विकसित भारत तक का संदेश

श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के लोगो का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उसमें उगता हुआ सूरज और आगे बढ़ता हुआ जहाज दिखाई देता है। उन्होंने इसे आगे बढ़ने, नई मंजिल तलाशने और चुनौतियों से टकराने की भावना से जोड़ा।

युवाओं में जोश भरते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सूरज भी अपना हो, समंदर भी अपना हो, नाव भी अपनी हो और नाविक भी अपना हो। उन्होंने युवाओं से लहरों से टकराने का साहस और ऊंची उड़ान का सपना रखने की अपील की।

यह संदेश केवल प्रतीकात्मक नहीं था। प्रधानमंत्री ने इसे भारत के भविष्य और युवाओं की जिम्मेदारी से जोड़ते हुए कहा कि देश को आगे ले जाने का काम किसी और के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।

‘सपना हमारा है तो संकल्प भी हमारा होना चाहिए’

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भागीदारी को जरूरी बताते हुए कहा कि अगर सपना हमारा है तो उसे पूरा करने का संकल्प भी हमारा ही होना चाहिए।

उन्होंने युवाओं से तेज हवाओं और मुश्किल परिस्थितियों के बीच भी आगे बढ़ते रहने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री के मुताबिक, विकसित भारत की दिशा में युवा जो भी सकारात्मक कदम उठाएंगे, वह केवल उनका व्यक्तिगत प्रयास नहीं होगा, बल्कि देश की प्रगति में योगदान बनेगा।

SRCC के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री का संबोधन इसी विश्वास के इर्द-गिर्द रहा कि भारत के पास प्रतिभा, संसाधन और अवसर मौजूद हैं। अब चुनौती इन्हें एक साझा राष्ट्रीय लक्ष्य में बदलने की है—और इसमें युवाओं को सबसे आगे रहना होगा।

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