नई दिल्ली/04 सितंबर 2026। किसी नई सड़क या एक्सप्रेसवे के शुरू होने के कुछ ही समय बाद उसमें दरारें, जलभराव या दूसरी तकनीकी खामियां दिखाई दें तो सवाल उठना स्वाभाविक है। लेकिन जब ऐसी परियोजना का लोकार्पण प्रधानमंत्री के हाथों हुआ हो, तब मामला सिर्फ निर्माण गुणवत्ता तक सीमित नहीं रहता। उस परियोजना से सरकार की कार्यप्रणाली और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल पर भी सवाल जुड़ जाते हैं।
हाल के कुछ अनुभवों से सबक लेते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अब ऐसे प्रोजेक्ट्स को लेकर निगरानी व्यवस्था कड़ी करने का फैसला किया है। नए दिशा-निर्देशों के तहत NHAI परियोजनाओं की निगरानी लोकार्पण या यातायात के लिए खोले जाने के बाद लगातार छह महीने तक की जाएगी।
इस अवधि में शुरुआती तीन महीने निरीक्षण साप्ताहिक आधार पर होगा, जबकि अगले तीन महीनों में हर पखवाड़े परियोजना खंड की जांच की जाएगी। किसी तरह की कमी या संभावित खराबी सामने आने पर उसे जल्द से जल्द दुरुस्त कराने की व्यवस्था भी नए एसओपी में शामिल की गई है।
NHAI परियोजनाओं की निगरानी के पीछे क्या है वजह?
इस फैसले के पीछे हाल के कुछ ऐसे मामले बताए जा रहे हैं, जिनमें प्रधानमंत्री द्वारा लोकार्पित परियोजनाओं में कमियां सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया था। इसी वर्ष अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया था। इसके कुछ हिस्सों में तीन महीने के भीतर दरारें सामने आने की खबरें आईं।
इसके अलावा गंगा एक्सप्रेसवे समेत कुछ अन्य परियोजनाओं से जुड़ी तकनीकी खामियां भी सार्वजनिक चर्चा का विषय बनीं। सोशल मीडिया पर ऐसे मामलों के वीडियो और तस्वीरें तेजी से प्रसारित हुए और विपक्षी दलों ने भी इन्हें लेकर सरकार पर निशाना साधा।
NHAI ने इन अनुभवों को गंभीरता से लेते हुए परियोजनाओं के उद्घाटन के बाद की निगरानी को अपनी मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP का हिस्सा बनाया है।
पीएम के लोकार्पण वाली परियोजनाओं के लिए बदली SOP
NHAI की परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण से संबंधित SOP पहले से लागू रही है। उपलब्ध सर्कुलर के मुताबिक, प्रधानमंत्री द्वारा परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास से संबंधित एक विस्तृत SOP पांच अप्रैल 2023 को जारी की गई थी।
इसके बाद अक्टूबर 2023 के साथ-साथ वर्ष 2024 और 2025 में भी इसमें आवश्यक सुधार और संशोधन किए गए। हालांकि, इन दिशा-निर्देशों में लोकार्पण के बाद परियोजना की नियमित निगरानी को लेकर अलग से प्रावधान नहीं था।
हाल में जारी संशोधित SOP में इसे विशेष रूप से जोड़ा गया है। इसमें कहा गया है कि हाल के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रमों से मिले अनुभवों तथा सीख के आधार पर कुछ अतिरिक्त दिशा-निर्देश शामिल किए गए हैं।
पहले तीन महीने हर सप्ताह होगा निरीक्षण
नए प्रावधान के मुताबिक, उद्घाटन या यातायात के लिए सड़क खोले जाने के बाद पहले तीन महीनों में परियोजना खंड का हर सप्ताह संयुक्त निरीक्षण किया जाएगा। यह निरीक्षण कंसेसनेयर के संबंधित परियोजना प्रबंधक और पर्यवेक्षक परामर्शदाता यानी अथॉरिटी इंजीनियर (AE) या इंडिपेंडेंट इंजीनियर (IE) के टीम लीडर द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा।
निरीक्षण का उद्देश्य सड़क की पेवमेंट और राइडिंग क्वालिटी, जल निकासी व्यवस्था, सुरक्षा प्रतिष्ठानों और तटबंध की ढाल समेत अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं की स्थिति पर नजर रखना होगा।
इसके बाद अगले तीन महीनों में निरीक्षण की आवृत्ति घटाकर पाक्षिक कर दी जाएगी। यानी छह महीने तक परियोजना के प्रदर्शन और निर्माण गुणवत्ता पर लगातार नजर बनी रहेगी।
रूट पेट्रोलिंग वाहनों से भी होगी निगरानी
नए दिशा-निर्देशों में सिर्फ अधिकारियों के निरीक्षण पर निर्भर रहने के बजाय रूट पेट्रोलिंग व्यवस्था को भी मजबूत करने की बात कही गई है। राजमार्ग खुलने के बाद पेट्रोलिंग वाहन नियमित रूप से गश्त करेंगे और सड़क की स्थिति पर नजर रखेंगे।
यदि निरीक्षण या पेट्रोलिंग के दौरान कोई दोष या संभावित खराबी दिखाई देती है तो उसे जियो-टैग किया जाएगा। इसके बाद परियोजना निदेशक, कंसेसनेयर और AE/IE को तत्काल इसकी जानकारी देने का प्रावधान है।
NHAI की संबंधित प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट को यह सुनिश्चित करना होगा कि सामने आई कमी के सुधार की कार्रवाई समय पर पूरी हो। इसका सीधा मतलब है कि किसी समस्या के सामने आने के बाद उसे केवल रिपोर्ट में दर्ज करके छोड़ने के बजाय उसके समाधान तक निगरानी रखी जाएगी।
बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए स्वतंत्र ऑडिट का भी प्रावधान
संशोधित SOP में उद्घाटन से पहले और बाद की तकनीकी जांच को लेकर एक और महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, हाईस्पीड कॉरिडोर और अन्य विशिष्ट परियोजनाओं के अलावा 2500 करोड़ रुपये से अधिक की कुल पूंजीगत लागत वाली महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए प्रतिष्ठित तीसरे पक्ष की संस्था से स्वतंत्र ऑडिट कराने का सुझाव दिया गया है।
इस ऑडिट में संभावित यातायात दबाव, जल निकासी और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं का आकलन किया जा सकता है। इसके लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की विशेषज्ञता लेने का सुझाव दिया गया है।
इस बदलाव का महत्व इसलिए भी है क्योंकि किसी एक्सप्रेसवे या बड़े राजमार्ग की वास्तविक परीक्षा यातायात शुरू होने के बाद ही होती है। निर्माण पूरा होने और उद्घाटन के समय परियोजना भले ही पूरी तरह तैयार दिखाई दे, लेकिन भारी यातायात, बारिश और लगातार इस्तेमाल के बाद ही कई व्यावहारिक कमियां सामने आती हैं। नई निगरानी व्यवस्था इसी अंतर को कम करने की कोशिश है।
जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम
NHAI का यह फैसला केवल निरीक्षण की अवधि बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसमें सड़क खुलने के बाद वास्तविक परिस्थितियों में उसकी गुणवत्ता पर नजर रखने और सामने आई खामियों के तत्काल समाधान पर जोर दिया गया है।
प्रधानमंत्री द्वारा लोकार्पित परियोजनाओं को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर विशेष ध्यान रहता है। ऐसे में नई SOP के जरिए NHAI ने यह संकेत दिया है कि बड़े राष्ट्रीय राजमार्ग प्रोजेक्ट के उद्घाटन के साथ उसकी जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी। असली चुनौती तो सड़क पर यातायात शुरू होने के बाद सामने आने वाली कमियों को समय रहते पहचानने और उन्हें दूर करने की होगी।












