चेन्नई (10 मई 2026)। तमिलनाडु की राजनीति में ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन के बाद अब नई विधानसभा की औपचारिक शुरुआत की तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु वेत्री कड़गम (टीवीके) सरकार ने वरिष्ठ विधायक एम.वी. करुपैया को 17वीं विधानसभा का प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया है। सोमवार से शुरू होने वाले विधानसभा के पहले सत्र से पहले यह फैसला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों लिहाज से अहम माना जा रहा है।
एम.वी. करुपैया सोमवार को नवनिर्वाचित विधायकों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे और सदन की शुरुआती कार्यवाही का संचालन करेंगे। राजनीतिक गलियारों में उनकी नियुक्ति को अनुभव, संगठनात्मक निष्ठा और लंबे जनाधार का सम्मान बताया जा रहा है।
एम.वी. करुपैया प्रोटेम स्पीकर बनने के बाद बढ़ी राजनीतिक चर्चा
तमिलनाडु की नई सरकार बनने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा जिन चेहरों को लेकर हो रही है, उनमें एम.वी. करुपैया का नाम भी शामिल हो गया है। मदुरै जिले के वाविदामरुथुर गांव से आने वाले करुपैया का राजनीतिक सफर चार दशक से अधिक पुराना रहा है।
उन्होंने 1980 में अन्नाद्रमुक के साथ अपनी सक्रिय राजनीति की शुरुआत की थी। संगठन में रहते हुए उन्होंने मछुआरा संघ के सचिव समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ और संगठनात्मक अनुभव की वजह से वे लंबे समय तक दक्षिण तमिलनाडु की राजनीति में प्रभावशाली चेहरा बने रहे।
करुपैया ने पहली बार 2011 में चोलवंदन विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में उन्होंने अन्नाद्रमुक उम्मीदवार के रूप में 36 हजार से अधिक वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर राजनीतिक पहचान मजबूत की थी।
हालांकि, 2016 और 2021 के विधानसभा चुनावों में टिकट नहीं मिलने से वे पार्टी में खुद को उपेक्षित महसूस करने लगे थे। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यही असंतोष बाद में उनके दल परिवर्तन की वजह बना।
अन्नाद्रमुक छोड़ टीवीके में शामिल हुए थे करुपैया
इसी साल करुपैया ने वरिष्ठ नेता के.ए. सेंगोट्टइयन से मुलाकात के बाद तमिलनाडु वेत्री कड़गम (टीवीके) का दामन थाम लिया था। मुख्यमंत्री विजय ने उन पर भरोसा जताते हुए 2026 विधानसभा चुनाव में उन्हें दोबारा चोलवंदन सीट से उम्मीदवार बनाया।
करुपैया ने इस भरोसे को जीत में बदल दिया और शानदार प्रदर्शन करते हुए विधानसभा पहुंचे। अब उन्हें प्रोटेम स्पीकर बनाए जाने को टीवीके नेतृत्व द्वारा वरिष्ठ नेताओं को सम्मान देने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार अनुभवी नेताओं और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
सोमवार से शुरू होगा 17वीं विधानसभा का पहला सत्र
तमिलनाडु विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 17वीं विधानसभा का पहला सत्र सोमवार 11 मई को सुबह 9:30 बजे चेन्नई स्थित सचिवालय परिसर के विधानसभा कक्ष में शुरू होगा।
पहले दिन सभी नवनिर्वाचित विधायक शपथ लेंगे। इसके बाद सदन की प्रारंभिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। नई सरकार के गठन के बाद यह पहला विधायी सत्र होने के कारण राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सत्र के दूसरे दिन यानी 12 मई को विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) और उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) के चुनाव की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। माना जा रहा है कि नई सरकार सदन के संचालन को लेकर शुरुआत से ही स्पष्ट रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहती है।
विपक्ष में होगी द्रमुक, उदयनिधि स्टालिन बने विधायक दल के नेता
विधानसभा में इस बार द्रमुक प्रमुख विपक्षी दल की भूमिका निभाएगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन को द्रमुक विधायक दल का नेता चुना गया है।
इसके अलावा वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री के.एन. नेहरू को विधायक दल का उपनेता बनाया गया है, जबकि ई.वी. वेलू को पार्टी का सचेतक नियुक्त किया गया है।
59 विधायकों के साथ द्रमुक विधानसभा में मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने की तैयारी में है। ऐसे में आगामी सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक रणनीतियों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
तमिलनाडु की नई विधानसभा का यह पहला सत्र केवल संवैधानिक औपचारिकता भर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राज्य की नई राजनीतिक दिशा तय करने वाले शुरुआती संकेतों के रूप में भी देखा जा रहा है।













