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योगी सरकार का मेगा प्लान, 13 विभाग मिलकर लाखों युवाओं को देंगे स्किल ट्रेनिंग और रोजगार

On: May 10, 2026
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योगी सरकार का मेगा प्लान, 13 विभाग मिलकर लाखों युवाओं को देंगे स्किल ट्रेनिंग और रोजगार
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लखनऊ, Sun, 10 May 2026। उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा “स्किल हब” बनाने की दिशा में योगी सरकार ने अब तक की सबसे व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ विजन को जमीन पर उतारने के लिए राज्य सरकार ने 13 प्रमुख विभागों के साथ मिलकर एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसका मकसद लाखों युवाओं को उद्योग आधारित प्रशिक्षण देकर रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ना है।

प्रदेश सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में वही राज्य आर्थिक रूप से आगे बढ़ेंगे, जिनके पास प्रशिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम मानव संसाधन होगा। इसी सोच के साथ उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) ने बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है।

तीन महीने में तेज होगा स्किल ट्रेनिंग अभियान

व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के निर्देशन में मिशन ने सभी विभागों को प्रशिक्षण से जुड़ा विस्तृत प्रस्ताव भेजा है। योजना के तहत अगले तीन महीनों में युवाओं को उनकी रुचि और बाजार की जरूरत के हिसाब से ट्रेनिंग दी जाएगी।

सरकार केवल सर्टिफिकेट देने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि युवाओं को सीधे रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने पर फोकस कर रही है। अधिकारियों के अनुसार ट्रेनिंग मॉड्यूल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि प्रशिक्षित युवा उद्योगों की मौजूदा मांग के अनुरूप तुरंत काम करने के लिए तैयार हो सकें।

ग्रामीण युवाओं से लेकर महिला समूहों तक फोकस

इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत इसका सामाजिक दायरा माना जा रहा है। सरकार ने इसे केवल शहरों तक सीमित नहीं रखा है। ग्रामीण युवाओं, महिला स्वयं सहायता समूहों, अल्पसंख्यक समुदायों और निर्माण श्रमिकों के परिवारों को भी इस योजना में शामिल किया गया है।

सरकार का उद्देश्य उन वर्गों तक अवसर पहुंचाना है जो अब तक मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए थे। अधिकारियों का कहना है कि कौशल प्रशिक्षण के जरिए लोगों को आत्मनिर्भर बनाने से न सिर्फ बेरोजगारी कम होगी बल्कि छोटे स्तर पर उद्यमिता भी बढ़ेगी।

जेलों में बंद युवाओं को भी मिलेगा हुनर का मौका

योजना का एक बेहद अलग और संवेदनशील पहलू जेलों में बंद युवाओं के लिए शुरू किया जाने वाला स्किल प्रोग्राम है। कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं विभाग के सहयोग से बंदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि सजा पूरी होने के बाद वे सामान्य जीवन में सम्मानजनक रोजगार हासिल कर सकें।

सरकारी अधिकारियों का मानना है कि पुनर्वास आधारित यह मॉडल अपराध की पुनरावृत्ति कम करने में भी मददगार साबित हो सकता है। यही वजह है कि इस पहल को सामाजिक सुधार की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राष्ट्रीय मानकों के अनुसार होगी ट्रेनिंग

UPSDM के मिशन निदेशक पुलकित खरे के मुताबिक सभी प्रशिक्षण कार्यक्रम भारत सरकार के ‘कॉस्ट कॉमन नॉर्म्स’ (CCN) के तहत संचालित होंगे। मिशन को राष्ट्रीय स्तर पर NCVET से ‘अवार्डिंग बॉडी’ की मान्यता मिली हुई है, जिससे प्रशिक्षण और प्रमाणन की गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।

इस मिशन में कई प्रतिष्ठित निजी कंपनियां और सरकारी संस्थान भी साझेदार के रूप में जुड़े हैं। इससे युवाओं को आधुनिक उद्योगों की जरूरत के हिसाब से ट्रेनिंग मिल सकेगी। सरकार का फोकस केवल पारंपरिक ट्रेड्स तक सीमित नहीं है, बल्कि टेक्नोलॉजी, सर्विस सेक्टर और आधुनिक उद्योगों से जुड़े कौशल पर भी है।

8 लाख से ज्यादा युवाओं को मिल चुका फायदा

उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन पिछले नौ वर्षों में बड़े स्तर पर काम कर चुका है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 8,09,494 युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इनमें से 3,04,810 युवाओं को रोजगार या सेवायोजन के अवसर भी मिले हैं।

यही वजह है कि सरकार अब इस मॉडल को और बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी में है। अधिकारियों का दावा है कि अगर विभागीय समन्वय तय समय पर आगे बढ़ा तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश रोजगार आधारित स्किल ट्रेनिंग के मामले में देश का अग्रणी राज्य बन सकता है।

13 विभागों के तालमेल से खुलेगा रोजगार का नया रास्ता

इस मेगा अभियान में माध्यमिक शिक्षा, पर्यटन, अल्पसंख्यक कल्याण, महिला कल्याण, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग समेत 13 विभागों को शामिल किया गया है। जून के पहले सप्ताह तक सभी विभागों को लक्ष्य आवंटित किए जाने की संभावना है।

सरकार ने विभागों से नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने को कहा है ताकि ट्रेनिंग कार्यक्रमों की निगरानी और क्रियान्वयन तेज गति से हो सके। माना जा रहा है कि यह मॉडल आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार ढांचे को नई दिशा दे सकता है।

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