लखनऊ (Mon, 11 May 2026)। उत्तर प्रदेश में लगाए गए स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इसी बीच राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने 84 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की तकनीकी जांच केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान (CPRI), बेंगलुरु से कराने की मांग उठाई है। परिषद का कहना है कि केवल मीटर की सतही जांच पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि पूरे डिजिटल नेटवर्क और डेटा प्रोसेसिंग सिस्टम की गहराई से पड़ताल जरूरी है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने सोमवार को कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर पूरी तरह डिजिटल और कम्युनिकेशन आधारित तकनीक पर काम करते हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं की शिकायतों की असली वजह समझने के लिए मीटर को हेड एंड सिस्टम (HES) और क्लाउड बेस्ड डेटा मैनेजमेंट सिस्टम के साथ जोड़कर जांचा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई उपभोक्ता अचानक बैलेंस खत्म होने, गलत बिलिंग, रिचार्ज अपडेट में देरी और बिजली कटने जैसी समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं। इससे आम उपभोक्ताओं के बीच स्मार्ट मीटर को लेकर अविश्वास का माहौल बनता जा रहा है। परिषद का मानना है कि यदि समय रहते तकनीकी खामियों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो भविष्य में विवाद और बढ़ सकते हैं।
डेटा ट्रांसमिशन से लेकर सर्वर प्रोसेसिंग तक जांच की मांग
अवधेश कुमार वर्मा के मुताबिक जांच केवल मीटर मशीन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसमें डेटा ट्रांसमिशन, रिमोट कम्युनिकेशन, प्रीपेड बैलेंस अपडेट, बिलिंग प्रोसेस और सर्वर प्रोसेसिंग जैसी तकनीकी परतों को भी शामिल किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि कई बार समस्या मीटर में नहीं बल्कि डेटा सिंक्रोनाइजेशन या सर्वर प्रोसेसिंग में होती है, जिसका सीधा असर उपभोक्ता के बिल और बैलेंस पर पड़ता है।
उन्होंने यह भी मांग की कि जांच के लिए स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के सैंपल सीधे उपभोक्ताओं के परिसरों से उठाए जाएं, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। परिषद ने यह आशंका भी जताई कि यदि केवल चयनित मीटरों की जांच हुई तो पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं हो पाएगी।
जांच प्रक्रिया में विशेषज्ञों और उपभोक्ता संगठनों को शामिल करने की मांग
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया है। परिषद ने मांग की है कि जांच में उपभोक्ता संगठनों, तकनीकी विशेषज्ञों और विद्युत नियामक आयोग के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए। उनका कहना है कि इससे जांच रिपोर्ट पर भरोसा बढ़ेगा और उपभोक्ताओं की शंकाओं का समाधान हो सकेगा।
प्रदेश में तेजी से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की योजना के बीच यह मुद्दा अब गंभीर बहस का विषय बनता जा रहा है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकार मानते हैं कि डिजिटल मीटरिंग भविष्य की जरूरत है, लेकिन इसके साथ मजबूत तकनीकी निगरानी और पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी है।











