ओस्लो/नई दिल्ली, 18 मई 2026 (सोमवार)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को दो दिवसीय दौरे पर नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंच गए। यह दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि करीब 43 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने नॉर्वे की धरती पर कदम रखा है। इससे पहले वर्ष 1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने नॉर्वे का दौरा किया था। ऐसे समय में यह यात्रा हो रही है जब यूरोप सुरक्षा चुनौतियों, जलवायु संकट और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अस्थिरता जैसे बड़े मुद्दों से जूझ रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत स्वयं नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ने ओस्लो एयरपोर्ट पर किया। इस विशेष स्वागत को भारत-नॉर्वे संबंधों की बढ़ती अहमियत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए नॉर्वे सरकार का आभार जताते हुए कहा कि यह यात्रा दोनों देशों की मित्रता को नई मजबूती देगी।
भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन पर दुनिया की नजर
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 19 मई को होने वाला तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन है। ओस्लो में आयोजित इस सम्मेलन में नॉर्वे के अलावा डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के शीर्ष नेता भी शामिल होंगे।
यह मंच भारत और नॉर्डिक देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। खास बात यह है कि अमेरिका के बाद भारत दूसरा ऐसा प्रमुख देश है जिसके साथ नॉर्डिक देश इस तरह का विशेष शिखर सम्मेलन आयोजित करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत और नॉर्डिक देशों की साझेदारी आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
पीएम मोदी बोले- भारत-नॉर्वे मित्रता होगी और मजबूत
ओस्लो पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि चार दशकों से अधिक समय में यह पहली प्रधानमंत्री-स्तरीय भारत-नॉर्वे यात्रा है और उन्हें विश्वास है कि इससे दोनों देशों के संबंध और मजबूत होंगे।
उन्होंने बताया कि इस दौरे के दौरान वह नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम और महारानी सोन्या से मुलाकात करेंगे। साथ ही प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन उनके लिए नॉर्डिक देशों के नेताओं से व्यापक चर्चा का शानदार अवसर होगा।
यूरोप में बदल रही भारत की रणनीति
काफी समय तक भारत की यूरोपीय रणनीति मुख्य रूप से फ्रांस, जर्मनी और रूस जैसे पारंपरिक साझेदार देशों तक सीमित रही। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में नई दिल्ली ने उत्तरी यूरोप यानी नॉर्डिक क्षेत्र की बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक ताकत को गंभीरता से समझना शुरू किया है।
नॉर्डिक देशों की संयुक्त GDP करीब 1.9 ट्रिलियन डॉलर से अधिक मानी जाती है। ये देश ग्रीन हाइड्रोजन, डीप-टेक, समुद्री नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, सतत महासागर शासन और जलवायु तकनीकों में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हैं।
भारत के लिए यह साझेदारी इसलिए भी अहम है क्योंकि देश तेजी से हरित ऊर्जा, डिजिटल नवाचार और ब्लू इकॉनमी की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में नॉर्डिक देशों का अनुभव और तकनीकी क्षमता भारत की विकास योजनाओं को गति दे सकती है।
नॉर्वे ने पीएम मोदी की यात्रा को बताया ‘ऐतिहासिक’
नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को “ऐतिहासिक” करार दिया है। उन्होंने कहा कि 1983 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा है और नॉर्वे इस अवसर का गर्मजोशी से स्वागत करता है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस दौरे से भारत-नॉर्वे संबंध और मजबूत होंगे तथा कई सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। स्टेनर के अनुसार, नॉर्वे विशेष रूप से ग्रीन ट्रांजिशन, नवीकरणीय ऊर्जा, समुद्री क्षेत्र, डिजिटल हेल्थ टेक और जलवायु समाधान जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग बढ़ाने को लेकर उत्साहित है।
आतंकवादी हमले के बाद टला था सम्मेलन
भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन का तीसरा संस्करण मूल रूप से पिछले वर्ष आयोजित होना था, लेकिन अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद इसे स्थगित कर दिया गया था। हालांकि देरी के बावजूद इस मंच की अहमियत और भागीदारी पहले से अधिक मजबूत होकर सामने आई है।
विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि यह सम्मेलन केवल व्यापार या तकनीकी साझेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक भू-राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका का भी संकेत है।
हरित ऊर्जा और ब्लू इकॉनमी पर रहेगा खास फोकस
इस बार के शिखर सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा, हरित उद्योग, आर्कटिक क्षेत्र, डिजिटल इनोवेशन और समुद्री अर्थव्यवस्था प्रमुख विषय रहेंगे। नॉर्डिक देशों की विशेषज्ञता और भारत के विशाल बाजार का मेल दोनों पक्षों के लिए बड़े अवसर पैदा कर सकता है।
विशेष रूप से ब्लू इकॉनमी, समुद्री सुरक्षा और हरित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत और नॉर्डिक देशों के बीच सहयोग को भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।
राजनयिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि पीएम मोदी की यह यात्रा आने वाले वर्षों में भारत और यूरोप के बीच संबंधों के एक नए युग की शुरुआत साबित हो सकती है।









