लखनऊ/03 जून 2026: उत्तर प्रदेश को देश के सबसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में योगी सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024’ में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से राज्य वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में उभरेगा और आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होंगे।
दुनिया भर में चिप निर्माण उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है। ऐसे समय में उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी नीति को और अधिक प्रतिस्पर्धी तथा निवेशक-अनुकूल बनाकर वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करने की रणनीति तैयार की है।
यूपी सेमीकंडक्टर नीति 2024 में संशोधन से निवेश को मिलेगी नई रफ्तार
राज्य सरकार के अनुसार, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए नीति में समयानुकूल बदलाव आवश्यक हो गए थे। विभिन्न राज्यों के बीच निवेश को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बदलते वैश्विक औद्योगिक माहौल को ध्यान में रखते हुए यह संशोधन किया गया है।
उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 को मूल रूप से 19 जनवरी 2024 को अधिसूचित किया गया था और इसकी अवधि पांच वर्षों के लिए निर्धारित की गई थी। अब किए गए संशोधनों के बाद यह नीति निवेशकों की आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक लचीली और प्रभावी मानी जा रही है। इससे चिप निर्माण, पैकेजिंग, परीक्षण और संबंधित तकनीकी उद्योगों में बड़े निवेश का रास्ता खुल सकता है।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के साथ बढ़ेगा तालमेल
योगी सरकार का यह फैसला केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्र और राज्य की नीतियों में सामंजस्य बढ़ने से निवेशकों को प्रक्रियागत सुविधाएं मिलेंगी और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियां उत्तर प्रदेश में उत्पादन इकाइयां स्थापित करती हैं, तो इसका सीधा लाभ राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था, तकनीकी शिक्षा और रोजगार क्षेत्र को मिलेगा।
निवेशकों के लिए आकर्षक लेकिन जवाबदेही भी तय
नीति में संशोधन करते समय सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ परियोजनाओं की स्थिरता भी बनी रहे। इसी उद्देश्य से लाभ प्राप्त करने वाले निवेशकों के लिए यह शर्त रखी गई है कि उन्हें व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने की तारीख से कम से कम तीन वर्षों तक उत्पादन गतिविधियां जारी रखनी होंगी।
सरकार का मानना है कि इससे केवल प्रोत्साहन लेने के उद्देश्य से आने वाले अस्थायी निवेशों पर रोक लगेगी और वास्तविक औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त वित्तीय बोझ
कैबिनेट निर्णय की एक अहम विशेषता यह भी है कि नीति में संशोधन के बावजूद राज्य सरकार के खजाने पर किसी अतिरिक्त वित्तीय भार की संभावना नहीं है। सरकार ने मौजूदा ढांचे के भीतर ही निवेश को बढ़ावा देने और उद्योगों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने की रणनीति अपनाई है।
वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए औद्योगिक विकास को गति देने की यह पहल सरकार की दीर्घकालिक आर्थिक योजना का हिस्सा मानी जा रही है।
रोजगार और तकनीकी विकास को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
सेमीकंडक्टर उद्योग को आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। मोबाइल फोन, लैपटॉप, सर्वर, इलेक्ट्रिक वाहन, ऑटोमोबाइल, मेडिकल उपकरण और रक्षा क्षेत्र तक में चिप्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्तर प्रदेश में बड़े स्तर पर चिप निर्माण इकाइयां स्थापित होती हैं, तो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही राज्य में तकनीकी कौशल विकास, अनुसंधान और नवाचार को भी नई दिशा मिलेगी।
उत्तर प्रदेश को मिल सकती है नई औद्योगिक पहचान
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा उत्पादन और औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। अब सेमीकंडक्टर क्षेत्र में नीति सुधार को इसी श्रृंखला की अगली कड़ी माना जा रहा है।
सरकार को उम्मीद है कि यह कदम उत्तर प्रदेश को केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने में मदद करेगा। यदि निवेश प्रस्ताव तेजी से धरातल पर उतरते हैं, तो आने वाले वर्षों में यूपी देश के प्रमुख चिप निर्माण केंद्रों में शामिल हो सकता है।








