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उत्तर-पश्चिम में बढ़ेगी गर्मी, दक्षिण और पूर्वोत्तर में भारी बारिश; राजस्थान में चलेंगी तूफानी हवाएं

On: June 15, 2026
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उत्तर-पश्चिम में बढ़ेगी गर्मी, दक्षिण और पूर्वोत्तर में भारी बारिश
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नई दिल्ली|15 जून 2026: देश में मानसून की दस्तक के बीच मौसम के कई रंग एक साथ देखने को मिल रहे हैं। कहीं बारिश लोगों को गर्मी से राहत दे रही है तो कहीं तेज हवाएं और आंधी चुनौती बनकर सामने आ रही हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में IMD Weather Alert के तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज अलग-अलग रहने वाला है। उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान बढ़ने की संभावना है, जबकि दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है।

उत्तर भारत में बारिश और तेज हवाओं का असर

आईएमडी के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में अगले कुछ दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इन राज्यों में गरज-चमक के साथ 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं।

पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वाले लोगों और पर्यटकों को मौसम विभाग ने सतर्क रहने की सलाह दी है। बारिश के कारण कुछ क्षेत्रों में फिसलन, भूस्खलन और दृश्यता कम होने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

राजस्थान में चलेंगी तूफानी हवाएं

पूर्वी राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 20 जून तक मौसम सक्रिय बना रहने की संभावना है। इनमें राजस्थान सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल हो सकता है।

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि राज्य के कुछ हिस्सों में 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। ऐसी स्थिति में पेड़ गिरने, बिजली लाइनों को नुकसान पहुंचने और कमजोर ढांचों के प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है।

IMD Weather Alert: मध्य और पूर्वी भारत में बिजली गिरने का खतरा

मध्य प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में आंधी और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है। वहीं बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कई क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने का जोखिम बना रहेगा।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, खेतों और ऊंचे स्थानों पर जाने से बचना चाहिए। बिजली गिरने की घटनाएं इस मौसम में जानलेवा साबित हो सकती हैं।

पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में भारी बारिश का अलर्ट

पूर्वोत्तर भारत में मानसून पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कई स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

इसके अलावा केरल, ओडिशा, सिक्किम और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों के लिए भी येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार इन क्षेत्रों में 24 घंटे के दौरान 64.5 मिमी से 115.5 मिमी तक बारिश दर्ज की जा सकती है।

लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव, यातायात प्रभावित होने और स्थानीय स्तर पर जनजीवन बाधित होने की आशंका बनी हुई है।

मानसून की रफ्तार बढ़ने से किसानों को राहत

मौसम विभाग का कहना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। अगले दो से तीन दिनों में मानसून कर्नाटक के शेष हिस्सों, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और दक्षिण छत्तीसगढ़ के कई इलाकों तक पहुंच सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की यह प्रगति खरीफ फसलों की बुवाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। समय पर बारिश होने से किसानों को राहत मिलेगी और कृषि गतिविधियों में तेजी आएगी।

उत्तर-पश्चिम भारत में बढ़ेगा तापमान

जहां एक ओर कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रहेगा, वहीं उत्तर-पश्चिम भारत में गर्मी फिर से जोर पकड़ सकती है। आईएमडी के अनुसार 18 जून तक अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि दर्ज की जा सकती है।

हालांकि देश के अधिकांश अन्य हिस्सों में तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं जताई गई है।

महाराष्ट्र, ओडिशा और गोवा में उमस करेगी परेशान

महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में लू जैसी परिस्थितियां बनने की संभावना है। वहीं ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश, कोंकण और गोवा में गर्म और उमस भरा मौसम लोगों की परेशानी बढ़ा सकता है।

मौसम विभाग ने लोगों को पर्याप्त पानी पीने, सीधी धूप से बचने और दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की सलाह दी है।

अगले कुछ दिन मौसम के लिहाज से अहम

देशभर में मौसम की मौजूदा तस्वीर बताती है कि आने वाले दिनों में कहीं तेज बारिश राहत देगी, कहीं तूफानी हवाएं चुनौती बनेंगी और कहीं बढ़ती गर्मी लोगों को परेशान करेगी। ऐसे में IMD Weather Alert और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा, ताकि बदलते मौसम के प्रभाव से सुरक्षित रहा जा सके।

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