नई दिल्ली|28 जून 2026: देश में अवैध घुसपैठ पर व्यापक स्तर पर कार्रवाई की तैयारी तेज हो गई है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (DGP) की अहम बैठक 9 जुलाई को नई दिल्ली में बुलाई है। बैठक का उद्देश्य केवल अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजना ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़े पूरे नेटवर्क और आर्थिक तंत्र पर भी एक साथ कार्रवाई की रणनीति तैयार करना है।
अवैध घुसपैठिया के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर बनेगी संयुक्त रणनीति
गृह मंत्रालय के अनुसार, बैठक में सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशक, खुफिया ब्यूरो (IB), रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW), प्रवर्तन निदेशालय (ED), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) सहित अन्य केंद्रीय एजेंसियों के प्रमुख शामिल होंगे। बैठक में राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, अवैध घुसपैठियों की पहचान, सत्यापन, उनके प्रत्यावर्तन और उन्हें संरक्षण देने वाले नेटवर्क के खिलाफ समन्वित कार्रवाई पर विस्तार से चर्चा होगी।
यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब गृह मंत्रालय सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ-साथ देश के बड़े शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में भी अवैध घुसपैठ की चुनौती को गंभीर सुरक्षा मुद्दे के रूप में देख रहा है।
सीमावर्ती इलाकों से निकलकर देशभर तक पहुंच रहा नेटवर्क
सरकारी आकलन के अनुसार, अवैध घुसपैठ अब केवल सीमा से जुड़े जिलों तक सीमित नहीं रह गई है। सीमा पार करने के बाद कई घुसपैठियों को संगठित नेटवर्क के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों, विशेषकर महानगरों और औद्योगिक शहरों तक पहुंचाया जाता है। वहां उन्हें फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने और बसाने के मामलों की भी जांच एजेंसियों के सामने जानकारी आई है।
ऐसे में केवल किसी एक राज्य में कार्रवाई करने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं माना जा रहा। यदि एक राज्य में कार्रवाई होती है तो कई बार संदिग्ध दूसरे राज्यों में चले जाते हैं। इसी चुनौती को देखते हुए पूरे देश में एक साथ अभियान चलाने की योजना बनाई जा रही है।
फर्जी दस्तावेज और आर्थिक नेटवर्क पर भी होगी कार्रवाई
बैठक में उन संगठित गिरोहों पर भी विशेष फोकस रहेगा जो कथित तौर पर सीमा पार कराने, फर्जी पहचान पत्र तैयार कराने और अवैध रूप से लोगों को विभिन्न राज्यों में बसाने का काम करते हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस नेटवर्क की आर्थिक जड़ें मजबूत हैं और इसे तोड़े बिना समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं होगा।
इसी क्रम में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अवैध घुसपैठ से जुड़े मामलों में अर्जित कथित अवैध संपत्तियों की पहचान कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। वहीं खुफिया एजेंसियां राज्यों की पुलिस को आवश्यक इनपुट उपलब्ध कराएंगी ताकि अभियान अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके।
पहले ही बन चुकी है उच्चाधिकार प्राप्त जनसांख्यिकी बदलाव समिति
केंद्र सरकार इस विषय पर पहले ही उच्चाधिकार प्राप्त जनसांख्यिकी बदलाव समिति का गठन कर चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष 15 अगस्त को लालकिले से अपने संबोधन में अवैध घुसपैठ और सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसांख्यिकी बदलाव को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए विशेष मिशन शुरू करने की घोषणा की थी।
इसके बाद गृह मंत्री अमित शाह ने समिति को सीमावर्ती जिलों के अलावा महानगरों और औद्योगिक शहरों का भी दौरा कर जमीनी स्थिति का विस्तृत अध्ययन करने के निर्देश दिए थे।
एक वर्ष में सौंपनी होगी रिपोर्ट
26 मई को सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश प्रभावर नावलेकर की अध्यक्षता में गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति को एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपनी है। माना जा रहा है कि समिति की सिफारिशें भविष्य की नीति और कार्रवाई की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
9 जुलाई को प्रस्तावित बैठक को इसी व्यापक अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है, जिसमें देशभर में अवैध घुसपैठ से जुड़े मामलों पर एक समान और समन्वित कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जाएगी।











