03 जुलाई 2026|नई दिल्ली: अमरनाथ यात्रा 2026 के शुभारंभ के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के श्रद्धालुओं के नाम एक भावनात्मक पत्र जारी किया। उन्होंने बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रवाना होने वाले श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए सुरक्षित यात्रा करने, पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखने और पांच महत्वपूर्ण संकल्प लेने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि अमरनाथ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता, सेवा भावना और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक भी है।
अमरनाथ यात्रा 2026: श्रद्धालुओं से पांच संकल्प लेने की अपील
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि ज्येष्ठ पूर्णिमा पर प्रथम पूजा के साथ बाबा अमरनाथ की पवित्र यात्रा का शुभारंभ होता है और हर वर्ष देश के अलग-अलग राज्यों से लाखों श्रद्धालु इस आध्यात्मिक यात्रा में शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं से जुड़े लोग जब एक ही श्रद्धा के साथ बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए निकलते हैं, तो भारत की ‘विविधता में एकता’ की भावना और अधिक मजबूत होती है।
प्रधानमंत्री ने यात्रा के सफल संचालन में जुटे श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड, जम्मू-कश्मीर प्रशासन, भारतीय सेना, सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस, आईटीबीपी, बीएसएफ, एनडीआरएफ, चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों, सफाई कर्मचारियों और स्वयंसेवकों के समर्पण की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इन सभी के अथक प्रयासों से लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो पाती है।
श्रद्धालुओं से लिए जाने वाले पांच प्रमुख संकल्प
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पत्र में श्रद्धालुओं से पांच महत्वपूर्ण संकल्प अपनाने का आग्रह किया।
पहला, यात्रा मार्ग पर स्वच्छता बनाए रखें और कहीं भी कचरा या गंदगी न फैलाएं।
दूसरा, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का पूरी गंभीरता से पालन करें। उन्होंने विशेष रूप से बारिश, ठंड और ऊंचाई वाले क्षेत्रों की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी।
तीसरा, ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को बढ़ावा देते हुए उन्होंने अपील की कि यात्रा पर होने वाले कुल खर्च का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा जम्मू-कश्मीर के स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प की खरीद पर खर्च किया जाए। उनका कहना था कि इससे स्थानीय व्यापार और लोगों की आजीविका को मजबूती मिलेगी।
चौथा, रक्षाबंधन के अवसर पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण करने का संकल्प लें, ताकि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दिया जा सके।
पांचवां, ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को जीवन में अपनाते हुए अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें और देशहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
अमरनाथ यात्रा 2026 को सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताया
प्रधानमंत्री ने कहा कि अमरनाथ यात्रा केवल भगवान शिव के दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति के सेवा, समर्पण और भाईचारे की अनूठी मिसाल भी है। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान जम्मू-कश्मीर के स्थानीय लोग श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत करते हैं, जबकि देशभर से आने वाले स्वयंसेवक लंगर और भंडारों के माध्यम से निःस्वार्थ सेवा का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। यही परंपरा भारत की सनातन संस्कृति और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के आदर्श को मजबूत बनाती है।
सुरक्षित यात्रा के लिए दी महत्वपूर्ण सलाह
प्रधानमंत्री मोदी ने श्रद्धालुओं से अपील की कि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें। मौसम संबंधी चेतावनियों पर लगातार नजर रखें और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों और प्रशासन का एकमात्र उद्देश्य प्रत्येक श्रद्धालु की यात्रा को सुरक्षित, सुगम और सफल बनाना है। ऐसे में सभी यात्रियों का सहयोग भी उतना ही आवश्यक है।
पत्र के अंत में दिया शुभकामना संदेश
अपने संदेश के समापन पर प्रधानमंत्री ने बाबा बर्फानी से सभी श्रद्धालुओं के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अमरनाथ यात्रा 2026 आस्था, सेवा, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रभक्ति का प्रेरक उत्सव बनेगी तथा प्रत्येक श्रद्धालु सुरक्षित यात्रा पूरी कर आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ अपने घर लौटेगा।











