नई दिल्ली/03 जुलाई 2026: खरीफ सीजन के बीच देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश ने केंद्र सरकार की चिंता बढ़ा दी है। सूखे की आशंका को देखते हुए केंद्र ने वर्षा की कमी वाले 262 जिलों पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है। शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उच्चस्तरीय बैठक कर हालात की समीक्षा की और संभावित संकट से निपटने की तैयारियों का आकलन किया।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि यदि आने वाले दिनों में बारिश का लंबा अंतराल बना रहता है तो किसानों को समय पर कृषि ऋण, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और जिला स्तर पर तैयार आकस्मिक योजनाओं का लाभ बिना किसी देरी के उपलब्ध कराया जाए। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मौसम की मार का असर किसानों की आजीविका पर कम से कम पड़े।
सूखे की आशंका के बीच 262 जिलों की हो रही लगातार निगरानी
कृषि मंत्रालय की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि जिन 262 जिलों में वर्षा की कमी दर्ज की गई थी, उनमें से हाल की बारिश के बाद 52 जिलों की स्थिति में कुछ सुधार हुआ है। इसके बावजूद 210 जिले अब भी सामान्य से कम वर्षा की चुनौती का सामना कर रहे हैं।
इनमें आठ ऐसे जिले भी शामिल हैं, जहां अब तक सामान्य स्तर की बारिश नहीं हुई है। यही वजह है कि फसलों की स्थिति, खेतों में नमी और मौसम के बदलते रुझानों की लगातार निगरानी की जा रही है। कृषि मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि बारिश में और देरी होती है तो खरीफ फसलों पर दबाव बढ़ सकता है।
अल नीनो के प्रभाव पर भी केंद्र की पैनी नजर
बैठक में संभावित अल नीनो प्रभाव की भी समीक्षा की गई। जिन राज्यों में वर्षा की कमी अधिक दर्ज की गई है, वहां संबंधित मुख्यमंत्रियों के साथ अलग से बैठक कर राहत और तैयारी की समीक्षा करने की योजना बनाई गई है।
जिला प्रशासन को वैकल्पिक फसलों की बुवाई, दोबारा बुवाई (री-सोइंग) और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप आकस्मिक कृषि योजनाओं को सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसानों को नुकसान कम से कम हो।
फसल बीमा, कृषि ऋण और आकस्मिक योजनाओं को मिलेगा प्राथमिकता
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि संभावित सूखे की स्थिति में सबसे अधिक ध्यान किसानों की आर्थिक सुरक्षा पर रहेगा। इसके लिए प्रभावित क्षेत्रों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड और कृषि ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
जिला स्तर पर पहले से तैयार आकस्मिक योजनाओं को जरूरत पड़ने पर तत्काल लागू किया जाएगा, जिससे खेती का काम पूरी तरह प्रभावित न हो और किसानों को समय रहते वैकल्पिक समाधान मिल सके।
अगले कुछ दिनों में कई राज्यों में बढ़ सकती है बारिश
बैठक में मौसम विभाग के पूर्वानुमान का भी उल्लेख किया गया। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण अगले दो से तीन दिनों में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां तेज होने की संभावना जताई गई है।
हालांकि अधिकारियों ने यह भी कहा कि पूरे मानसून सीजन के दौरान सामान्य से कम वर्षा की आशंका अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। उत्तर गुजरात में वर्षा की कमी और महाराष्ट्र के जलाशयों में घटता जलस्तर चिंता का विषय बना हुआ है।
जलाशयों की स्थिति पर नजर, बीज और उर्वरकों का पर्याप्त भंडार
सरकार के अनुसार देश के 166 प्रमुख जलाशयों में पिछले वर्ष की तुलना में पानी का स्तर कम है, हालांकि अधिकांश क्षेत्रों में भूजल की स्थिति फिलहाल संतोषजनक बनी हुई है।
राहत की बात यह है कि किसानों के लिए बीज और उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। अप्रैल से जून के बीच जहां 176.13 लाख टन उर्वरकों की आवश्यकता का अनुमान था, वहीं 286.37 लाख टन उर्वरक उपलब्ध हैं। इसके अलावा 15 राज्यों ने सूखे जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान और कृषि विज्ञान केंद्रों को भी तकनीकी सहायता के लिए सक्रिय रखा गया है।
सरकार का कहना है कि सूखे की आशंका को देखते हुए निगरानी, राहत योजनाओं और कृषि सहायता तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है, ताकि मौसम की अनिश्चितता के बीच किसानों के हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा की जा सके।











