नई दिल्ली/06 जुलाई 2026: भारत और इंडोनेशिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन दिवसीय इंडोनेशिया यात्रा बेहद अहम मानी जा रही है। इस दौरान दोनों देशों के बीच डिजिटल भुगतान, रक्षा सहयोग, महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स), स्वास्थ्य, समुद्री सुरक्षा और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। यह दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को गति देगा, बल्कि व्यापार, निवेश और पर्यटन के नए अवसर भी खोलेगा।
पीएम मोदी की इंडोनेशिया यात्रा में किन-किन मुद्दों पर होगी अहम चर्चा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांटो के बीच 7 जुलाई को होने वाली शिखर वार्ता में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर चर्चा होगी। इनमें सबसे प्रमुख भारत की यूपीआई (UPI) और इंडोनेशिया की क्यूआरआईएस (QRIS) डिजिटल भुगतान प्रणाली के बीच लिंकेज स्थापित करना है।
इस व्यवस्था के लागू होने के बाद बाली समेत इंडोनेशिया के प्रमुख पर्यटन स्थलों की यात्रा करने वाले भारतीय पर्यटक आसानी से डिजिटल भुगतान कर सकेंगे। वहीं, दोनों देशों के बीच कारोबार करने वाले व्यापारियों के लिए भी भुगतान प्रक्रिया पहले से अधिक तेज, सरल और कम लागत वाली हो जाएगी।
ओएनडीसी मॉडल से प्रेरित है इंडोनेशिया का डिजिटल नेटवर्क
भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल का प्रभाव अब इंडोनेशिया में भी दिखाई दे रहा है। भारत के ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) से प्रेरित होकर इंडोनेशिया ने अपना इंडोनेशिया ओपन नेटवर्क (ION) विकसित किया है।
बताया जा रहा है कि 7 जुलाई को दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में आईओएन का पहला लाइव ट्रांजेक्शन भी किया जाएगा। इससे करीब 6.5 करोड़ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को कम लागत वाला डिजिटल मार्केटप्लेस उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
भारत के डिजिटल मॉडल से सीख रहा है इंडोनेशिया
इंडोनेशिया सरकार भारत के आधार, यूपीआई, डिजिलॉकर और ई-केवाईसी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्रेरित होकर अपनी महत्वाकांक्षी डिजिटल नुसंतरा पहल को आगे बढ़ा रही है। भारतीय कंपनियां भी इंडोनेशिया के आधुनिक डिजिटल फ्रेमवर्क के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। अब दोनों देश केवल तकनीकी अनुभव साझा करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संस्थागत सहयोग को भी मजबूत बना रहे हैं।
स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में भी बढ़ेगा सहयोग
भारत की पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना से प्रेरित होकर इंडोनेशिया ने फ्री न्यूट्रिशियस मील्स प्रोग्राम लागू किया है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए भारत के जन औषधि मॉडल को भी अपनाने पर चर्चा जारी है। इससे दोनों देशों के बीच सामाजिक विकास से जुड़े क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ने की संभावना है।
रक्षा सहयोग को मिलेगी नई गति
भारत और इंडोनेशिया रक्षा क्षेत्र में भी साझेदारी को मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा विनिर्माण, तकनीक हस्तांतरण, सैन्य प्रशिक्षण और समुद्री सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत भारत के रक्षा उत्पादन के अनुभव को साझा करने पर चर्चा होगी। इसके साथ ही ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली, संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्षमता निर्माण जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल रहेंगे।
क्रिटिकल मिनरल्स पर भारत की खास नजर
इंडोनेशिया दुनिया में निकल समेत कई महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा उत्पादक देश है। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण और आधुनिक विनिर्माण उद्योग के लिए बेहद आवश्यक माने जाते हैं।
फिलहाल इंडोनेशिया इन खनिजों का बड़ा हिस्सा कच्चे रूप में निर्यात करता है, लेकिन अब वह घरेलू स्तर पर मूल्य संवर्धन बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। भारत, जो अपनी औद्योगिक और हरित ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए क्रिटिकल मिनरल्स की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहता है, इस क्षेत्र में इंडोनेशिया के साथ दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा साझेदारी और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग भविष्य में भारत-इंडोनेशिया संबंधों को और अधिक मजबूत बना सकता है।












