नई दिल्ली/06 अगस्त 2026: दवा उद्योग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में अहम संशोधन किया है। अब यदि कोई दवा कंपनी या आवेदक रेगुलेटरी मंजूरी के लिए आवेदन करते समय फर्जी, मनगढ़ंत या गलत डेटा जमा करता है, तो उसका आवेदन केवल खारिज ही नहीं होगा, बल्कि उसे एक तय अवधि तक नए आवेदन करने से भी रोका जा सकेगा। सरकार का मानना है कि यह कदम दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और देश की दवा नियामक व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
क्या है ड्रग्स रूल्स में नया बदलाव?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जीएसआर 756(ई) के तहत अधिसूचित संशोधन जारी करते हुए बताया कि औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 (Drugs and Cosmetics Act, 1940) के मौजूदा प्रावधानों के साथ एक नया प्रवर्तन तंत्र (Enforcement Mechanism) जोड़ा गया है।
नए नियम के तहत यदि किसी आवेदक द्वारा लाइसेंस या अन्य नियामक मंजूरी के लिए आवेदन करते समय नकली, मनगढ़ंत या भ्रामक वैज्ञानिक डेटा प्रस्तुत किया जाता है, तो संबंधित केंद्रीय या राज्य लाइसेंसिंग अथॉरिटी उसे निर्धारित अवधि तक नए आवेदन दाखिल करने से प्रतिबंधित कर सकेगी।
पहले क्या होता था, अब क्या बदलेगा?
अब तक ऐसे मामलों में संबंधित आवेदन को अस्वीकार किया जा सकता था या पहले से जारी लाइसेंस को रद्द करने की कार्रवाई की जाती थी। हालांकि संशोधित नियम लागू होने के बाद कार्रवाई का दायरा बढ़ गया है।
अब दोषी पाए जाने वाले आवेदकों पर अतिरिक्त प्रतिबंध भी लगाया जा सकेगा, जिसके तहत वे तय समय तक उसी नियामक प्राधिकरण के समक्ष कोई नया आवेदन दाखिल नहीं कर पाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे गलत जानकारी देकर मंजूरी हासिल करने की कोशिशों पर प्रभावी रोक लगेगी।
मंत्रालय ने क्या कहा?
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार यह संशोधन ड्रग्स रूल्स, 1945 के तहत दाखिल किए जाने वाले सभी प्रकार के आवेदनों पर लागू होगा।
मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि फर्जी या मनगढ़ंत डेटा रेगुलेटरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है। इससे दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठ सकते हैं और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा होने की आशंका रहती है। इसलिए नियमों को और कड़ा बनाना जरूरी था।
दवा कंपनियों की बढ़ेगी जवाबदेही
सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि दवा कंपनियों और आवेदकों में जवाबदेही बढ़ाना भी है। अब कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नियामक मंजूरी के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले सभी दस्तावेज और वैज्ञानिक प्रमाण पूरी तरह सही, सत्यापित और विश्वसनीय हों।
इससे उन दवा निर्माताओं और वितरकों को भी बढ़ावा मिलेगा जो नियामकीय मानकों का ईमानदारी से पालन करते हैं।
ग्लोबल मानकों के अनुरूप होगा भारतीय रेगुलेटरी फ्रेमवर्क
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार यह बदलाव भारत के फार्मा रेगुलेटरी सिस्टम को वैश्विक सर्वोत्तम मानकों (Global Best Practices) के अनुरूप मजबूत बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है।
सरकार का लक्ष्य दवाओं की गुणवत्ता पर भरोसा बढ़ाना, नियामकीय निगरानी को और प्रभावी बनाना तथा अनियमितताओं में शामिल संस्थाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है। इससे भारतीय फार्मा सेक्टर में पारदर्शिता, नैतिक कार्यप्रणाली और नियामकीय अनुपालन को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।











