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G20 में भारत की बड़ी पहल, जयशंकर बोले- नौवहन सुरक्षा और नाविकों की रक्षा के लिए बने सामूहिक प्रतिबद्धता

On: October 31, 2026
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G20 में भारत की बड़ी पहल, जयशंकर बोले- नौवहन सुरक्षा
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नई दिल्ली (शनिवार, 31 अक्टूबर 2026)। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी सैन्य संघर्षों का असर अब वैश्विक समुद्री व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। लाल सागर, होर्मुज जलडमरूमध्य और काला सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। इसका असर पेट्रोलियम पदार्थों, खाद्यान्न और उर्वरकों की आपूर्ति पर भी पड़ रहा है।

इसी बीच भारत ने G20 के मंच पर समुद्री मार्गों की सुरक्षा और जहाजों पर काम करने वाले नाविकों के संरक्षण का मुद्दा उठाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका के अटलांटा में आयोजित G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में कहा कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान केवल सैन्य कार्रवाई से नहीं निकलेगा। ऐसे मामलों में कूटनीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिक जहाजरानी और नाविकों पर हमलों का आर्थिक बोझ विकासशील देशों को असमान रूप से उठाना पड़ रहा है। भारत की कोशिश है कि इस विषय को दिसंबर में होने वाले G20 शिखर सम्मेलन के दौरान भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रमुख मुद्दों में शामिल किया जाए।

लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे से वैश्विक व्यापार प्रभावित

विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने संबोधन में समुद्री व्यापार के सामने पैदा हो रही चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि नागरिक जहाजों पर हमलों और समुद्री मार्गों में व्यवधान का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

लाल सागर, होर्मुज जलडमरूमध्य और काला सागर जैसे समुद्री रास्ते अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन मार्गों पर असुरक्षा बढ़ने से जहाजों का परिचालन प्रभावित होता है। माल ढुलाई महंगी होती है और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में भी बाधाएं आती हैं।

जयशंकर ने विशेष रूप से ईंधन, खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की उपलब्धता तथा कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों का सबसे अधिक और असमान असर ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों पर पड़ रहा है।

UNCLOS के तहत हमले रोकने और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने पर जोर

भारत ने समुद्री सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन को आवश्यक बताया है। जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (UNCLOS) का उल्लेख करते हुए कहा कि समुद्र में नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखना और व्यापारिक जहाजों पर हमले रोकना जरूरी है।

उन्होंने नागरिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता जताई। भारत का मानना है कि समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखना केवल व्यापारिक हितों का विषय नहीं है, बल्कि इससे जुड़े लाखों लोगों की जान और आजीविका भी दांव पर लगी है।

इस मुद्दे पर भारत अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और समुद्री व्यापार से जुड़े देशों के बीच साझा जिम्मेदारी तय करने की वकालत कर रहा है।

भारत और लाइबेरिया ने नाविकों की सुरक्षा के लिए शुरू की संयुक्त पहल

जयशंकर ने G20 बैठक में भारत और लाइबेरिया की ओर से नाविकों की सुरक्षा के लिए शुरू की गई संयुक्त पहल का भी उल्लेख किया।

दोनों देशों ने 25 सितंबर 2026 को ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेरर्स’ (GoF on S4) की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य व्यापारिक जहाजों और उन पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय समन्वय बढ़ाना है।

8 अक्टूबर को भारत और लाइबेरिया ने संयुक्त बयान जारी कर खाड़ी क्षेत्र, उसके आसपास और काला सागर में व्यापारिक जहाजों तथा नाविकों पर हुए हमलों की निंदा की थी। दोनों देशों ने ऐसे हमलों को तत्काल रोकने की मांग भी की थी।

पश्चिम एशिया संघर्ष में 22 भारतीयों की मौत, 14 नाविक शामिल

समुद्री सुरक्षा का मुद्दा भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों की जान गई है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 28 अक्टूबर 2026 को जानकारी दी थी कि पश्चिम एशिया संघर्ष में अब तक 22 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है। इनमें 14 नाविक शामिल हैं। मंत्रालय ने यह भी बताया कि सऊदी अरब में तीन भारतीय नागरिकों की जान गई है।

भारत सरकार खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले भारतीय समुदाय के संपर्क में है और उनकी सुरक्षा तथा कुशलक्षेम सुनिश्चित करने के लिए प्रयास कर रही है।

समुद्री मार्गों में असुरक्षा का असर भारत पर सीधे पड़ता है। देश की ऊर्जा जरूरतों और उर्वरक आपूर्ति का बड़ा हिस्सा समुद्री परिवहन पर निर्भर करता है। ऐसे में जहाजों पर हमले और समुद्री रास्तों में बाधा से आयात की लागत बढ़ने के साथ भारतीय नाविकों की सुरक्षा भी प्रभावित होती है।

दिसंबर में अमेरिका में होगी G20 शिखर बैठक

अमेरिका वर्ष 2026 में G20 की अध्यक्षता कर रहा है। विदेश मंत्रियों की बैठक 30 और 31 अक्टूबर को अटलांटा में आयोजित हुई, जिसकी मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की।

इसके बाद G20 नेताओं का शिखर सम्मेलन 14 और 15 दिसंबर 2026 को फ्लोरिडा के मियामी स्थित ट्रंप नेशनल डोरल में आयोजित होना निर्धारित है। इसमें सदस्य देशों के प्रमुख वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

भारत की कोशिश है कि समुद्री व्यापार की सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और नाविकों के अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा सहमति बने। हालांकि, अटलांटा की विदेश मंत्रियों की बैठक रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संघर्ष जैसे मुद्दों पर किसी संयुक्त विज्ञप्ति के बिना समाप्त हुई। इसलिए भारत की इस पहल को आगामी शिखर सम्मेलन के संदर्भ में एक प्रस्ताव और कूटनीतिक प्रयास के रूप में देखना होगा, न कि G20 की सर्वसम्मत घोषणा के रूप में।

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