24 जून 2026|लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कृषि क्षेत्र को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के लिए वैज्ञानिक शोध, नवाचार और आधुनिक तकनीकों को सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों में विकसित तकनीकों का वास्तविक मूल्य तभी है, जब उनका लाभ गांवों और खेतों तक पहुंचे तथा किसान उन्हें व्यवहारिक रूप से अपनाने में सक्षम हों।
बुधवार को लखनऊ स्थित नाबार्ड में आयोजित किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) स्तरीय कृषि चुनौतियों पर चर्चा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि किसान उत्पादक संगठनों को मजबूत बनाकर कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। एफपीओ किसानों को बेहतर बाजार, तकनीक और संसाधनों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।
किसानों तक कृषि तकनीक पहुंचाने पर दिया विशेष जोर
राज्यपाल ने कहा कि केवल शोधपत्र तैयार करना, निरीक्षण करना या सेमिनार आयोजित करना पर्याप्त नहीं है। कृषि वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को अपने नवाचारों, उपकरणों और तकनीकों का खेतों में जाकर प्रदर्शन करना चाहिए। जब किसान नई तकनीकों को अपने सामने काम करते हुए देखेंगे, तभी वे उन्हें अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान प्रयोगशालाओं से निकलकर खेतों तक पहुंचने में ही निहित है। आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती और नवाचारों का सीधा लाभ किसानों को मिले, इसके लिए संस्थानों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
जैविक खेती को बढ़ावा देने की अपील
आनंदीबेन पटेल ने कृषि विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों से भी जुड़ी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यार्थियों को अपने परिवार और गांव के खेतों में जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। इससे खेती की लागत कम होगी, मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी और किसानों को लंबे समय में लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि जैविक और प्राकृतिक खेती आज केवल विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य की आवश्यकता बनती जा रही है। ऐसे में युवाओं और कृषि संस्थानों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
शोध के प्रभाव का तैयार हो आंकड़ा
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों को निर्देश देते हुए कहा कि वे अपने शोध और तकनीकों के प्रभाव का व्यवस्थित आंकड़ा तैयार करें। इसमें यह स्पष्ट होना चाहिए कि नई तकनीकों के प्रयोग से उत्पादन में कितना बदलाव आया, कितने किसानों को लाभ मिला और खेती की उत्पादकता में कितना सुधार हुआ।
उन्होंने कहा कि ऐसी जानकारी सरकार के लिए भी उपयोगी होगी, जिससे भविष्य की कृषि नीतियों और योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
जलवायु परिवर्तन और जल संरक्षण पर भी चिंता
अपने संबोधन के दौरान राज्यपाल ने गुजरात में अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र आज कई नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। जलवायु परिवर्तन, भूमि की घटती उर्वरता, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और कृषि उत्पादों के विपणन जैसे विषयों पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना समय की मांग है।
उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मूल्य संवर्धन और बेहतर बाजार व्यवस्था पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।
एफपीओ उत्पादों का किया अवलोकन
कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने एफपीओ की चुनौतियों, उन्नत कृषि तकनीकों, मूल्य संवर्धन, जैविक एवं प्राकृतिक खेती तथा जल संरक्षण के विभिन्न उपायों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान राज्यपाल ने कार्यक्रम स्थल पर प्रदर्शित एफपीओ उत्पादों और कृषि उपज का अवलोकन भी किया।
कार्यक्रम में राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी डॉ. सुधीर महादेव बोबडे, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक पंकज कुमार सहित कृषि क्षेत्र से जुड़े कई विशेषज्ञ और अधिकारी उपस्थित रहे।








