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महिला आरक्षण पर गरजे अमित शाह: ‘महिलाओं को न्याय दिलाएगी सरकार’, तमिलनाडु में तेज हुई चुनावी सियासत

On: April 19, 2026
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महिला आरक्षण पर गरजे अमित शाह
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इरोड (तमिलनाडु), 19 अप्रैल 2026 — दक्षिण भारत की सियासत में इस वक्त महिला आरक्षण का मुद्दा केंद्र में आ गया है। इरोड में आयोजित एक चुनावी जनसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और डीएमके पर तीखा हमला बोला।

उन्होंने कहा कि लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल का विरोध करके इन दलों ने “देश की महिलाओं के साथ विश्वासघात” किया है। शाह के भाषण में एक तरफ राजनीतिक आरोप थे, तो दूसरी तरफ महिलाओं को अधिकार दिलाने का भरोसा भी।

‘विपक्ष की साजिश सफल नहीं होने देंगे’

सभा में बोलते हुए अमित शाह ने साफ शब्दों में कहा कि केंद्र की Narendra Modi सरकार महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, “कुछ पार्टियां महिलाओं को उनका अधिकार मिलने से रोकना चाहती हैं, लेकिन हम उनकी साजिश सफल नहीं होने देंगे।”

शाह ने यह भी जोड़ा कि सरकार का उद्देश्य राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है, ताकि निर्णय प्रक्रिया में उनका योगदान मजबूत हो सके।

तमिलनाडु की राजनीति पर सीधा निशाना

महिला आरक्षण के मुद्दे के साथ-साथ अमित शाह ने राज्य की राजनीति पर भी खुलकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा और एआईएडीएमके गठबंधन की सरकार बनती है, तो तमिलनाडु में भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई होगी और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा।

उन्होंने सत्ताधारी डीएमके पर आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था और शासन दोनों कमजोर हुए हैं, जिससे आम जनता परेशान है।

परिवारवाद पर DMK को घेरा

अपने भाषण में अमित शाह ने डीएमके पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी की राजनीति एक ही परिवार के इर्द-गिर्द घूमती रही है।

उन्होंने इशारों में M. Karunanidhi, M. K. Stalin और उनके परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि यह प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।

उनका कहना था कि लोकतंत्र में अवसर सभी को मिलना चाहिए, न कि सिर्फ एक ही परिवार तक सीमित रहना चाहिए।

‘राज्य में भाजपा को मिल रहा समर्थन’

अमित शाह ने दावा किया कि तमिलनाडु में भाजपा को लगातार जनता का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे भाजपा उम्मीदवारों को भारी मतों से विजयी बनाएं, ताकि राज्य में “नई राजनीतिक दिशा” दी जा सके।

उनके अनुसार, यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि शासन की गुणवत्ता बदलने का भी मौका है।

चुनाव में क्यों अहम बन गया महिला आरक्षण मुद्दा?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार महिला आरक्षण सिर्फ एक नीति नहीं, बल्कि चुनावी बहस का केंद्रीय मुद्दा बन गया है।

  • महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का सवाल
  • संसद और विधानसभा में प्रतिनिधित्व
  • सामाजिक न्याय और समानता

इन सभी पहलुओं को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।

जमीनी सियासत में बढ़ी गर्मी

इरोड की यह रैली सिर्फ एक चुनावी कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि यह संकेत भी था कि आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति और ज्यादा गरमाने वाली है।

एक तरफ महिला अधिकारों की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। अब देखना यह होगा कि जनता इस बहस को किस नजर से देखती है और चुनावी नतीजों में इसका कितना असर पड़ता है।

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