14 जून 2026|नई दिल्ली: संसद की सियासत में इन दिनों संख्या बल को लेकर चर्चाएं तेज हैं। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ताकत बढ़ने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। खासकर राज्यसभा में एनडीए दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंचता दिखाई दे रहा है। हालांकि लोकसभा में तस्वीर अभी उतनी आसान नहीं है और संवैधानिक संशोधनों के लिए जरूरी आंकड़ा गठबंधन से काफी दूर बना हुआ है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि टीएमसी के कुछ सांसदों के इस्तीफों और संभावित राजनीतिक बदलावों का सीधा असर संसद के दोनों सदनों की संख्या पर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में संसद का गणित काफी दिलचस्प रहने वाला है।
NDA बहुमत गणित: राज्यसभा में कैसे मजबूत हो सकता है गठबंधन?
मौजूदा स्थिति में राज्यसभा में एनडीए के पास 148 सांसद हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार झारखंड और मिजोरम में हो रहे राज्यसभा चुनावों के बाद गठबंधन को तीन अतिरिक्त सीटें मिल सकती हैं। इससे एनडीए की संख्या बढ़कर 151 हो जाएगी।
इसके अलावा टीएमसी के तीन सांसदों के इस्तीफे और बाद में होने वाले उपचुनावों में पश्चिम बंगाल की इन सीटों पर जीत की संभावना को जोड़ें तो एनडीए का आंकड़ा 154 तक पहुंच सकता है।
राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 सांसदों की आवश्यकता होती है। ऐसे में यदि टीएमसी के कुछ और सांसद इस्तीफा देते हैं या राजनीतिक समीकरण बदलते हैं, तो एनडीए इस महत्वपूर्ण आंकड़े तक पहुंच सकता है। यही कारण है कि उच्च सदन का मौजूदा गणित सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
नवंबर में बदल सकता है राज्यसभा का समीकरण
हालांकि यह बढ़त स्थायी नहीं मानी जा रही। नवंबर 2026 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के 10 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होना है। राज्य विधानसभा में समाजवादी पार्टी की मजबूत स्थिति को देखते हुए माना जा रहा है कि उसे कुछ अतिरिक्त सीटें मिल सकती हैं।
ऐसी स्थिति में एनडीए की संख्या में फिर कमी आ सकती है और वर्तमान लाभ का कुछ हिस्सा कम हो सकता है। इसलिए सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए आने वाले महीनों का राजनीतिक प्रबंधन काफी महत्वपूर्ण रहेगा।
विपक्षी खेमे की स्थिति क्या है?
वर्तमान में विपक्षी इंडी (INDIA) गठबंधन के पास राज्यसभा में 64 सांसद बताए जा रहे हैं। इस संख्या में कमी का एक बड़ा कारण यह है कि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और आम आदमी पार्टी (आप) ने खुद को इस समूह से अलग कर लिया है।
इसके अलावा कुछ क्षेत्रीय दल ऐसे हैं जो किसी भी मुद्दे पर स्वतंत्र रुख अपना सकते हैं। इनमें वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी), बीजू जनता दल (बीजेडी) और एमडीएमके जैसी पार्टियां शामिल हैं। संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों के दौरान इन दलों की भूमिका निर्णायक बन सकती है।
लोकसभा में अभी भी दूर है दो-तिहाई बहुमत
जहां राज्यसभा में एनडीए मजबूत स्थिति की ओर बढ़ता दिख रहा है, वहीं लोकसभा में तस्वीर अलग है। राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार यदि टीएमसी के कुछ सांसद अलग समूह बनाकर एनडीए को समर्थन देते हैं तो गठबंधन की संख्या बढ़कर लगभग 213 तक पहुंच सकती है।
हालांकि लोकसभा में किसी संवैधानिक संशोधन को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 363 सांसदों का है। इस लिहाज से एनडीए अभी भी आवश्यक संख्या से काफी पीछे है।
सूत्रों के मुताबिक टीएमसी से अलग होने की तैयारी कर रहे कुछ सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सकते हैं और अलग समूह बनाने संबंधी पत्र सौंप सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो संसद की राजनीतिक तस्वीर में नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
संसद की राजनीति में बढ़ी संख्या बल की अहमियत
आने वाले समय में संसद के भीतर संख्या बल सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार साबित हो सकता है। राज्यसभा में एनडीए की बढ़ती ताकत उसे महत्वपूर्ण विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है, जबकि लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत का लक्ष्य अभी भी चुनौती बना हुआ है।
यही वजह है कि टीएमसी में संभावित टूट और राज्यसभा चुनावों के नतीजों पर राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हुई हैं। संसद का यह नंबर गेम आने वाले महीनों में राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।











