नई दिल्ली (Wed, 22 Oct 2025) – रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने बुधवार को स्पष्ट किया कि युद्ध अब केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि यह हाइब्रिड और विषम रूप में बदल चुका है, और पारंपरिक रणनीतियाँ अब पूरी तरह प्रभावी नहीं हैं।
वे बुधवार को लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राज शुक्ला और मेजर जनरल इयान कार्डोजो की पुस्तकों के विमोचन समारोह में उपस्थित थे। इस अवसर पर उन्होंने Operation Sindoor की उल्लेखनीय सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान इसने अभी तक भुलाया नहीं है।
Operation Sindoor – तीनों सेनाओं का असाधारण समन्वय
रक्षा मंत्री ने कहा, “Operation Sindoor के दौरान हमने भारतीय थल, नौसेना और वायु सेना के बीच असाधारण तालमेल और एकीकरण देखा। इस अभियान ने दुश्मन को गंभीर झटका दिया और वह आज भी इस चोट को नहीं भूल पाया।” उन्होंने यह भी जोर दिया कि भविष्य की सुरक्षा रणनीति के लिए सेना में किए गए साहसी और निर्णायक सुधार अहम हैं।
नागरिक-सैन्य तालमेल – राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव
कार्यक्रम में मौजूद सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने नागरिक और सैन्य तालमेल की अहमियत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “तीनों सेनाओं के बीच सामंजस्य बनाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद आवश्यक है। नागरिक और सैन्य तालमेल का महत्व केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय रणनीति और सुरक्षा के हर पहलू में जरूरी है।”
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी नागरिक-सैन्य तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि सामूहिक सुरक्षा की नींव इसी तालमेल पर टिकी है।
भविष्य की रणनीति और सुरक्षा सुधार
रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने भविष्य के खतरे और बदलते युद्ध के स्वरूप को देखते हुए सशस्त्र बलों में कई निर्णायक सुधार किए हैं। इन सुधारों में सीडीएस (Chief of Defence Staff) पद की स्थापना भी शामिल है, जो तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करता है।













