लखनऊ/04 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश में बारिश और बाढ़ की मुश्किलें अभी थमती नजर नहीं आ रही हैं। अवध से लेकर पूर्वांचल और बुंदेलखंड तक कई इलाकों में नदियों का जलस्तर लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। यूपी में बाढ़ के बीच सरयू नदी कई जिलों में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि लखीमपुर में शारदा नदी का जलस्तर कुछ कम होने के बावजूद अब भी खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है।
लगातार जलभराव और नदियों के उफान के कारण कई जिलों के दर्जनों गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन और राहत दल लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
यूपी में बाढ़: अयोध्या और बाराबंकी में सरयू ने बढ़ाई चिंता
अयोध्या में सरयू नदी खतरे के निशान से करीब 20 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। नदी के आसपास के इलाकों में प्रशासन की निगरानी बढ़ाई गई है और प्रभावित लोगों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
बाराबंकी में एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से 23 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया। इससे तटवर्ती करीब दो दर्जन गांवों में तीसरी बार बाढ़ का पानी पहुंच गया है। रामनगर, हैदरगढ़, नवाबगंज और सिरौलीगौसपुर क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश ने पहले से बनी मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।
कई ग्रामीणों को तटबंधों पर तिरपाल डालकर दिन-रात गुजारना पड़ रहा है। बाढ़ का पानी केवल घरों तक नहीं पहुंचा है, बल्कि खेतों और पशुओं के चारे पर भी इसका असर पड़ा है।
अंबेडकरनगर में भी सरयू खतरे के निशान से करीब 20 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। आलापुर और टांडा क्षेत्र के 34 गांव बाढ़ से घिरे हुए हैं। मऊ और आजमगढ़ में भी नदी के तेवर फिलहाल राहत देने वाले नहीं हैं।
लखीमपुर में शारदा नदी का जलस्तर घटा, खतरा बरकरार
लखीमपुर खीरी में बनबसा बैराज से पानी का डिस्चार्ज कम होने के बाद शारदा नदी के जलस्तर में करीब 25 सेंटीमीटर की कमी आई है। इसके बावजूद नदी खतरे के निशान से एक सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
तिकुनिया-खैरटिया क्षेत्र में मोहाना नदी का तेज बहाव बांध के लिए चुनौती बना हुआ है। निघासन, फूलबेहड़ और ईसानगर क्षेत्र के दर्जनों गांवों में हालात ऐसे हैं कि नाव ही आवागमन का प्रमुख साधन बची है।
इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। खेतों में खड़ी फसल प्रभावित है और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना भी ग्रामीणों के सामने बड़ी समस्या बन गया है।
गंगा-बेतवा ने भी बढ़ाई मुश्किल
कानपुर मंडल और आसपास के क्षेत्रों में गंगा के साथ बेतवा नदी का जलस्तर भी परेशानी बढ़ा रहा है। फर्रुखाबाद में गंगा का पानी बढ़ने से 62 गांव फिर से बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। नदी के कटान की रफ्तार तेज होने से कई मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है।
उरई में बांधों से पानी छोड़े जाने के बाद बेतवा का जलस्तर बढ़ा है। महोबा में 150 से अधिक गांवों का संपर्क प्रभावित बताया गया है। ऐसे में बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाकों में भी आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर मुश्किलें बनी हुई हैं।
वाराणसी में गंगा का जलस्तर घटा, लेकिन घाट अब भी डूबे
पूर्वांचल के कुछ जिलों में नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे नीचे आने लगा है, लेकिन इससे तत्काल राहत की स्थिति नहीं बनी है। वाराणसी में गंगा के जलस्तर में करीब छह सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद शहर के सभी प्रमुख घाट पानी में डूबे हुए हैं।
बाढ़ का असर नाविकों, दुकानदारों और घाट से जुड़े दूसरे कारोबार पर भी पड़ा है। उधर, वरुणा नदी के उफान के कारण सारनाथ क्षेत्र के कई घरों में पानी भर गया है। एक हजार से अधिक लोगों के राहत शिविरों में रहने की जानकारी है।
गाजीपुर में गंगा अभी भी खतरे के निशान से करीब 55 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। वहीं बलिया, मीरजापुर और भदोही में जलस्तर में कमी आने से लोगों को कुछ राहत की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन अभी सामान्य नहीं हुआ है।
राहत की उम्मीद, लेकिन चुनौती अभी बरकरार
प्रदेश के कुछ हिस्सों में नदियों का पानी उतरना शुरू हुआ है, लेकिन कई इलाकों में सरयू, गंगा और दूसरी नदियों का जलस्तर अभी भी चिंता का कारण बना हुआ है। खासकर उन गांवों में हालात कठिन हैं जहां बार-बार पानी पहुंचने से लोग सुरक्षित ठिकानों पर रहने को मजबूर हैं।
फिलहाल प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री और जरूरी सुविधाएं पहुंचाना, तो दूसरी ओर तटबंधों और संवेदनशील इलाकों पर लगातार निगरानी बनाए रखना। बारिश और नदियों के जलस्तर में अगले कुछ दिनों में होने वाला बदलाव ही तय करेगा कि प्रदेश के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कितनी जल्दी स्थायी रूप ले पाती है।











