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पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के आदेश पर रोक, यूपी सरकार से मांगा जवाब

On: June 26, 2026
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पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के आदेश पर रोक
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प्रयागराज/26 जून 2026: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टालने और ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के राज्य सरकार के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन कानूनी प्रावधानों के आधार पर यह आदेश जारी किए गए, उन्हें पहले ही असंवैधानिक घोषित किया जा चुका है। कोर्ट ने सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर देते हुए चेतावनी दी है कि संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ सकता है।

पंचायत चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए 25 और 26 मई 2026 को जारी सरकारी आदेशों पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि इन आदेशों के जरिए पंचायत चुनाव टालने और ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए रखने का निर्णय ऐसे प्रावधान के तहत लिया गया, जिसे पहले ही असंवैधानिक घोषित किया जा चुका है।

कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 12(3-ए) के आधार पर जारी आदेशों का कोई संवैधानिक आधार नहीं बचता, क्योंकि इस प्रावधान को ‘प्रमोद लाल पटेल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ पहले ही निरस्त कर चुकी है।

संविधान के अनुसार समय पर होना चाहिए पंचायत चुनाव

सुनवाई के दौरान अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-के का उल्लेख करते हुए कहा कि पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष का निश्चित है और निर्धारित समय के भीतर चुनाव कराना संवैधानिक दायित्व है। अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का संचालन अस्थायी व्यवस्थाओं के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।

राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव में देरी का कारण अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग की रिपोर्ट लंबित होना बताया। इस पर अदालत ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए पूछा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद आयोग अब तक अपनी रिपोर्ट क्यों प्रस्तुत नहीं कर पाया।

राज्य चुनाव आयोग बोला- हम तैयार, लेकिन सरकार से नहीं मिला सहयोग

सुनवाई के दौरान राज्य चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि 10 जून 2026 को मतदाता सूची प्रकाशित की जा चुकी है और आयोग चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से आवश्यक प्रशासनिक और लॉजिस्टिक सहयोग उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

इस टिप्पणी के बाद अदालत ने संकेत दिया कि यदि चुनाव आयोग तैयार है तो चुनाव टालने के कारणों का स्पष्ट और ठोस आधार सरकार को बताना होगा।

ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए रखने से किया इनकार

हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में बनाए रखने की व्यवस्था पर भी रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि असंवैधानिक घोषित किए जा चुके प्रावधानों के आधार पर किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था को जारी नहीं रखा जा सकता।

कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई से पहले विस्तृत हलफनामा दाखिल करे। इसमें ओबीसी आयोग की वर्तमान स्थिति, रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समय-सीमा और पंचायत चुनाव कराने का स्पष्ट कार्यक्रम बताया जाए।

13 जुलाई को होगी अगली सुनवाई, अधिकारी को बुलाने की चेतावनी

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य सरकार संतोषजनक जवाब दाखिल नहीं करती है तो 25 मई 2026 का आदेश जारी करने वाले संबंधित अधिकारी को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताना होगा कि असंवैधानिक प्रावधानों के आधार पर आदेश क्यों जारी किए गए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि निर्देशों का पालन नहीं हुआ तो इसे प्रथम दृष्टया अवमानना का मामला माना जा सकता है। इस प्रकरण की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को दोपहर 2 बजे निर्धारित की गई है, जिस पर अब पंचायत चुनाव की दिशा और सरकार की अगली रणनीति पर सभी की नजरें रहेंगी।

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