मथुरा/4 सितंबर 2026। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार सुबह मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंचे। सुबह करीब 9:55 बजे मंदिर परिसर पहुंचने के बाद उन्होंने गर्भगृह में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन किए। मुख्यमंत्री के रूप में यह उनकी श्रीकृष्ण जन्मस्थान की 20वीं यात्रा रही।
गर्भगृह की दीवारों को चांदी की परत से सजाया गया था। मंदिर की साज-सज्जा और आध्यात्मिक वातावरण के बीच मुख्यमंत्री काफी देर तक गर्भगृह में विराजे लाला के दर्शन करते रहे। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया।
दर्शन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ योगमाया मंदिर, केशवदेव मंदिर और भागवत भवन भी पहुंचे। मंदिर परिसर में उन्होंने श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं और संबोधित किया।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री गुरुवार को ही मथुरा पहुंच गए थे। उन्होंने वेटेरिनरी विश्वविद्यालय में रात्रि प्रवास किया था।
जन्माष्टमी पर CM योगी ने किया गो पूजन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में गो पूजन भी किया। इस दौरान उन्होंने ब्रजभूमि के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि इस धरती ने अनुकूल और प्रतिकूल, दोनों तरह की परिस्थितियों का सामना किया है।
उन्होंने कहा कि ब्रजभूमि पर अनेक आक्रमण हुए और कई लोगों ने भारत पर अपनी आस्था थोपने का प्रयास किया। लेकिन सनातन आस्था को मिटाने का प्रयास करने वाले स्वयं इतिहास से मिट गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रजभूमि ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की स्मृति आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह भाव आने वाली पीढ़ियों को भी आगे बढ़ने की ऊर्जा देता है। उन्होंने कहा कि करीब 5200 वर्ष पहले भगवान श्रीकृष्ण ने जो संदेश दिए थे, वे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
योगी ने कहा कि जहां सज्जन शक्ति होगी, वहां उसका संरक्षण भी होगा। वहीं, राष्ट्र और समाज विरोधी शक्तियां जब विद्वेष पैदा करने का प्रयास करेंगी तो उनका परिणाम क्या होगा, इसका संदेश भगवान श्रीकृष्ण ने पहले ही दे दिया था।
‘आस्था हमें गति देती है, अनास्था नकारात्मकता की ओर ले जाती है’
मुख्यमंत्री ने कहा कि आस्था व्यक्ति और समाज को आगे बढ़ने की दिशा देती है, जबकि अनास्था नकारात्मकता की ओर ले जाती है। उन्होंने कंस का उदाहरण देते हुए कहा कि अधर्म और अहंकार का अंत निश्चित है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यही भाव और आस्था सनातन की शक्ति है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज देश अपनी विरासत और विकास के बीच बेहतर समन्वय देख रहा है।
उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या का उदाहरण देते हुए कहा कि कभी भव्य स्वरूप की केवल कल्पना की जाती थी, लेकिन आज इन धार्मिक स्थलों ने नया स्वरूप हासिल किया है। उन्होंने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने जिस परंपरा को आगे बढ़ाया था, उसी कड़ी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे बढ़ाने का काम किया है।
अयोध्या की तरह मथुरा-वृंदावन को भव्य बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने अयोध्या के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ वर्ष पहले जिस तरह की अयोध्या की कल्पना भी कठिन थी, आज वहां भव्य राम मंदिर और बेहतर सुविधाएं दिखाई देती हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने के बावजूद व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया गया है।
योगी ने अयोध्या के राम मंदिर आंदोलन और विदेशी आक्रमणों का जिक्र करते हुए कहा कि जिन्होंने भारत की आस्था को समाप्त करने का प्रयास किया, वे आज इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अयोध्या के बदलते स्वरूप को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं और इसे बदनाम करने का प्रयास करते हैं।
मथुरा के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी धराधाम पर योगमाया ने अवतरित होकर कंस को चुनौती दी थी। योगमाया के दर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने मां विंध्यवासिनी धाम की भी याद की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रज तीर्थ विकास परिषद मथुरा-वृंदावन के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए यहां विकास कार्यों को व्यापक स्वरूप दे रहा है। उनका लक्ष्य अयोध्या और काशी की तरह मथुरा-वृंदावन में भी श्रद्धालुओं के लिए भव्य और बेहतर सुविधाओं वाला परिसर उपलब्ध कराना है।
धार्मिक पर्व आस्था के साथ अर्थव्यवस्था का भी आधार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जैसे पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं। इनसे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलती है। समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग किसी न किसी रूप में इन आयोजनों से जुड़ते हैं और उन्हें रोजगार व कारोबार के अवसर मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन बढ़ने से स्थानीय दुकानदारों, कारीगरों, परिवहन क्षेत्र, होटल-धर्मशालाओं और अन्य सेवा क्षेत्रों को भी लाभ मिलता है। यही वजह है कि तीर्थ क्षेत्रों का विकास सांस्कृतिक संरक्षण के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देता है।
भगवान श्रीकृष्ण का संदेश- कर्तव्य को ईमानदारी से निभाएं
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में श्रीमद्भगवद्गीता के कर्मयोग के संदेश का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अपने कर्तव्य का पालन करने की प्रेरणा दी थी।
योगी ने कहा कि व्यक्ति को अपने कर्तव्य का ईमानदारी से निर्वहन करना चाहिए। निष्काम भाव से किया गया कर्म जीवन को सही दिशा देता है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति किसी स्वार्थ या इच्छा के बजाय अपने कर्तव्य को प्राथमिकता देकर काम करता है, तो उसके प्रयास का परिणाम भी सार्थक होता है।
जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा पहुंचे मुख्यमंत्री का पूरा संबोधन इसी भाव के इर्द-गिर्द दिखाई दिया—आस्था, विरासत, कर्तव्य और लोककल्याण। ब्रज की धार्मिक पहचान को विकास से जोड़ने की बात के साथ उन्होंने श्रीकृष्ण के संदेशों को वर्तमान सामाजिक जीवन से जोड़ने का प्रयास भी किया।










