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शिक्षा में राजनीति नहीं, बच्चों के भविष्य पर दें ध्यान: सीएम योगी

On: September 5, 2026
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शिक्षा में राजनीति नहीं, बच्चों के भविष्य पर दें ध्यान, सीएम योगी
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गोरखपुर/5 सितंबर 2026। शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों को बच्चों के भविष्य का निर्माता बताते हुए शिक्षा के क्षेत्र में राजनीति से दूर रहकर गुणवत्ता और नवाचार पर ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को राजनीति के चश्मे से देखने वालों को उत्तर प्रदेश में पिछले वर्षों में हुए बदलाव दिखाई नहीं देंगे। सरकार और शिक्षकों की साझा जिम्मेदारी है कि बच्चों के भीतर ज्ञान, संस्कार और प्रतिभा को विकसित करने के साथ बदलती तकनीक के अनुरूप उन्हें तैयार किया जाए।

मुख्यमंत्री शनिवार को गोरखपुर स्थित योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के 81 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित किया। इनमें बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षक शामिल रहे।

यूपी शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के वाहक हैं शिक्षक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में बीते वर्षों में शिक्षा व्यवस्था में जो सकारात्मक बदलाव आया है, उसके सबसे महत्वपूर्ण वाहक शिक्षक हैं। उनके मुताबिक किसी भी समाज के परिवर्तन की पहली कड़ी शिक्षा होती है और शिक्षा की मजबूत नींव शिक्षक तैयार करते हैं।

उन्होंने शिक्षकों से कहा कि प्रदेश के विद्यालयों में उत्कृष्टता और नवाचार को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए। यह प्रतिस्पर्धा किसी राजनीतिक दल या चुनावी घोषणा से नहीं, बल्कि समय और भविष्य की जरूरतों से होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस बच्चे को शिक्षक आज पढ़ा रहे हैं, उसके जीवन का वह समय दोबारा लौटकर नहीं आएगा। ऐसे में समय के साथ सही दिशा में और सही समय पर निर्णय लेना शिक्षकों के लिए बेहद जरूरी है।

शिक्षा के क्षेत्र में राजनीति पर सीएम योगी का निशाना

सीएम योगी ने कहा कि शिक्षा में राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनावी घोषणाएं करना आसान है, लेकिन विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं विकसित करना चुनौतीपूर्ण काम है। इसी तरह करोड़ों बच्चों के खातों में डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि पहुंचाना और संस्कृत विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति से जोड़ना भी एक बड़ी प्रक्रिया है।

उन्होंने प्रोजेक्ट अलंकार और ऑपरेशन कायाकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यालयों की दशा सुधारने के लिए लिए गए निर्णयों का असर अब जमीन पर दिखाई दे रहा है। उनका कहना था कि टिप्पणी करना आसान है, लेकिन किसी व्यवस्था में वास्तविक बदलाव करके दिखाना कठिन होता है।

मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर भी निशाना साधा। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि यदि बड़े आयोजनों और दूसरे खर्चों में इस्तेमाल होने वाली राशि का कुछ हिस्सा शिक्षा पर लगाया गया होता तो लाखों बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता था।

यूपी के स्कूलों में स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी का विस्तार

मुख्यमंत्री ने यूपी शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश के विद्यालयों में अब स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, अलग-अलग शौचालय, पेयजल और बिजली जैसी सुविधाओं पर काम हुआ है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, 15 हजार से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब और 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा 2.61 लाख से अधिक शिक्षकों को टैबलेट उपलब्ध कराने की बात भी उन्होंने कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में हुए बदलाव को देश देख रहा है और यह मॉडल आगे भी मजबूती के साथ जारी रहेगा।

उन्होंने बताया कि क्लीन एंड ग्रीन स्कूल की दिशा में किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश के 12 विद्यालयों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिले।

2100 से अधिक माध्यमिक विद्यालयों के भवनों में बदलाव

माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पुराने और जर्जर विद्यालय भवनों के स्थान पर नए भवनों के निर्माण के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि उपलब्ध कराई गई। इससे 2,100 से अधिक माध्यमिक विद्यालयों में बेहतर भवन तैयार हुए हैं।

उन्होंने हर जनपद में दो-दो मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय विकसित किए जाने की योजना का भी उल्लेख किया। सरकार की मंशा इसे तहसील स्तर तक ले जाने की है। इन विद्यालयों को डे-स्कूल के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां पहली से 12वीं तक की पढ़ाई एकीकृत परिसर में हो सकेगी।

2017 से पहले विद्यालयों में नकल के अड्डे बनने का आरोप

सीएम योगी ने प्रदेश की पुरानी परीक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले कई विद्यालय नकल के अड्डे बन गए थे और परीक्षा केंद्रों के संचालन में अनियमितताओं की शिकायतें रहती थीं। उनका दावा है कि 2017 के बाद ऐसे विद्यालयों को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले बोर्ड परीक्षाओं में काफी लंबा समय लग जाता था। करीब 56 लाख विद्यार्थी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं में शामिल होते हैं। उनके मुताबिक पहले परीक्षा प्रक्रिया में करीब तीन महीने लगते थे और परिणाम आने में भी लगभग इतना ही समय लग जाता था। इसका सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ता था, क्योंकि उन्हें दूसरे राज्यों के संस्थानों में समय पर प्रवेश नहीं मिल पाता था।

अब परीक्षा और परिणाम समय से होने का दावा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए आगे की पढ़ाई के अवसर आसान हुए हैं।

एआई, रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक के लिए शिक्षकों को तैयार होने की जरूरत

मुख्यमंत्री ने बदलती तकनीक को शिक्षा से जोड़ने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलाव के दौर में शिक्षा व्यवस्था चुपचाप नहीं रह सकती। शिक्षकों और विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक जैसी नई तकनीकों के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा।

उन्होंने कहा कि बाल वाटिका के स्तर से ही बच्चों की शिक्षा और विकास पर ध्यान देना जरूरी है। स्वस्थ और मजबूत बचपन ही किसी देश के सशक्त भविष्य की नींव तैयार करता है।

शिक्षकों को आत्मीयता से दी बधाई

समारोह में पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों से मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से संवाद किया और उन्हें बधाई दी। सम्मान के इस अवसर पर उन्होंने शिक्षकों को केवल सरकारी व्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि प्रदेश की नई पीढ़ी के निर्माण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने वाला वर्ग बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए संसाधन उपलब्ध करा सकती है, लेकिन इन संसाधनों का वास्तविक लाभ बच्चों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी शिक्षक निभाते हैं। इसलिए यूपी शिक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार तभी संभव है, जब तकनीक, बेहतर बुनियादी सुविधाओं और शिक्षक की प्रतिबद्धता—तीनों का तालमेल बने।

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