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डिजिटल अरेस्ट ठगी पर कड़ा वार: CBI का ‘अभय’ चैटबॉट करेगा नकली नोटिस का खुलासा

On: April 19, 2026
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CBI का ‘अभय’ चैटबॉट करेगा नकली नोटिस का खुलासा
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नई दिल्ली, 19 अप्रैल 2026 — देश में तेजी से बढ़ रही डिजिटल अरेस्ट ठगी पर अब सख्ती से लगाम कसने की तैयारी है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) एक नया एआई आधारित चैटबॉट ‘अभय’ लॉन्च करने जा रहा है, जिसका उद्देश्य आम लोगों को फर्जी नोटिस और साइबर धोखाधड़ी से बचाना है।

यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब ठग नई-नई तकनीकों के जरिए लोगों को डराकर लाखों-करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे हैं। CBI का यह कदम न सिर्फ तकनीकी सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि लोगों में जागरूकता भी बढ़ाएगा।

लॉन्च कार्यक्रम में शामिल होंगे CJI सूर्यकांत

सूत्रों के मुताबिक, यह चैटबॉट सोमवार को एक विशेष कार्यक्रम में लॉन्च किया जाएगा। इस मौके पर भारत के मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant भी मौजूद रहेंगे।

यह लॉन्च 22वें डी.पी. कोहली मेमोरियल लेक्चर के दौरान होगा, जहां साइबर अपराध और कानून व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में उत्कृष्ट सेवा देने वाले 24 अधिकारियों को सम्मानित करने की भी योजना है।

क्या है डिजिटल अरेस्ट ठगी का पूरा खेल?

डिजिटल अरेस्ट ठगी आज के समय का सबसे खतरनाक साइबर अपराध बन चुका है। इसमें अपराधी खुद को CBI या पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को कॉल या वीडियो कॉल करते हैं।

  • पीड़ित को फर्जी केस में फंसाने की धमकी दी जाती है
  • नकली नोटिस या दस्तावेज दिखाए जाते हैं
  • “डिजिटल गिरफ्तारी” का डर पैदा किया जाता है
  • फिर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है

कई मामलों में यह ठगी करोड़ों रुपये तक पहुंच चुकी है। डर और भ्रम का फायदा उठाकर ठग लोगों को मानसिक दबाव में ले आते हैं।

‘अभय’ चैटबॉट कैसे करेगा मदद?

CBI का ‘अभय’ चैटबॉट इस पूरे ठगी के खेल को तोड़ने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

  • कोई भी व्यक्ति संदिग्ध नोटिस की जानकारी चैटबॉट में डाल सकेगा
  • सिस्टम तुरंत बताएगा कि नोटिस असली है या नकली
  • यूजर को आगे क्या करना चाहिए, इसकी सलाह भी दी जाएगी

सरल शब्दों में कहें तो यह चैटबॉट लोगों के लिए एक डिजिटल सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा, जो डर की जगह तथ्य और सत्य पर आधारित जानकारी देगा।

साइबर अपराध: एक बढ़ता राष्ट्रीय खतरा

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने साइबर अपराधों को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। अदालत के अनुसार, अलग-अलग मामलों में करीब 54 हजार करोड़ रुपये की ठगी हो चुकी है। इसे “डकैती” जैसा संगठित अपराध बताया गया है।

यह आंकड़ा बताता है कि डिजिटल अरेस्ट ठगी केवल व्यक्तिगत नुकसान नहीं, बल्कि देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन चुकी है।

डी.पी. कोहली की विरासत और आधुनिक चुनौती

यह चैटबॉट उस कार्यक्रम में लॉन्च हो रहा है, जो D. P. Kohli की स्मृति में आयोजित किया जाता है। उन्होंने 1963 में CBI की नींव रखी थी और देश में आधुनिक जांच प्रणाली को मजबूत किया था।

आज, जब अपराध डिजिटल हो चुके हैं, तो जांच एजेंसियां भी उसी गति से तकनीक को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। ‘अभय’ इसी बदलाव की एक मिसाल है।

जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक के साथ-साथ जागरूकता भी जरूरी है। अगर लोग किसी भी संदिग्ध कॉल या नोटिस पर तुरंत भरोसा न करें और पहले उसकी जांच करें, तो ऐसे अपराधों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

CBI का ‘अभय’ चैटबॉट इसी दिशा में एक मजबूत कदम है—जहां डर के बजाय जानकारी, और अफवाह के बजाय सत्य को महत्व दिया जाएगा।

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