नई दिल्ली, 15 जून 2026: पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए अमेरिका और ईरान के बीच हुए अमेरिका-ईरान शांति समझौते का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वागत किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल केवल तत्काल संघर्ष विराम तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता की नींव भी रखेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि भारत इस सहमति का स्वागत करता है। उनके मुताबिक, लंबे समय से जारी संघर्ष ने न केवल पश्चिम एशिया बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित किया है। कई देशों को आर्थिक अस्थिरता का सामना करना पड़ा, जबकि बड़ी संख्या में लोगों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते से क्षेत्रीय स्थिरता की उम्मीद
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारत को विश्वास है कि इस समझौते को प्रभावी ढंग से लागू किए जाने पर क्षेत्र में शांति बहाल करने में मदद मिलेगी। साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री आवाजाही को भी नई गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि अभी भी कई ऐसे मुद्दे हैं जिनका समाधान बातचीत के जरिए किया जाना बाकी है। भारत को उम्मीद है कि आगे की कूटनीतिक प्रक्रिया एक ऐसे व्यापक और अंतिम समझौते तक पहुंचेगी, जो लंबे समय तक टिकाऊ साबित हो।
शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होंगे औपचारिक हस्ताक्षर
अमेरिका और ईरान ने तीन महीने से अधिक समय से जारी विवाद को समाप्त करने के लिए एक फ्रेमवर्क समझौते की घोषणा की है। दोनों देशों की ओर से पुष्टि की गई है कि 19 जून को स्विट्जरलैंड में एक औपचारिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्तावित समझौते में सैन्य अभियानों को समाप्त करना, वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना तथा अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटाना शामिल है। हालांकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों को भविष्य की वार्ताओं के लिए सुरक्षित रखा गया है।
पाकिस्तान ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। पाकिस्तान की ओर से जारी बयान में कहा गया कि दोनों देशों ने लेबनान समेत विभिन्न मोर्चों पर चल रही सैन्य गतिविधियों को तत्काल और स्थायी रूप से रोकने पर सहमति जताई है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह सहमति जमीन पर सफलतापूर्वक लागू होती है, तो इससे पश्चिम एशिया में लंबे समय से चली आ रही अस्थिरता कम हो सकती है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भी राहत देखने को मिल सकती है।
ट्रंप ने समझौते को बताया बड़ी सफलता
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर इस समझौते को बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ समझौता पूरा हो चुका है और इसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के खोलने तथा अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटाने की मंजूरी दी गई है।
ट्रंप ने अपने संदेश में वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के सामान्य होने की उम्मीद जताते हुए कहा कि अब तेल का प्रवाह फिर से सुचारु रूप से शुरू हो सकेगा।
पश्चिम एशिया की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान शांति समझौता यदि तय शर्तों के अनुसार आगे बढ़ता है, तो यह हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धियों में से एक साबित हो सकता है।










