पेरिस/फ्रांस|18 जून 2026: जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन देशों के दौरे के अगले चरण में फ्रांस पहुंचे, जहां उन्होंने वैश्विक औद्योगिक दिग्गज सेंट-गोबेन के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बेनोइट बाजिन से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत और फ्रांस के बीच निवेश, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की कोशिशें तेज हो रही हैं।
प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि इसके केंद्र में भविष्य की तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक निवेश को भारत की ओर आकर्षित करने की रणनीति भी साफ नजर आ रही है।
सेंट-गोबेन के CEO से मुलाकात क्यों रही खास?
प्रधानमंत्री मोदी और बेनोइट बाजिन के बीच हुई बातचीत को भारत-फ्रांस आर्थिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सेंट-गोबेन दुनिया की अग्रणी निर्माण सामग्री और औद्योगिक समाधान प्रदान करने वाली कंपनियों में शामिल है, जिसकी भारत में भी मजबूत मौजूदगी है।
बैठक के दौरान विनिर्माण, सतत विकास, हरित प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, बाजिन ने भारत में कंपनी के विस्तार और भविष्य के निवेश से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी साझा की।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत लगातार वैश्विक कंपनियों के लिए निवेश का पसंदीदा गंतव्य बन रहा है और प्रधानमंत्री की ऐसी उच्चस्तरीय मुलाकातें इस दिशा में विश्वास बढ़ाने का काम करती हैं।
कई वैश्विक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से भी मिले पीएम मोदी
फ्रांस प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने केवल सेंट-गोबेन ही नहीं, बल्कि कई अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से भी मुलाकात की। इन बैठकों का केंद्र निवेश, रेलवे आधुनिकीकरण, डिजिटल परिवर्तन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे उभरते क्षेत्र रहे।
एल्स्टॉम के CEO मार्टिन सियोन के साथ हुई चर्चा में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर और मोबिलिटी सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। सियोन ने भारत में कंपनी की भविष्य की विस्तार योजनाओं की जानकारी दी।
वहीं, मिस्ट्रल AI के सह-संस्थापक और CEO आर्थर मेंश के साथ बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने भारत के तेजी से विकसित हो रहे AI इकोसिस्टम की संभावनाओं को रेखांकित किया। मेंश ने भारतीय कंपनियों और संस्थानों के साथ मिलकर नवाचार को आगे बढ़ाने में गहरी रुचि दिखाई।
| पीएम मोदी किससे मिले? | कंपनी | पद |
|---|---|---|
| बेनोइट बाजिन | सेंट-गोबेन | चेयरमैन एवं CEO |
| मार्टिन सियोन | एल्स्टॉम | CEO |
| आर्थर मेंश | मिस्ट्रल AI | सह-संस्थापक एवं CEO |
विवाटेक 2026 में भारत की होगी विशेष भूमिका
पेरिस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी यूरोप के सबसे बड़े प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप आयोजन विवाटेक 2026 में भी हिस्सा लेंगे। इस वर्ष भारत को ‘AI पार्टनर कंट्री’ का दर्जा दिया गया है, जो वैश्विक डिजिटल परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
सम्मेलन में प्रधानमंत्री भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप संस्कृति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती तकनीकों में हुई प्रगति को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेंगे। खास बात यह है कि इस आयोजन में भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय मंडप भी स्थापित किया गया है, जहां देश की तकनीकी उपलब्धियों का प्रदर्शन किया जाएगा।
मैक्रों और मोदी देंगे तकनीकी सहयोग का साझा संदेश
विवाटेक सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों संयुक्त रूप से कई महत्वपूर्ण सत्रों में हिस्सा लेने वाले हैं। दोनों नेताओं का साझा संदेश तकनीकी सहयोग, डिजिटल नवाचार, अनुसंधान और स्टार्टअप साझेदारी पर केंद्रित रहने की संभावना है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह मंच भारत और फ्रांस के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत प्रौद्योगिकी और अनुसंधान आधारित सहयोग को नई दिशा दे सकता है। साथ ही भारत खुद को वैश्विक डिजिटल हब और नवाचार केंद्र के रूप में मजबूती से स्थापित करने का प्रयास करेगा।
जी-7 के बाद विकासशील देशों की आवाज भी बने पीएम मोदी
फ्रांस पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन में सतत विकास, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा था। उन्होंने विकासशील देशों और वैश्विक दक्षिण की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए अधिक समावेशी वैश्विक व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जी-7 देशों, भारत और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच मजबूत सहयोग से व्यापार, कनेक्टिविटी और विकास को नई गति मिल सकती है। उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के कारण उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहे आर्थिक प्रभावों की ओर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया।
भारत की तकनीकी क्षमता, निवेश आकर्षण और वैश्विक साझेदारियों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी का फ्रांस दौरा आने वाले वर्षों में दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बनाने वाला कदम माना जा रहा है।












