23 जून 2026/नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों और बदलते सुरक्षा परिदृश्य के बीच नई दिल्ली में आयोजित BRICS देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) की 16वीं बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण रही। बैठक की अध्यक्षता करते हुए भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में BRICS को पहले से अधिक सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभानी होगी।
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट संकेत दिया कि अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ मजबूत होते संबंधों के बावजूद वह BRICS मंच को वैश्विक सहयोग और संतुलन के लिए एक अहम संगठन मानता है। यही वजह है कि नई दिल्ली में हुई इस बैठक में भारत ने बहुपक्षीय सहयोग और सामूहिक सुरक्षा पर विशेष जोर दिया।
BRICS बैठक में वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों पर हुई चर्चा
बैठक में BRICS सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने दुनिया के सामने मौजूद पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। चर्चा के प्रमुख विषयों में ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) की मजबूती, जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियां और आतंकवादी संगठनों द्वारा नई तकनीकों के दुरुपयोग जैसे मुद्दे शामिल रहे।
अजीत डोभाल ने कहा कि दुनिया इस समय आर्थिक दबावों, क्षेत्रीय संघर्षों और तेजी से विकसित हो रही विघटनकारी तकनीकों का सामना कर रही है। ऐसे दौर में बहुपक्षवाद कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है और संघर्ष समाधान के पारंपरिक तरीके अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में BRICS देशों को मिलकर अधिक प्रभावी भूमिका निभानी चाहिए।
अमेरिका-ईरान समझौते का भारत ने किया स्वागत
बैठक के दौरान अजीत डोभाल ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत इस समझौते को सकारात्मक कदम के रूप में देखता है और उम्मीद करता है कि यह दीर्घकालिक स्थिरता की दिशा में सफल साबित होगा।
डोभाल ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने को वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार इससे तेल और गैस की आपूर्ति में स्थिरता आएगी तथा उर्वरक, रसायन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की वैश्विक सप्लाई चेन को भी राहत मिलेगी।
आतंकवाद और साइबर खतरों पर साझा रणनीति बनाने पर सहमति
बैठक में BRICS आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्यसमूह और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी सुरक्षा कार्यसमूह की गतिविधियों की समीक्षा भी की गई। सदस्य देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत ने सूचना साझा करने की व्यवस्था मजबूत करने, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और सदस्य देशों की संस्थागत क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। विशेष रूप से उभरती तकनीकों के दुरुपयोग को रोकने और साइबर सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
पीएम मोदी से मिले BRICS देशों के प्रतिनिधि
बैठक समाप्त होने के बाद BRICS सदस्य देशों के सभी प्रतिनिधिमंडलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संयुक्त मुलाकात की। इस दौरान वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय साझेदारी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी, रूस के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद प्रमुख सर्गेई शोइगु, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी गादिर नेजामीपुर समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक के दौरान ईरान के प्रतिनिधि ने क्षेत्रीय तनाव और हालिया संघर्षों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मिनाब शहर के एक स्कूल पर हुए हमले का जिक्र करते हुए क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को सामने रखा। इस पर सदस्य देशों ने शांति, संवाद और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर बल दिया।
नई दिल्ली में आयोजित यह BRICS बैठक ऐसे समय में हुई है जब दुनिया कई मोर्चों पर अस्थिरता का सामना कर रही है। ऐसे में भारत ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग, संवाद और बहुपक्षीय संस्थाओं की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।










