लखनऊ/23 जून 2026: लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हाल ही में हुई दर्दनाक अग्निकांड की घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे को पूरे प्रदेश के लिए एक गंभीर चेतावनी बताते हुए कहा है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यापक स्तर पर फायर सेफ्टी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अग्नि सुरक्षा के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मंगलवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर में मिशन मोड पर फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि जनसुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण अभियान है।
फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान चलाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सभी जिलों में विशेष टीमों का गठन कर अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, नर्सिंग होम, कोचिंग संस्थानों, शॉपिंग मॉल, सरकारी कार्यालयों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की विस्तृत जांच की जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी भवन निर्धारित अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि लोग सुरक्षा नियमों को समझें और उनका पालन करें। इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि अभियान के नाम पर किसी भी नागरिक का अनावश्यक उत्पीड़न न हो।
कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक भवनों पर विशेष नजर
बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी कोचिंग संस्थानों का विधिवत पंजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही यह भी कहा कि जिन व्यावसायिक भवनों को अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) मिला है, उसका स्पष्ट प्रदर्शन भवन परिसर में किया जाए।
उन्होंने विशेष रूप से बेसमेंट के उपयोग को लेकर सख्त रुख अपनाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में बेसमेंट में कोचिंग या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन नहीं होना चाहिए। यदि बेसमेंट पार्किंग के लिए स्वीकृत है तो उसका उपयोग केवल पार्किंग के लिए ही किया जाए।
नियमों के विपरीत उपयोग पर होगी कठोर कार्रवाई
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भवन या भूमि का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए होना चाहिए, जिसके लिए उसे स्वीकृति दी गई है। आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन को लेकर भी अधिकारियों को सख्त निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा व्यावसायिक भवनों के विद्युत भार (लोड) की जांच कराने को कहा गया है। जहां निर्धारित मानकों से अधिक विद्युत उपयोग या अन्य नियमों का उल्लंघन पाया जाए, वहां तत्काल कठोर कार्रवाई की जाएगी।
हादसे के बाद 14 एम्बुलेंस भेजी गई थीं
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने लखनऊ अग्निकांड के बाद किए गए राहत और बचाव कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी कि घटना की सूचना मिलते ही 14 एम्बुलेंस तत्काल मौके पर भेजी गई थीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में रिस्पॉन्स टाइम जितना कम होगा, राहत और बचाव कार्य उतने ही प्रभावी होंगे। उन्होंने सभी संबंधित एजेंसियों को अपने रिस्पॉन्स टाइम को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए।
अस्पतालों की भी होगी फायर सेफ्टी जांच
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों तथा स्वास्थ्य संस्थानों की प्राथमिकता के आधार पर फायर सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए। उन्होंने हाल ही में नई दिल्ली में हुई अग्नि दुर्घटना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है।
उन्होंने अग्निशमन विभाग को आधुनिक उपकरणों और तकनीकी संसाधनों से लैस करने के निर्देश भी दिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तेज और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
प्रदेश में बढ़ाया जाएगा अग्निशमन नेटवर्क
बैठक में महानिदेशक अग्निशमन सेवा ने बताया कि प्रदेश की 350 तहसीलों में से 296 तहसीलों में वर्तमान में 326 स्थायी अग्निशमन केंद्र संचालित हैं। इसके अलावा 26 नए अग्निशमन केंद्र उद्घाटन के लिए तैयार हैं, जबकि 25 केंद्रों का निर्माण कार्य जारी है। 47 नए केंद्रों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भी तैयार की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने शेष तहसीलों में भी जल्द से जल्द अग्निशमन सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि अग्नि सुरक्षा केवल एक कानूनी औपचारिकता नहीं बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। सभी विभागों को समन्वित प्रयासों के साथ काम करते हुए प्रदेश में सुरक्षित और जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।












